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फरीदाबाद

मेवला महाराजपुर अर्बन हेल्थ सेंटर में चिकित्सा सेवाओं के बजाय प्रोपेगेंडा परोस रही सरकार

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) धरातल पर कोई काम करने की बजाय सरकार मीडिया में बयानबाजी करके अपना कर्तव्य पूरा कर लेना चाहती है। नौ जनवरी के अखबारों में सरकार ने प्रकाशित

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ज्वैलर्स की दुकान पर करोड़ों की लूट

करनाल। करनाल के सेक्टर-16 में तीन जनवरी को एक ज्वेलर से हुई करोड़ों रुपए के सोने और नगदी की लूट का पर्दाफाश करते हुए पुलिस ने 4 लोगों को गिरफ्तार

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सोमनाथ मंदिर: इतिहास फिर बना सियासी औज़ार

राम पुनियानी राममंदिर आन्दोलन या दूसरे शब्दों में बाबरी मस्जिद के ढहाए जाने से भाजपा और उसकी पितृ संस्था आरएसएस को चुनावों में जबरदस्त फायदा हुआ. अब काशी और मथुरा

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रहबर-ए-आज़म, दीनबंधु सर छोटू राम – उनके जीवन और विचारों पर प्रभाव: एक समीक्षा

डॉ. रामजीलाल सर छोटू राम (जन्म- रिछपाल, गढ़ी सांपला-रोहतक – रिछपाल, 24 नवंबर, 1881 – 9 जनवरी, 1945) 20वीं सदी के पहले भाग में भारतीय उपमहाद्वीप की राजनीति में एक

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काशी में मूर्तियों की तोडफ़ोड़

कनुप्रिया काशी में जो तोडफ़ोड़ हो रही है उसके बारे में किसी का कहना है कि भगवान मूर्तियों में नहीं, कण कण में हैं. किसी का कहना है वहाँ पहले

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पत्रकारिता का अंधा युग-8

आनन्द स्वरूप वर्मा कांग्रेस के पी.वी. नरसिंह राव ने 1991 से जिस नवउदारवादी आर्थिक नीति की शुरुआत की वह प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह से होती हुई नरेंद्र

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पहले वे राम को मंदिर ले जाते दिखे, लोगों ने विरोध नही किया

कनुप्रिया फिर काशी कॉरिडोर के लिये ऐतिहासिक मंदिर और मूर्तियाँ तोड़ी गईं जो हमारी सांस्कृतिक धरोहर थीं. जनता चुप रही. तिरूपति मंदिर में विष्णु की मूर्ति के आगे कुछ इस

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मिथक कथाओं के अनुसार शिव का त्रिशूल दो ही लोग अपने हाथों में संभाल सकते हैं, स्वयं शिव और दूसरी उनकी अर्धांगिनी शक्ति (पार्वती)

राकेश कायस्थ दरअसल जो शव हो गया वही शिव है. मेरे पिता शिव के परम भक्त थे अपनी युवा वस्था में मै भी धार्मिक हुआ करता था परंतु कट्टरपंथी कभी

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पढ़ कर दिन प्रतिदिन समाचार…

डॉ. रामवीर  पढ़ कर दिन प्रतिदिन समाचार बहुधा मन में उठता विचार क्या कारण है क्यों भारत में है व्याप्त चतुर्दिक् भ्रष्टाचार। यूं तो कारण होंगे अनेक सर्वप्रमुख है उनमें

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1500 ईसा पूर्व से पहले भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे…

देवदत्त पटनायक 100 ईसा पूर्व से पहले दक्षिण भारत में कोई ब्राह्मण नहीं थे। हड़प्पा शहरों में कोई ब्राह्मण नहीं थे। भीमबेटका गुफाओं में कोई ब्राह्मण नहीं थे। कीलाडी शहरों

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