किससे आशा करें और अब…

किससे आशा करें और अब…
February 12 11:43 2026

डॉ. रामवीर 
किससे आशा करें और अब
किस पे करें विश्वास
बदल गए हैं मित्र पुराने
जो थे खासम खास।

कुछ साथी तो नेताओं की
सुन सुन कर बकवास
इतने प्रभावित हुए कि बन गए
उनके पक्के दास।

झूठे देशभक्त आजकल
फैला रहे हैं पाश
फंस जाते हैं नहीं जानते
जो इनका इतिहास।

जैसे वादे किए गए वे
सच्चे होते काश
तो भारत का विश्वपटल पर
न होता उपहास।

विश्व बैंक के कर्जे से जो
किया जा रहा विकास
कर्जे की शर्तें देखो तो
दिखता भावी विनाश।

‘ऋणकर्ता पिता शत्रु:’ यह
हम को गया सिखाया
बाप बने नेता ने शत्रुता
का भी रोल निभाया।

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Mazdoor Morcha
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