फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एक समय था जब भ्रष्टाचारियों को बुरी नजर से देखा जाता था अब तो सरकार ही भ्रष्टाचारियों को बड़े बड़े ओहदे देकर हरामखोरी को बढ़ावा दे रही है। सीएम सैनी ने प्रधान सचिव अरुण गुप्ता को दरकिनार करते हुए सेवानिवृत्त आईएएस भ्रष्टाचारी खुल्लर को मुख्यमंत्री कार्यालय का ओवरऑल इंचार्ज बनाने के साथ गृह, विजिलेंस, स्वास्थ्य, ऊर्जा, न्यायिक प्रबंधन सहित कुल 18 विभागों का प्रमुख बना दिया। जबकि प्रधान सचिव अरुण गुप्ता को सिविल एविएशेन, वाइल्ड लाइफ, सामाजिक न्याय जैसे दस बेफिजूले विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सीएम सैनी खुल्लर को लूट कमाई वाले सारे विभाग अक्तूबर 2024 में ही सौंपना चाहते थे, यहां तक कि उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद पीएससीएम बना कर कैबिनेट मंत्री तक का दर्जा दिया था, लेकिन भारी विरोध के कारण निर्णय वापस लेना पड़ा था। करीब सोलह महीने इंतजार के बाद ऊपर से नीचे तक सबको सेट करने के बाद सैनी ने आखिरकार अपने मन की कर ही डाली। खुल्लर का कद बढ़ाए जाने से सजातीय और करीबी विधायक धनेश अदलखा ऐसे खुश हो रहा है मानो सीएम ने उसका कद बढ़ा दिया है।
अदलखा का खुश होना बनता है क्योंकि खुल्लर से उसके उस समय के लूट-बांट के संबंध हैं जब राजेश खुल्लर यहां निगमायुक्त रहा था। बताया जाता है कि इसी राजेश खुल्लर ने अदलखा को हूडा के रिज्यूम प्लॉट, विवादित प्लॉटों को रिअलॉट करवा कर मोटी कमाई और हिस्सापत्ती की तरकीबें सिखाईं। खुल्लर की शह पर शातिर अदलखा ने हूडा में गहरी पैठ बना ली और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर जैसे डीलर का साथ मिला तो जमकर लूट कमाई की। कहा जाता है कि खुल्लर के निगमायुक्त बनने के बाद ही नगर निगम में व्यक्तिगत भ्रष्टाचार का नया युग प्रारंभ हुआ जो अब अपने चरम पर है। तब इन दोनों ने मिल कर निगम में कमीशनखोरी के नए कीर्तिमान गढ़े। खुल्लर के जमाने में ही पार्कों में ओपन जिम, कैनोपी, बेंच, स्ट्रीट लाइटें लगाने में बड़ी कमीशनखोरी की चर्चाएं आज भी होती हैं, अधिकतर ठेके गूजर-अदलखा के चेले ठेकेदारों को ही मिले थे। खुल्लर के शातिराना भ्रष्टाचार को समझते हुए ही पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा ने उसे खुड्डे लाइन लगा दिया था। केंद्र में डेप्युटेशन पर जाने के बाद चापलूस खुल्लर ने विदेश में सेवाएं दीं और वहीं रिटायर भी हुआ। लौटा तो मनोहर लाल खट्टर ने उसे लपक लिया और मुख्यमंत्री का प्रधान सचिव बना डाला। इस पद पर रहकर खुल्लर ने नगर निगम में दो सौ करोड़ घोटाले के आरोपी सतबीरा को भुगतान करने के लिए निगमायुक्त को फोन कर दबाव बनाया।
