फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) नगर निगम की मुखिया होने के नाते निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने पांच कर्मचारियों को 12 अगस्त को इधर-उधर करने का फरमान जारी कर दिया। चंद घंटे ही बीते थे कि उन्हें मंत्री मूलचंद शर्मा के खास जेई अजीत सिंह को बहाल कर अपने द्वारा जारी किए गए ट्रांसफर ऑर्डर को थूक कर चाटना पड़ा। खास बात ये कि अन्य तीन कर्मचारियों ने तुरंत ही नई जगह कार्यभार संभाल लिया लेकिन अजीत सिंह ने न तो चार्ज छोड़ा और न ही नया प्रभार संभाला, बल्कि चर्चा है कि मंत्री मूलचंद से निगमायुक्त की शिकायत कर दी। फिर क्या था, अपने चेले को हटाने के लिए मंत्री ने तुरंत ही निगमायुक्त को फोन लगाकर जमकर हड़काया और ट्रांसफर ऑर्डर वापस लेने का हुक्म सुना दिया। 2004 बैच में संघ लोक सेवा आयोग की प्रतियोगिता टॉप करने वाली आईएएस अधिकारी मोना ए श्रीनिवास ने हुक्मबरदार कार्यकर्ता की तरह मूलचंद शर्मा का आदेश लागू कर दिया। आईएएस अधिकारी होकर भी वह चंद दिनों के मेहमान मंत्री मूलचंद की इस हद तक ताबेदारी करना मोना की साख पर धब्बा साबित हो रहा है।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार जेई अजीत सिंह अपनी तैनाती के बाद से आज तक बल्लभगढ़ का वार्ड नंबर दो ही संभाल रहा है। यह वार्ड इंडस्ट्रियल एरिया होने के कारण अजीत सिंह की मोटी कमाई का साधन है। उद्योगों को अवैध रूप से सीवर-पानी कनेक्शन देकर मोटी कमाई तो करता ही है, निगम की मशीनों और संसाधनों का दुरुपयोग कर उद्योगों के सीवर साफ करवाता है। सीवर सफाई के लिए वह उद्योगों से पांच हज़ार से पंद्रह हज़ार रुपये तक वसूलता है। इसी वार्ड में आने वाले मुजेसर में प्रत्येक रविवार सड़क पटरी पर साप्ताहिक बाजार लगती है, इस बाजार से वह प्रति सप्ताह पंद्रह हज़ार रुपये वसूलता है। यही नहीं वह मुजेसर के दोनो सामुदायिक भवनों को अवैध रूप से किराए पर उठा कर मोटी कमाई कर रहा है। एक सामुदायिक भवन में पशु बांधे जाते हैं तो दूसरे में वाहन और रेहडिय़ों की पार्किंग से मोटी कमाई की जा रही है।
मोटी कमाई वाला वार्ड होने के कारण अजीत मंत्री मूलचंद शर्मा को खुश रख कर आज तक यहीं पर डटा हुआ है। वार्ड नंबर दो की निवर्तमान पार्षद प्रियंका चौधरी और मंत्री मूलचंद के संंबंध अच्छे नहीं हैं इसी कारण अजीत सिंह भी उन्हें भाव नहीं देता है। प्रियंका के ससुर भाजपा के छुटभैया नेता पार्षद जगत सिंह बूरा के केंद्रीय मंत्री कृृष्णपाल गूजर से अच्छे संबंध हैं। उसने केंद्रीय मंत्री से अजीत सिंह को वार्ड दो से हटवाने की सिफारिश की थी। मंत्री ने अजीत सिंह को हटाने के साथ ही अपने अन्य चेलों को भी लूट कमाई की जगहों पर लगाने का आदेश निगमायुक्त को सुना दिया।
उनके आदेश पर निगमायुक्त ने अजीत सिंह को वार्ड दो से हटा कर वार्ड एक और वाहन शाखा का प्रभार दे दिया। उसकी जगह जेई आशीष शर्मा को लगा दिया। बहुत दिनों से वार्ड 19-20 में लगे गूजर के खास जेई प्रवीण बैंसला को लूट कमाई के लिए तिगांव विधानसभा में तोडफ़ोड़ की जिम्मेदारी भी सौंप दी। जेई संदीप राणा से बडख़ल विधानसभा में तोडफ़ोड़ का चार्ज लेकर केंद्रीय मंत्री के खास हर्ष वर्धन चपराना को दे दिया और उनसे स्वच्छ भारत मिशन का प्रभार लेकर संदीप राणा को थमा दिया। लूट कमाई का वार्ड छिनते ही अजीत सिंह तुरंत ही मंत्री मूलचंद शर्मा की शरण में गया और रोया-गाया। निगम के भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार मूचचंद शर्मा ने निगमायुक्त को फोन कर झाड़ लगाते हुए कहा कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मेरी विधानसभा क्षेत्र और मेरे वार्ड में हस्तक्षेप करने की, अजीत सिंह को तुरंत बहाल करो, वरना मुझसे बुरा कोईँ न होगा। मंत्री की डांट सुनते ही आईएएस मोना ने स्थापना अधिकारी ईओ को तुरंत फोन लगाया और पूछा कि यह अजीत सिंह कौन है? ईओ ने बताया कि एचकेआरएन का जेई है। पूछा कि क्या मैने इसके तबादले के आदेश पर हस्ताक्षर किए थे, ईओ ने बताया कि जी हां, बोलीं कि उसमें के अजीत सिंह का तबादला रद्द कर बहाली का नया आदेश तुरंत जारी कर मुझसे हस्ताक्षर करवाओ। शाम हो जाने के कारण आदेश 13 अगस्त को बनाया जा सका। नगर निगम में चर्चा है कि आईएएस अफसर होने के बावजूद निगमायुक्त को ठेके के जेई अजीत सिंह से मुंह की खानी पड़ी। लगता है कि निगमायुक्त पर भी निगम के भ्रष्टाचार और लूट कमाई का रंग चढ़ चुका है, वरना एक ठेके के कच्चे जेई की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वह अपना तबादला रुकवा लेता। अगर वो मंत्रियों की जी हुजूरी करने के बजाय निगम का प्रशासन ठीक से संभालतीं तो न तो शहर की यह दुर्दशा होती और न ही मातहतों का मन बढ़ता। अगर वो आईएएस अधिकारी की तरह निगम संभालती तो मंत्री भी उन्हें आदेश देने से पहले कई बार सोचते। बात नहीं मानने पर मंत्री ज्यादा से ज्यादा उनका तबादला करवा देता लेकिन उनकी जगह आता तो कोई आईएएस अफसर ही, लेकिन अगर वो खुद भी रिश्वतखोरी और हरामखोरी न करतीं तो तबादले से क्यों डरतीं।