दूध की मक्खी हो गई सीमा त्रिखा एनआईटी दशहरे की बागडोर फिर से राजेश भाटिया के हाथ

दूध की मक्खी हो गई सीमा त्रिखा एनआईटी दशहरे की बागडोर फिर से राजेश भाटिया के हाथ
October 05 05:36 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सीमा त्रिखा के सत्ता से उतरते ही एनआईटी तीन का दशहरा करीब आठ साल बाद फिर से सिद्धपीठ श्रीहनुमान मंदिर के प्रधान राजेश भाटिया की अगुवाई में मनाया गया। इस कार्यक्रम में कभी सीमा त्रिखा के खास रहे केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के अलावा बडख़ल विधायक धनेश अदलखा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में रावण दहन से ज्यादा चर्चा सीमा त्रिखा को दूध की मक्खी की तरह निकाल कर हाशिए पर डाले जाने और राजेश भाटिया एंड कंपनी का विपुल गोयल-राजेश नागर के खेमे से पलटी मारने की रही।

सुधी पाठकों को याद होगा कि पहली बार विधायक बनते ही सीमा त्रिखा ने पंजाबी समुदाय में अपना टोरा कायम करने के लिए उस समय बिरादरी में मजबूत पकड़ रखने वाले राजेश भाटिया के पर कतरने शुरू कर दिए थे। पंजाबी सीएम के सान्निध्य के अलावा राजनीतिक गुरू केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के भरपूर सहयोग के कारण सीमा त्रिखा ने राजेश भाटिया एंड कंपनी को खुड्डे लाइन लगाने के लिए सत्ता का दम दिखाते हुए एनआईटी तीन का दशहरा उनसे छीन लिया था।

राजेश भाटिया के लिए रावण दहन कार्यक्रम हथियाया जाना केवल सामाजिक सम्मान को ठेस-लगना ही नहीं था बल्कि इससे होने वाली पचासों लाख के कारोबार से हाथ धोना भी था। उस समय राजेश भाटिया कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल की शरण में भी चले गए थे। पाठक भूले नहीं होंगे कि इसी दशहरा मैदान में कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल और केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर मंच पर ही आपस में भिड़ गए थे, इस लड़ाई के पीछे राजेश भाटिया प्रकरण भी एक कारण था। हालांकि पंजाबी समाज राजेश भाटिया के अधिकार छीने जाने से सीमा त्रिखा से काफी नाराज था लेकिन सत्ता पंजाबी बिरादरी के हाथ में ही रहे इसलिए दोबारा भी उन्हें वोट देकर जिताया गया। हालांकि बिरादरी में यह नाराजगी बनी रही। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की तरह उनकी चेली सीमा त्रिखा भी बीते दस साल में जनहित के कोई भी काम नहीं करा पाई। उल्टे 102 करोड़ का पेरीफेरल रोड घोटाला, एनआईटी में सीवर लाइनों की दुर्दशा, जलभराव, टूटी सड़कें, पेयजल समस्या का संकट बढ़ता चला गया। उनकी छवि भूमाफिया समर्थक विधायक की बन गई।

इस सबका फायदा खट्टर के खास चेले और पंजाबी बिरादरी के धनेश अदलखा ने उठाया और उसने सीमा का टिकट कटवा दिया। बताया जाता है कि अदलखा ने टिकट का दावा पेश करते हुए पंजाबी बिरादरी में सीमा के प्रति रोष होने और उसके समर्थन में होना भी बताया था। भाजपा के जानकारों के अनुसार अदलखा ने चुनाव से पहले राजेश भाटिया को उसका खोया सम्मान लौटाने का वादा कर अपने साथ मिलाया था। राजेश भाटिया ने भी खुल कर अदलखा के समर्थन में सभाएं करवाई थीं। इस तरह अदलखा ने सीमा को खुड्डे लाइन लगवा दिया। सीमा की बची खुची इज्जत और मान अदलखा ने दशहरा मैदान का कार्यक्रम एक बार फिर राजेश भाटिया को सौंप कर पूरी तरह समाप्त कर दिया। भाजपाइयों में चर्चा है कि जिस केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर ने आठ साल पहले सीमा त्रिखा का भरपूर समर्थन करते हुए राजेश भाटिया को हाशिए पर पहुंचाया था उसी गूजर ने सत्ता से हटते ही सीमा को दूध की मक्खी की तरह निकाल कर फिर से भाटिया का दामन थाम लिया। चर्चा तो राजेश भाटिया की गद्दारी की भी खूब हो रही है।

