मंत्री विपुल गोयल की डिफेंडर के हो रहे चर्चे

मंत्री विपुल गोयल की डिफेंडर के हो रहे चर्चे
June 23 08:23 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पांच साल तक लूट कमाई से वंचित रहे कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल अब पूरे करने में लगे हैं। चर्चा है कि पलवल की रोहित कंस्ट्रक्शन कुमारजी लाल जीतेंद्र कुमारजी नामक दागी कंपनी के मालिकान ने 25 करोड़ का रैनीवेल ठेका लेने के लिए मंत्री गौरव गौतम के जरिए मंत्री विपुल गोयल को लैंड रोवर डिफेंडर कार गिफ्ट करने का ऑफर दिया जिसे मंत्री जी ने कुबूल भी कर लिया, लेकिन बात खुलने पर बदनामी के डर से डिफेंडर कैंसिल कर दी गई और सत्तर लाख रुपये नकद पर ठेका दिलाने का सौदा फाइनल हो गया।

निगम में मंत्री विपुल गोयल और गौरव गौतम द्वारा कंपनी के साथ की गई डील के साथ ही भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए अधिकारियों की लालफीताशाह, हरामखोर और निकम्मी कार्यशैली की भी चर्चाएं गर्म हैं। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार पलवल की रोहित कंस्ट्रक्शन, कुमारजी लालजी जीतेंद्र कुमारजी नामक कंपनी के खिलाफ किसी रामकटोरी नामक महिला ने 10 फरवरी 2025 को निदेशक शहरी स्थानीय निकाय और विजिलेंस डिपार्टमेंट के सेक्रेटरी से लिखित शिकायत की थी। आरोप था कि कंपनी ने ठेके पाने के लिए दक्षता का फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाया था। इसकी जांच शहरी स्थानीय निकाय के चीफ विजिलेंस अफसर ने की और आरोप सही पाए।

दोषी पाए जाने पर निदेशक शहरी स्थानीय निकाय ने 25 मार्च 2025 को फरीदाबाद निगमायुक्त को पत्र जारी किया। पत्र में रोहित कंस्ट्रक्शन, कुमारजी लाल, जीतेंद्र कुमारजी के खिलाफ फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी का केस दर्ज कराने के साथ ही विधिक सलाह लेकर कंपनी को ब्लैकलिस्ट किए जाने का आदेश जारी किया गया था। निदेशक के आदेश का पालन करने की जिम्मेेदारी मैडम मोना ए श्रीनिवास ने अपने उसी चहेते एक्सईएन नितिन कादियान के जिम्मे लगाई जो उनके लिए पांच लाख का लहंगा, सोने के बिस्कुट की व्यवस्था करता रहा था। खुद को ईमानदारी की मूर्ति बताने वाले ‘होनहार’ नितिन कादियान तीन महीने बाद भी कंपनी पर न तो एफआईआर दर्ज करवा सका और न ही ब्लैकलिस्ट करने की कानूनी प्रक्रिया ही पूरी कर सका है। समझा जा सकता है कि ‘ईमानदारÓ कादियान ने कंपनी पर यह अहसान मुफ़्त में तो नहीं ही किया होगा और कंपनी पर उसकी यह अनुकंपा आगे भी जारी रहेगी।

इधर कंपनी पर एफआईआर और ब्लैकलिस्ट किए जाने की प्रक्रिया लंबित थी उधर शहर की जलापूर्ति सुधारने के लिए मार्च में एफएमडीए ने 12 अतिरिक्त रैनीवेल लगाने की घोषणा कर दी। निगम में चर्चा है कि करीब पच्चीस करोड़ कीमत वाली रैनीवेल परियोजना का यह ठेका हासिल करने के लिए रोहित कंस्ट्रक्शन कंपनी के मालिकान ने सरकार में जुगाड़ लगाना शुरू किया और मंत्री गौरव गौतम से मिलकर ठेका दिलवाने की गुहार लगाई। गौरव गौतम ने मोटी कमाई देखी तो अप्रैल के पहले महीने में मंत्री विपुल गोयल के साथ चंडीगढ़ के एक आलीशान होटल में कंपनी मालिकान की मीटिंग फिक्स कराई। बताया जा रहा है कि पच्चीस करोड़ का ठेका दिलाने के एवज में मंत्री विपुल गोयल ने लैंड रोवर डिफेंडर कार की मांग रखी, मालिकान ने तुरंत ही हामी भर का सौदा पक्का कर दिया।
जिस होटल में यह डील हुई थी वहां भाजपा के कई अन्य नेता भी आसपास मौजूद थे और डिफेंडर वाली बात लीक हो गई। बताया जा रहा है कि इसकी जानकारी केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर और हरामखोरी में माहिर बडख़ल विधायक धनेश अदलखा तक पहुंच गई, ये दोनों ही विपुल गोयल के विरोधी खेमे से हैं। बताया जा रहा है कि विपुल को जैसे ही इस बात का अहसास हुआ कि विरोधी डिफेंडर की चर्चा कर रहे हैं उन्होंने मंत्री गौरव गौतम को बुलाकर सौदा कैश में तब्दील करने को कहा। माना जा रहा है कि गौतम को उन्होंने समझाया होगा कि डिफेंडर की बात लीक हो चुकी है ऐसे में जैसे ही उन्हें गाड़ी मिलेगी विरोधी इसे ले उड़ेंगे और उनका कॅरियर तबाह कर देंगे।

