नगर निगम में जारी है विज्ञापन से काली कमाई का गोरखधंधा फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) टेंडर की शर्तों को धता बता कर नगर निगम का करीब सवा सात करोड़ रुपये रुपये डकारने वाले जिन ठेका फर्मों को ब्लैकलिस्ट किया जाना चाहिए, निगम के खाऊ अधिकारी दोबारा उन्ही को ठेका दिलाने की तैयारी कर रहे हैं। प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष दिखाने के लिए ऑनलाइन टेंडर निकालने का पांखड तो किया जा रहा है लेकिन ठेका केवल उन्हीं फर्मों को मिलेगा जिन्हें एक्सईएन से लेकर अतिरिक्त निगम आयुक्त चाहेंगे।
सुधी पाठकों को मालूम होगा कि पूर्व निगमायुक्त जीतेंद्र दहिया ने विज्ञापन के नाम पर लूट कमाई की शिकायत किए जाने की पर जुलाई 2023 में निगम सचिव जयदीप को जांच सौंपी थी। अगस्त 2023 में उनके द्वारा दाखिल की गई जांच रिपोर्ट में निगम के अधिकारियों द्वारा ठेकेदार फर्मों को सात करोड़ 22 लाख रुपये का अवैध फायदा पहुंचाना बताया गया था। ठेका कंपनियों को फायदा पहुुंचाने के लिए अधिकारियों ने ठेका जारी करने से लेकर आवंटन, शुल्क लेनदेन आदि सारे काम पारदर्शी रूप से रिकॉर्ड पर नहीं किए। यही नहीं ठेका अनुबंध भी नगर निगम के जिन अधिकारियों के नाम से जारी किया गया। अनुबंध शर्तों में फेरबदल कर और ऑनलाइन रिकॉर्ड की अनिवार्यता को दरकिनार कर एनआईटी और ओल्ड फरीदाबाद ज़ोन के लिए मेसर्स स्क्वायर आउटडोर लिमिटेड एवं मेसर्स श्री श्याम की कंपनी से अनुबंध किया। बल्लबगढ़ जोन में मेसर्स ग्लोबल एडवरटाइजिंग इंडिया नाम की कंपनी को गड़बडिय़ां करने के कारण पहले अयोग्य करार दिया गया बाद में उसे ही ठेका दे दिया गया। इन कंपनियों ने अनुबंध में निर्धारित संख्या से कहीं अधिक गैंट्री और यूनीपोल अपनी मर्जी से लगाकर 16 महीनों तक जमकर अवैध कमाई की, जिससे नगर निगम को करीब सवा सात करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान हुआ था। ज़ाहिर है कि कंपनियों ने इस लूट कमाई की मलाई अधिकारियों को भी बांटी थी। निगम सचिव जयदीप ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने, उच्च स्तरीय जांच कराने और संबंधित विज्ञापन एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट किए जाने की सिफारिश की थी।
दोषियों को बचाने के लिए निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने निगम सचिव की रिपोर्ट की जांच के लिए मुख्य अभियंता बी0के0 कर्दम की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी बना दी जो जांच ना तो आज तक पूरी हुई है और ना आगे पूरी होने की उम्मीद है।ठेकेदार और अधिकारियों ने मिलकर जहाँ मर्जी विज्ञापन कर मोटी कमाई की और अंत में ठेकदार कोर्ट में जाकर स्टे ले आए जिसमे भी भ्रष्ट और निकम्मे अधिकारियों ने अपने आकाओ का पूरा सहयोग कर कोर्ट में सही तथ्य पेश ही नहीं किए और स्टे दिलाने में भरपूर सहयोग किया। फिलाल एन आई टी जोन का कोई टेंडर नहीं है, 10 अक्टूबर 2024 को शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने 58 साइटों पर यूनीपोल और गैंट्री के जरिए विज्ञापन लगाने के टेंडर निकाले। निगम के भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि टेंडर तो निकाल दिए गए हैं लेकिन जो फर्जीवाड़ा पिछली बार हुआ था वही खेल इस बार भी खेला जाएगा। कहने को तो टेंडर ऑनलाइन जारी किया जा रहा है लेकिन पिछली बार की तरह ही विज्ञापनों की माप-जोख, लेखा-जोखा, साइट निर्धारण आदि का रिकॉर्ड रखने वाला सॉफ्टवेयर बनाने का काम ठंडे बस्ते में पड़ा है।