कहा जा रहा है कि जो राजेश भाटिया दो साल पहले तक गूजर-त्रिखा का परम विरोधी होता था और तिगांव विधायक राजेश नागर, पूर्व मंत्री विपुल गोयल को अपने कार्यक्रमों में बुलाता था, उनसे प्रगाढ़ता दिखा कर समाज में खुद को स्थापित किए रहने का पाखंड करता था, अदलखा के विधायक बनते ही पलटी मार चुका है। अब उसके बैनर पर राजेश नागर और विपुल गोयल नदारद हैं और मुख्य अतिथि धनेश अदलखा व कृष्णपाल गूजर हो गए हैं।

सीमा त्रिखा की इस बेइज्जती पर उनके चंद समर्थकों के अलावा पंजाबी बिरादरी में कोई खास प्रक्रिया नहीं दिखी। राजनीतिक जानकार कहते हैं कि त्रिखा ने बिरादरी का इस्तेमाल वोट लेने के लिए तो खूब किया लेकिन उसके लिए कुछ खास कतई नहीं किया। वैसे भी भाजपाइयों की रीति-नीति सत्ता को प्रणाम करने वाली रही है, ऐसे में यदि सीमा कोपभवन में भेज दी गई हैं तो यह कोई नई बात नहीं है।

लूट कमाई की दी छूट
बताया जा रहा है कि अदलखा ने राजेश भाटिया को न केवल दशहरा मैदान में रावण दहन का कार्यक्रम करने का अधिकार वापस दिलाया है बल्कि मोटी कमाई की छूट भी दी है। चर्चा है कि दशहरा के नाम पर केवल एनआईटी एक मार्केट से ही पचास लाख रुपये से अधिक की वसूली की गई है। इसके अलावा मैदान में लगने वाले मेले से उगाही का अधिकार भी दिया गया है। बताया जा रहा है कि मेले में दुकान लगाने वालों से बहुत मोटी वसूली की गई है। मोटा शुल्क देकर दुकान लगाने वालों के हितों को नुकसान न पहुंचे इसलिए मेला परिसर के बाहर किसी भी झूला, खेल, रेहड़ी-पटरी वाले को दुकान लगाने नहीं दी जा रही है। बेचारे, नगर निगम का शुल्क अदा कर दुकान लगाने की गुहार लगाते रहे लेकिन सुनवाई तो दूर उनकी दुकानें उखाड़ कर फेक दी गईं। मोटा नजराना देकर मेला परिसर में दुकान लगाने वाले भरपाई करने के लिए बाजार से दो गुना तक महंगा सामान बेच रहे हैं।

रावण परिवार ने अदलखा के हाथों जलने से किया इनकार
सीमा त्रिखा को किनारे लगाकर दशहरा हथियाने का जश्र मना रहे राजेश भाटिया ने अहसान करने वाले धनेश अदलखा को मुख्य अतिथि बना कर उसके हाथों रावण दहन करने का कार्यक्रम रखा था। समय पर अदलखा ने पहले मेघनाद के पुतले को आग लगाई जिसने जलने से इनकार कर दिया। इसके बाद कु़ंभकर्ण के पुतले को भी जलाने का प्रयास किया लेकिन वो भी विफल हो गया। आखिर में रावण के पुतले पर अग्रिबाण छोड़ा लेकिन वो भी नहीं जला। फिर क्या था राजेश भाटिया सहित अन्य चिंटू रावण को आग लगाने में धनेश अदलखा की मदद में जुट गए लेकिन रावण सहित तीनों पुतलों ने जैसेे अदलखा के हाथों जलने से इनकार कर दिया। मानो कह रहे हों कि हम बुराई के प्रतीक जरूर हैं लेकिन ऐसे व्यक्ति के हाथों नहीं जलेंगे जो बुराई में हमसे भी बड़ा हो। ऐसे भ्रष्टाचारी, रिश्वतखोर, जनता की गाढ़ी कमाई हड़पने वाले, गिरफ्तारी से बचने के लिए फरारी काट चुके व्यक्ति के हाथों जलना हमें मंजूर नहीं। ये हमें जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत का ढोल तो पीट लेंगे लेकिन अपने अंदर की बुराई नहीं जला पाएंगे तो ऐसे ढोंगियों के हाथों क्या जलना?

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Mazdoor Morcha
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