बताया जा रहा है कि इस पर गौरव गौतम ने कंपनी मालिकान से सत्तर लाख की कैश डील करने को कहा, सौदा तय हो गया। कुर्सी पर आंच आने के डर और बदनामी से बचने के लिए फूक फूक कर कदम रख रहे मंत्री विपुल गोयल ने वसूली का जिम्मा गौरव गौतम पर ही छोड़ दिया। जिस समय भारत-पाकिस्तान के बीच ऑपरेशन सिंदूर चल रहा था, उसी दौरान मंत्री गौरव गौतम हवाई सफर कर लौट रहे थे।

बताया जा रहा है कि हवाई अड्डे पर गौरव गौतम और कंपनी मालिकान एक ही कार में बैठे और पलवल लौटते समय कार में ही सत्तर लाख रुपये का लेन देन हो गया। कैश मिलने के बाद गौरव गौतम ने कंपनी मालिकान को मंत्री विपुल गोयल का मैसेज दिया कि रोहित कंस्ट्रक्शन दागी कंपनी है, इसलिए किसी नए नाम से कंपनी बनाओ, ठेका उसे ही दिलाया जाएगा। यह बात स्पष्ट नहीं हो पाई कि गौतम गौरव को कमीशन इसी सत्तर लाख में से मिला या कंपनी ने उसे अलग से दिया, क्योंकि यह तो संभव नहीं है कि गौरव मुफ़्त में इतनी बड़ी जनसेवा का काम करे। चर्चा है कि जल्द ही पच्चीस करोड़ का रैनीवेल का टेंडर जारी होने वाला है और मंत्री ही की मर्जी के अनुरूप कुमारजी लाल, जीतेंद्र कुमारजी द्वारा छद्मनाम से बनाई गई फर्म को ठेका अलॉट किया जाएगा। समझने वाली बात यह है कि कंपनी ने पहले भी फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाया था अब नई फर्म कौन सा अनुभव प्रमाण पत्र लगाएगी या फिर अनुभव की शर्त ही खत्म कर दी जाएगी यह देखना होगा।

नगर निगम में जोर शोर से हो रही इन चर्चाओं की मज़दूर मोर्चा न तो पुष्टि करता है और न ही खंडन, लेकिन चर्चाएं बेवजह नहीं हुआ करतीं। दागी कंपनी पर तीन महीने बीतने के बावजूद निगम अधिकारियों द्वारा कोई कार्रवाई नहीं किया जाना अपने आप में ही भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है। रही बात भाजपा की डबल-ट्रिपल इंजन सरकारों की तो बीते 11 साल में नगर निगम, हूडा, एफएमडीए, शिक्षा विभाग, शायद ही कोई विभाग हो जिसमें बड़े बड़े घोटाले न हुए हों। क्योंकि सारे घोटाले सत्तापक्ष के नेताओं की सहमति एवं हिस्सापत्ती पर ही हुए इसलिए जांच की संभावनाएं नगण्य हैं, यदि किसी में जांच कराई भी गई तो नगर निगम के दो सौ करोड़ के घोटाले की तरह कभी पूरी नहीं होने वाली।

यह ठेका तो हांडी के एक चावल के समान है, वास्तव में सरकार का हर ठेका, हर काम इसी तरह से होता है। जनता को बताया जाता है कि यह पच्चीस करोड़ का काम करा दिया, यह पचास करोड़ का काम करा दिया, यह सौ करोड़ का काम करा दिया, लेकिन वास्तव में यह सब घोषणाएं थोथी और फरेबी होती हैं क्योंकि हकीकत में कार्यस्थल पर घोषित रकम का आधा भी नहीं पहुंच पाता और कई बार तो कुछ भी नहीं पहुंचता, केवल कागजों में ही काम हो जाता है, ऐसे भी अनेक उदाहरण हैं।

जनता की खून पसीने की गाढ़ी कमाई को लूटने का यही तो एक ज़रिया है, जब तक ये खर्चे दिखाए नहीं जाएंगे तो लूट कमाई कहां से होगी। यदि वास्तव में ही घोषित की गई रकमें काम पर लगाई जाएं तो आज इन सड़कों, गलियों की, पेयजल व्यवस्था की, सीवर की, स्कूलों की, अस्पतालों की यह जर्जर हालत न होती। जनता को समझ आ जाना चाहिए कि जो नेता विधायक बनने के लिए वोट के बदले नोट और बोतल देता है, उसकी वसूली भी वह जनता का खून निचोड़ कर ही करेगा न।

 

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Mazdoor Morcha
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