फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) दंगाई बिट्टू बजरंगी और मोनू मानेसर के कारण पिछले साल नूंह की जो ब्रजमंडल जलाभिषेक यात्रा संघियों द्वारा दंगे में तब्दील कराई गई थी इस बार उसमें परंपरागत हिंदू-मुस्लिम प्रेम और भाईचारा नजर आया। दरअसल इस बार सभ्य हिंदू समाज ने इन दोनों नफरतियों को यात्रा से दूर रखा, तो मुसलमानों ने जलाभिषेक यात्रियों का जगह जगह दिल खोलकर फूल मालाओं से स्वागत किया। प्रेम सद्भाव के इस माहौल ने साबित कर दिया कि हिंदू हों या मुसलमान जनता में तो प्यार की कमी नहीं है लेकिन गंदी सियासत समाज को धर्म के नाम पर बांट कर सत्ता हासिल के लिए दंगाई बिटुओं का इस्तेमाल करती है।
सैकड़ों सालों से नूंह के प्राचीन नल्हड़ मंदिर में जलाभिषेक यात्री आते रहे हैं, और वहां के मुसलमानों ने हमेशा ही खुले दिल से जलाभिषेक यात्रियों का स्वागत सम्मान किया है। पिछले साल भी यह यात्रा प्रेम से ही संपन्न होती लेकिन खट्टर की शह पर उसके प्रिय बिट्टू बजरंगी ने इस धार्मिक यात्रा को सांप्रदायिक बनाते हुए हमेशा स्वागत सत्कार करने वाले मुस्लिम समाज को ललकार दिया कि तुम्हारा जीजा आ रहा है फिर न कहना पहले बताया नहीं था। उधर दंगाई मोनू मानेसर ने भी जलाभिषेक यात्रा के नाम पर दंगाइयों को नूंह पहुंच कर हथियार और बल प्रदर्शन करने का न्यौता दिया था।
सांप्रदायिकता के रंग में डूबी खट्टर सरकार की शह पर जल और कांवड़ की जगह तलवार, बंदूकें आदि हथियार लेकर पहुंचने वाले बिटुओं आदि दंगाईयों को वहां से चप्पल जूते छोड़ कर भागना पड़ा था। इसके विपरीत इस साल मुसलमान समाज स्वागत की परंपरा निभाता दिखाई दिया। इससे यह साबित होता है कि पिछले साल नूंह में जो दंगे हुए थे उसकी वजह सरकार द्वारा प्रायोजित बिटुओं-मोनू मानेसरों की बदमाशी ही थी, वो वहां दंगा कराने की नीयत से ही गए थे।
खट्टर सरकार ने भी अपनी गोदी में पाले गए दंगाइयों का नंगे होकर समर्थन किया और पुलिस द्वारा एकतरफा कार्रवाई की गई। कानून और प्रक्रिया ताक पर रख कर नूंह में भी बुलडोजर न्याय का नंगा खेल खेला गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 753 दुकान, मकान, इमारतों को बुलडोजर से जमींदोज़ कर दिया गया था। मुसलमानों या गैर हिंदुओं को आर्थिक रूप से अपंग करने, उनका बायकाट करने के संघ के एजेंडे के तहत ही खट्टर के आदेश पर ही उनकी दुकानें, घर तोड़े गए, ढहाए गए, झूठे मुकदमे दर्ज कराए गए। वो तो हरियाणा एंड पंजाब हाईकोर्ट ने सरकार की इस अनैतिक कार्रवाई का स्वत: संज्ञान लेते हुए 8 अगस्त 2023 को इस पर रोक लगाने का आदेश दिया था वरना भगवा ब्रिगेड का प्यादा खट्टर न जाने कितने बेगुनाहों का घर उजड़वा देता। बुलडोजर न्याय से क्षुब्ध हाईकोर्ट के जस्टिस जीएस संधावालिया और हरप्रीत कौर जीवन की बेंच ने सरकारी कार्रवाई पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा था कि जाहिर तौर पर बिना किसी आदेश और नोटिस की उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना इमारतों को गिराया गया है। जस्टिस जीएस संधावालिया ने सरकार से पूछा था कि क्या कानून-व्यवस्था की समस्या की आड़ में किसी विशेष समुदाय की इमारतों को गिराया जा रहा है और राज्य की ओर से जातीय सफाए की कवायद की जा रही है ? खट्टर की सरकार इसका कोई जवाब नहीं दे सकी थी, हां हुआ ये कि तीन दिन में ही इन न्यायमूर्तियों को मामले से अलग कर दिया गया, बताया गया कि जजों की बेंच बदली गई है उनका तबादला नहीं हुआ है। जजों की बेंच बदली तो फिर सुनवाई भी ठंडे बस्ते में चली गई।
कानूनी कार्रवाई एकतरफा न दिखे इसके लिए बिट्टू के खिलाफ केस दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी का नाटक किया गया। सरकारी दामाद बिट्टू को तो एक चंद दिनों में ही जमानत मिल गई लेकिन नूंह में गिरफ्तार किए गए करीब पौने दो सौ लोगों में से अधिकतर अभी भी जेल में ही हैं। बावजूद इसके इस बार ब्रज मंडल यात्रा में क्षेत्र की सैकड़ों साल पुरानी हिंदू मुस्लिम एकता नजर आई।
दरअसल, इलाके की जागरूक जनता विशेषकर जाटों द्वारा सरकार की इस घोर सांप्रदायिकता का विरोध करने से खट्टर सरकार को अपनी उस मूर्खता का ज्ञान हो गया जिसके चलते वह यहां दंगे कराना चाहती थी। दंगों में हिंदू-मुस्लिम एकता को तोडऩे वालों के खिलाफ और एकता बनाए रखने के लिए पंचायतों के फैसले धड़ाधड़ आने लगे। इन पंचायतों ने धर्म के नाम पर दंगे भडक़ाने वालों का साथ देने से साफ इनकार कर खट्टर और संघियों को स्पष्ट संदेश दे दिया था कि प्रदेश को सांप्रदायिकता की आग में नहीं जलने देंगे।
इस बार संघी, बजरंगी, नफरती बिटुआ, मोनुओं को इस यात्रा से दूर रखा गया। बिट्टू के जीजा बन कर पहुंचने पर पिछले साल जिस जगह पर उसका स्वागत पत्थरों से किया गया इस बार मुस्लिम समाज के लोग उसी जगह फूल माला लेकर स्वागत के लिए खड़े थे, ब्रजमंडल यात्रियों की प्रेम पूर्वक सेवा की गई और जलपान भी कराया गया। सरकार को इस मुगालते में नहीं रहना चाहिए कि इस बार ब्रज मंडल यात्रा भारी पुलिस बल के कारण शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। भारी पुलिस बल तो पिछली बार भी था लेकिन दंगा शुरू होने पर उनमें से अधिकतर जान बचाकर भागते नजर आए थे। यह यात्रा तो स्थानीय लोगों के कारण ही प्रेम-सद्भाव से संपन्न हुई, जो इलाके की सदियों पुरानी पहचान है। इससे ये साबित हो गया है कि अगर सरकार और उसकी शह पर सांप्रदायिकता का जहर घोलने वाले संघी बदमाशियां न करें तो क्या हिंदू क्या मुसलमान सभी प्रेम शांति और सुकून से रहना चाहते हैं।