जैसा कि ‘मज़दूर मोर्चा’ के पिछले अंक में बताया गया था कि कॉर्पोरेशन द्वारा दस नए मेडिकल कॉलेज अस्पताल खोलने का निर्णय मंत्री जी ने ले लिया है, उसकी विस्तृत जानकारी उपलब्ध हो गई है जो इस प्रकार है:-
1. अंधेरी (महाराष्ट्र), 2.बसई दारापुर (दिल्ली), 3.गुवाहाटी-बेलटोला (आसाम), 4.इंदौर (मध्यप्रदेश) 5.जयपुर (राजस्थान), 6. लुधियाना (पंजाब), 7.नरोदा-बापू नगर (गुजरात), 8. रांची (झारखंड), 9.नोएडा (उत्तर प्रदेश), 10. वाराणसी (उत्तर प्रदेश)।
विदित है कि बसई दारापुर में वर्ष 2012 से मेडिकल कॉलेज तो चल रहा है लेकिन वहां एमबीबीएस की पढ़ाई न होकर केवल पीजी (स्नातकोत्तर) के कोर्स ही चलाए जा रहे हैं और वे भी नाम मात्र को। इस कॉलेज का निमार्ण तो बेशक एमबीबीएस के लिये भी हुआ था परन्तु कामचोर अधिकारियों ने इसे चलाने के बजाय ताला मार कर छोड़ दिया।
मोदी का चुनाव क्षेत्र होने के कारण वाराणसी में जो मेडिकल कॉलेज दिया जा रहा है वह बिल्कुल गलत है। वहां केवल डेढ़ लाख बीमाकृत मज़दूर ही रहते हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष 2018 में एक सुपरस्पेशलिटी अस्पताल भी खोला तो गया था परन्तु वह भी मुख्याल की मेहरबानी से बीमार ही रहता है।
जाहिर है जो अस्पताल खूद बीमार हो तो वह मरीज़ों का क्या इलाज करेगा? चलो मान लिया मोदी जी के नाम पर वहां मेडिकल कॉलेज खोलना बहुत ही जरूरी है तो दस की जगह 14 मेडिकल कॉलेज खोल कर, एक गुडग़ाव और एक पुणे महाराष्ट्र एक भुवनेश्वर उड़ीसा एक विजयवाड़ा आंध्रप्रदेश को दिया जाना अति आवश्यक है क्योंकि गुडग़ांव व पूणे में 15-15 लाख बीमाकृत मज़दूर परिवार रहते हैं। भुवनेश्वर में साढे सात लाख व विजयवाड़ा में सात लाख।
मेडिकल कॉलेज तो खोले जाने के फैसले से मज़दूरों में खुशी है, इसके लिए वह श्रममंत्री को धन्यवाद भी दे रहे हैं। लेकिन जैसा कि मज़दूर मोर्चा ने अपने पिछले अंक में इंगित किया था कि मुख्यालय में बैठे जिन नालायक अधिकारियों ने पहले से चल रहे दस मेडिकल कॉलेजों का सत्यानाश किया है यदि उन्हें ही नयों का भी जिम्मा दे दिया गया तो वो इनका भी सत्यानाश ही करेंगे, इसलिए सर्व प्रथम इनसे पिंड छुड़ाना ज़रूरी है।
नए मेडिकल कॉलेजों का सही ढंग से संचालन और प्रबंधन करने के लिए योग्य, कुशल एवं मेडिकल कॉलेज संचालन की बारीकियों को जानने वाले अधिकारियों को तैनात किया जाना बहुत जरूरी है।
मेडिकल कॉलेज खोले जाने के फैसले से मज़दूरों में खुशी है, इसके लिए वह श्रममंत्री को धन्यवाद भी दे रहे हैं। लेकिन जैसा कि मज़दूर मोर्चा ने अपने 6-12 अक्टूबर के अंक में ‘ईएसआईसी 10 मेडिकल कॉलेज खोलने की तैयारी में’ शीर्ष से प्रकाशित खबर में मुख्यालय में बैठे नालायक अधिकारियों के कारण पहले से चल रहे दस मेडिकल कॉलेजों की दुर्दशा का जिक्र किया था। यदि उन्हीं निकम्मे अधिकारियों को ही नयों का भी जिम्मा दे दिया गया तो वो इनका भी सत्यानाश ही करेंगे, इसलिए सर्व प्रथम इनसे पिंड छुड़ाना ज़रूरी है। नए मेडिकल कॉलेजों का सही ढंग से संचालन और प्रबंधन करने के लिए योग्य, कुशल एवं मेडिकल कॉलेज संचालन की बारीकियों को जानने वाले अधिकारियों को तैनात किया जाना बहुत जरूरी है।