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विश्लेषण

गऊ पालकों के लिए मुसीबत बना गो-रक्षा कानून

इशाद्रिता लाहिरी भारत की डेयरी इंडस्ट्री आठ करोड़ लोगों को रोजगार देती है और इसका बाजार 115 अरब डॉलर का है। इस इंडस्ट्री की 50 प्रतिशत निर्भरता गायों पर है

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नेपाल के साथ भारत की ‘सब कुछ या कुछ नहीं की नीति काम नहीं करेगी, सैन्य संबंध को मजबूत बनाना होगा

मनोज नरवणे तीन दिशाओं से भारत और चौथी दिशा से चीन से घिरा नेपाल भारत की ‘पड़ोसी पहले वाली नीति का प्रमुख हिस्सा है। 1950 के दशक में तिब्बत पर

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धार्मिक अल्पसंख्यकों की माली हालत में सुधार कैसे हो, आरक्षण या सकारात्मक कार्यवाही

राम पुनियानी जो लोग न्याय और बराबरी के आदर्शों में यकीन रखते हैं उनके लिए अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों, की माली हालत गंभीर चिंता का विषय है. भारत में इस्लाम सातवीं

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स्वामी विवेकानंद, मांसाहार और धर्म का मर्म!

पंकज श्रीवास्तव आहत भावनाओं का अखाड़ा बन चुके भारत में किसी भगवाधारी संत को मांसाहारी बताना किसी को भी परेशानी में डाल सकता है। सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग से लेकर

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ट्रंप की जीत : विश्वभर के उग्र दक्षिणपंथी नेताओं और फासीवादियों में गजब का उत्साह

शैलेंद्र चौहान नेतन्याहू से ओर्बन तक, वैश्विक दक्षिणपंथी नेताओं ने ट्रम्प की जीत का जश्न मनाया। फासीवादी चेहरे वाले ये नेता उस व्यक्ति को बधाई देने के लिए कतार में

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बहराइच हिंसा : किसी के घर पर भारी भीड़ के साथ जबरन चढ़कर नारेबाजी, तोडफ़ोड़ क्या अपराध नहीं?

जनचौक ब्यूरो बहराइच में पुलिस ने एनकाउंटर के नाम पर दो युवाओं को गोली मारकर घायल कर दिया। पुलिस का कहना है कि दोनों युवक बहराइच में हुई हिंसा के

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ग्रेगोरियन कैलेंडर

मनीष कुमार सोलंकी पहले दस महीने होते थे… साल मार्च से शुरू होता था और दिसम्बर पर खत्म होता था, ज़्यादातर महीनों के नाम रोमन देवी देवताओं और राजाओं के

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धर्मनिरपेक्षता : पश्चिमी या आधुनिक?

राम पुनियानी भारत का स्वाधीनता संग्राम बहुवादी था और उसका लक्ष्य था धर्मनिरपेक्ष एवं प्रजातान्त्रिक मूल्यों की स्थापना. यह हमारे संविधान की उद्देशिका से भी जाहिर है, जिसमें स्वतंत्रता, समानता

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हरियाणा विधानसभा चुनाव -2024 में बीजेपी क्यों जीती और कांग्रेस क्यों हारी?

पीपी कपूर जनता के बुनियादी सवालों और मुद्दों का कोई हल इन सामंती पूंजीवादी राजनैतिक दलों, नेताओं के पास नहीं है, जहां टिकटों के वितरण व जीत हार का प्रमुख

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क्या भारत, अमेरिका के इशारे पर चलता है?

गतांक से आगे क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा मार्च 2000 में, सम्बन्ध सामान्य करने, क्लिंटन को ही इंडिया आना पड़ा. 1989 में सोवियत संघ औपचारिक रूप से टूट कर बिखर गया और

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