जानकार कहते हैं कि खुल्लर की भ्रष्टाचारी प्रतिभा को सजातीय मनोहर लाल खट्टर ने पहचाना और उन्हें अपना अतिरिक्त प्रमुख सचिव बनाया। इस दौरान खट्टर का प्रिय चेला धनेश अदलखा खुल्लर के और करीब आ गया। पार्षद अदलखा को नगर निगम की वित्त कमेटी का सदस्य बनवाने में भी गूजर से ज्यादा खुल्लर की ही भूमिका बताई जाती है। वित्त कमेटी का सदस्य रहते हुए अदलखा ने क्या क्या गुल खिलाए इससे समझा जा सकता है कि उसके ही कार्यकाल में नगर निगम में दो सौ करोड़ के घोटाले सहित करोड़ों रुपयों के अन्य गबन-घोटाले हुए। जानकार कहते हैं कि संघ के कठपुतली सीएम सैनी ने अक्तूबर 2024 में अपना मुख्य प्रधान सचिव संघ के इशारे पर ही लगाया था, क्योंकि संघी खट्टर खुल्लर को लगवा कर अपने कार्यकाल के पापों पर पर्दा डालना चाहता था। सैनी ने खुल्लर को सभी प्रमुख विभाग भी सौंप दिए थे जिनमें शहरी स्थानीय निकाय भी था। रिटायर्ड खुल्लर को इतनी ताकत देने का विरोध विपुल गोयल सहित भाजपा के कई कद्दावर नेताओं ने किया और आईएएस लॉबी में भी नाराजगी थी। मजबूरी में तब सैनी को खुल्लर से महत्वपूर्ण विभाग लेने पड़े थे।
बताया जा रहा है कि बावजूद इसके पीएस टू सीएम होने के कारण खुल्लर की हर विभाग में दखल रहती है यहां तक कि शहरी स्थानीय निकाय की फाइलें भी उसके पास से ही होकर सीएम तक पहुंचतीं। इसी कारण अदलखा नगर निगम के अधिकारियों पर अपना रौब जमाता है। हालात ये हैं कि निगम अधिकारी कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की बजाय अदलखा की जी हुजूरी करते हैं क्योंकि उन्हें इस बात का अहसास है कि सीएम सैनी तो कठपुतली है शासन की असली बागडोर तो खुल्लर के हाथों में है यानी जो खुल्लर चाहेगा सैनी वही करेगा। अदलखा की खुशी का एक कारण खुल्लर को विजिलेंस विभाग सौंपा जाना है। वह पहले ही विजिलेंस को अपनी मुट्ठी में बताता रहा है, खुल्लर के हाथों बागडोर आने पर सारी पेंडिंग जांचें खत्म कराने का आत्मविश्वास उसमें बढ़ गया है। विधायक रहते हुए अदलखा नगर निगम, बिजली निगम, पुलिस विभाग और स्वास्थ्य महकमे को अपने हिसाब से चला रहा है, अब पापा खुल्लर के सभी 18 विभागों में भी हाथ आजमाएगा, क्योंकि वह खुल्लर का खास चेला रहा है और अब तो विधायक भी है।
हालांकि प्रशासनिक मामलों के जानकार रिटायर्ड खुल्लर को पूरी ताकत दिए जाने को गलत परंपरा डाला जाना करार दे रहे हैं, इन लोगों के अनुसार प्रदेश में एक से एक काबिल और ईमानदार वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मौजूद हैं जो मुख्यमंत्री का प्रधान मुख्य सचिव बनने के न केवल योग्य हैं बल्कि देखा जाए तो उन्हें ही यह पद मिलना चाहिए। खुल्लर सेवानिवृत्त हो चुके हैं, प्रदेश के सबसे बड़े प्रशासनिक ओहदे पर एक ऐसे व्यक्ति को, जो किसी भी निर्णय के लिए जिम्मेदार नहीं माना जा सकता, को बैठाया जाना पूरी तरह से अनुचित और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना ही है, वह भी खुल्लर जैसे को जिसका पूरा कॅरियर ही भ्रष्टाचार और विवादों से रंगीन रहा हो। ऐसे में भ्रष्टाचारियों का खुश होना स्वाभाविक है तो अदलखा भी खुश हो रहा है।