यानी ठेका कंपनी कागजों पर तो 58 जगहों पर विज्ञापन लगा सकेगी लेकिन धरातल पर दोगुने तिगुनी साइट पर विज्ञापन लगा कर मोटी कमाई का इंतजाम है। यह सब निगम अधिकारियों की मिलीभगत से ही हो रहा है। सूत्र तो ये भी बताते हैं कि इस बार भी पिछली बार गड़बड़ करने वाली दागी कंपनियों को ही ठेका दिलाने की कवायद चल रही है, इसके लिए काफी मोटी डील हुई है। यदि यह सच हुआ तो एक बार फिर विज्ञापन के नाम पर निगम के अधिकारी ही निगम को लूटेंगे।
ठाकरान-डागर गुट ने संभाला लूट कमाई का काम पिछले लगभग 1-2 महीनों से सीधे नगर निगम प्रशासन ही पर्ची काट कर विज्ञापन साइटें आवंटित करता रहा। इस दौरान भी निगम के खाऊ अधिकारियों ने जमकर लूट कमाई की। विज्ञापन विभाग के ठेका क्लर्क नेतराम डागर इसके लिए वसूली एजेंट बनाया गया। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार एक्सईएन सुशील ठाकरान ने अनुबंध समाप्त होने के बाद ठेका कंपनियों के समक्ष 15 लाख रुपये का प्रस्ताव रखा कि इतना रुपया दो और जहाँ चाहो विज्ञापन लगाओ। हालांकि इस पर बात नहीं बनी तो नगर निगम में नाम मात्र की फीस जमा कर बाकी मनपसंद जगह पर यूनीपोल, गैंट्री से लेकर बैनर-पोस्टर तक लगाने की छूट दी गई। यही नहीं यूनीपोल गैंट्री में मानक से दोगूने आकार के विज्ञापन लगाकर मोटी कमाई की गई। नियमानुसार अतिरिक्त आकार के विज्ञापन लगाने पर 160 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से जुर्माना लगाने और एक हजार रुपये अतिरिक्त शुल्क वसूलने का प्रावधान है, इसके बावजूद पूरा विज्ञापन फाड़ दिया जाता है। क्योंकि यह अवैध विज्ञापन इन्हीं अधिकारियों की मिलीभगत से लगाए जाते थे तो इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। यदि कोई शिकायत होती तो केवल विज्ञापन फाड़ दिया जाता, जुर्माना आदि नहीं लगाया जाता। ठेकेदार दोबारा विज्ञापन लगा देता।
ज़ाहिर है कि यह सारा खेल निगम के अधिकारियों की मिलीभगत के बगैर नहीं हो सकता है। सूत्रों के अनुसार इसके लिए सुशील ठाकरान से लेकर एसीएमसी स्वप्निल आर पाटिल तक मोटी मलाई पहुंचाई जाती रही। पाटिल का एक और चेला प्रेम कुमार शर्मा व दलाली करने में माहिर नेतराम डागर कई बार पाटिल को ग्रेटर फरीदाबाद में लगे अवैध विज्ञापनों का निरीक्षण करने ले जाते देखे जाते है निरीक्षण कर पाटिल साहब ही अपने दलालों को आदेश देते है की किस अवैध विज्ञापन से कितनी मलाई खानी है। नेतराम डगर को पाटिल से मिलवाना प्रेम कुमार की मजबूरी है या कोई निजीस्वार्थ ये तो प्रेम ही जाने, क्योकि बेचारा बिना टेस्ट दिए ही क्लर्क व क्लर्क से निरीक्षक बना जो बैठा है तो इतनी जी हुजूरी तो करनी ही पड़ेगी।
नोटिस जारी करने का भी हुआ खेल इस दौरान अवैध विज्ञापन के लिए नोटिस जारी कर मोटी कमाई का खेल जमकर खेला गया। सूत्रों के अनुसार नेतराम सरकारी बुलेरो में सर्वे कर अवैध विज्ञापनों की खोज करता और अपनी सेटिंग बिठाता है सेटिंग ना होने पर 160 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से जुर्माना तय कर संबंधित व्यक्ति या कंपनी को भेज दिया जाता है, नोटिस देने के बाद भी सामने वाली पार्टी से कोई मोल भाव तय हो जाए तो जुर्माने की चालीस से पचास प्रतिशत धन लेकर मामला रफा दफा कर दिया जाता और नोटिस फाड़ कर फेक दिया जाता। डायरी में रिकॉर्ड मेनटेन करने के लिए उसी संख्या का नया नोटिस किसी दूसरे के नाम चढ़ा दिया जाता, यह खेल कई सालों से चलता आ रहा है इसकी जांच हुई तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा