इशाद्रिता लाहिरी भारत की डेयरी इंडस्ट्री आठ करोड़ लोगों को रोजगार देती है और इसका बाजार 115 अरब डॉलर का है। इस इंडस्ट्री की 50 प्रतिशत निर्भरता गायों पर है और बाकी भैंसों पर। हमारे सफर का पहला पड़ाव हरियाणा और पंजाब हैं। इन दोनों राज्यों में देश की सबसे दुधारू गायें पाई जाती हैं। यहीं से सारे देश की डेयरियों में इन गायों को लाया जाता है। करनाल शहर में हमारी मुलाकात रवि नरवाल से हुई जो गोपालक हैं और डेयरी किसान हैं। वो अपना फार्म दिखाते हुए कहते हैं कि ये अपना फार्म है यहां हम ब्रीडिंग का और सेल परचेज दोनों काम करते हैं। आमतौर पर फस्र्ट टाइमर बछिया के दाम डेढ़ से दो लाख रुपये होती है लेकिन गाय के इतने ज्यादा दाम के कारण करोबार में कोई फायदा नहीं हुआ है।
भारत में हिंदू समुदाय गायों को पूजता है। भारत के 28 में से 20 राज्यों में ऐसे कानून हैं जो गायों की हत्या पर रोक लगाते हैं। लेकिन साल 2014 में केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के आने के बाद से ये और सख्त हो गए हैं। इस संबंध में वकील पायोसी रॉय से बात हुई। उन्होंने बताया कि सबसे पहले तो ऐसे अपराधों पर केस चलाने से लेकर बड़े कदम उठाए गए हैं। हाल ही में वो (सरकार) एक ऐसा अध्यादेश लेकर आए थे जिसमें कैद की अवधि दस साल तक और पांच लाख रुपये तक जुर्माना लगाने की बात थी। आपने गौरक्षकों के बारे में भी कई बार सुना होगा जो सड़कों पर निकलते हैं हमले करते हैं। कई बार उनकी जान भी ले लेते हैं जो गायों को एक जगह से दूसरी जगह लेकर जा रहे होते हैं। लेकिन हमें कुछ और भी पता चला, एक समस्या पुलिस को लेकर भी है वो ये कि पुलिस भी ऐसे लोगों को परेशान करती है जो गायों को डेयरी (पालन) के लिए एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाते है। हमने करनाल में डेयरी कारोबार करने वाले अन्य लोगों से भी बात की। इनमें से एक हैं गजेंद्र कुंडू, वो दूसरे राज्यों में चल रहे डेयरी फार्मों में गायों को भेजते हैं। कुंंडू गायों के ट्रांसपोर्टेशन में आने वाली समस्याओं के बारे में बताते हैं कि गाड़ी में जैसे गायें हैं तो (गोरक्षक उसे रुकवा कर) पेपर देख लेते हैं, वो पुलिस पर प्रेशर बनाते हैं कि गाड़ी को बंद करो। अब गाड़ी छुड़ाना हो तो उसके लिए वकील करना पड़ेगा। वकील गाड़ी के दस्तावेज लेगा, पशुओं के कागज लेगा, उस पार्टी को बुलाएगा जिसने लिया है, जिसने (गायों को वाहन में) लोड किया है, गाड़ी भी जाएगी थाने में, ये मान लो (कि इस सब में) दो-से तीन लाख रुपये लगेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में वक्त लगता है, लेकिन इस दौरान गायों के साथ क्या होता है? इस बारे में मवेशी कारोबारी रमन आर्य कहते हैं कि गायों को समय पर चारा और दवाएं नहीं मिलेंगी तो फिर गायें खराब हो जाएंगी, क्योंकि मुख्य वजह क्या होती है कि जानवर तनाव में मरता है। अगर एक किसान की दो से तीन गायें मर गईं तो उसका बहुत बड़ा नुकसान हो जाता है, क्योंकि रास्ते में हमारी गायें खराब हो (मर) गईं तो हमारी मेहनत भी खत्म है।
पंजाब के लुधियाना जिले में रहने वाले अशोक झांझी एक यू ट्यूब चैनल चलाते हैं जिसके पांच लाख से ज्यादा सबस्क्राइबर हैं। उन्होंने हमें बताया कि उन्हें अक्सर कैसी समस्याओं के बारे में सुनना पड़ता है। वह बताते हैं कि जब गायें यहां से (दूसरी जगह ले जाने के लिए) लोड होती हैं तो उनके मेडिकल सर्टिफिकेट वगैरह बनते हैं जैसे कि ये दूध देने वाली हैं या गर्भिणी हैं लेकिन आगे जाकर के पुलिस वाले तंग करते हैं। वो कोई न कोई बहाना खोजते हैँ, (यानी) वही रिश्वतखोरी हर जगह, यूपी में सबसे ज्यादा है। उत्तर प्रदेश जो अब बीजेपी का गढ़ है यहां गोरक्षा को लेकर कई सख्त नियम हैं। यहां हम कुशीनगर जिले में गए जो इस राज्य की पूर्वी सीमा पर स्थित है। पंजाब और हरियाणा में रिपोर्टिंग के दौरान काफी बार सुनने को मिला था कि यहां पर कई ऐसे ट्रकों को पकड़ा जाता है जो गायों को एक से दूसरी जगह लेकर जाते हैं। इन ड्राइवरों पर ये आरोप लगते हैं कि ये इन गायों को कसाईखाना लेकर जाते हैं। ज्यादा जानकारी के लिए हम एक स्थानीय पत्रकार धीरेंद्र गोपाल से मिले जो पिछले 15 सालों से कुशीनगर में काम कर रहे हैं और ऐसे मामलों की लगातार छानबीन करते रहे हैं। धीरेंद्र बताते हैं कि केवल एक दो फीसदी केस ही ऐसे हैं जिनमें तस्कर पकड़े जाते हैं। पकड़ा कौन जाता है? ड्राइवर, मज़दूर, क्लीनर, या किसान या गोपालक होते हैँ जो एक-दो गायें खरीद कर इस गांव से उस गांव ले जा रहा होता है। आपने किसी को पकड़ा, गोतस्कर बनाया, चालान किया आपकी गुड बुक में वो दर्ज हो गया। आज अगर हम अखबारों में छापते हैं कि इतने गोतस्कर पकड़े गए तो वो बड़ा छपेगा, (यानी) सबने जान लिया। इसके बाद वो बरी हो गया, वो तस्कर नहीं है, वो खबर छपेगी चार लाइन की, और तस्करी करते पकड़ा गया तो वो बड़ा छपेगा।
ड्राइवर पिंटू यादव का कहना है कि वो गायों को लेकर एक कारोबारी के पास जा रहे थे, (उनका) जो ट्रक था वो बैंक लोन पर लिया हुआ था, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोका और गोहत्या से जुड़े कानूनों के तहत मुकदमे लगा दिए। पिंटू यादव बताते हैं कि गाय लेकर आ रहे थे लेकिन उससे पहले उन्हें यह नहीं मालूम था कि गाय खरीदने और लाने ले जाने में इतना रिस्क है, (अगर पता होता) तो हम गाय खरीदने ही नहीं गए होते। तीन हफ़्ते जेल में रहने के बाद वो ज़मानत पर बाहर हैं और अपने ट्रायल का इंतजार कर रहे हैं। दोषी हों या बेकुसूर पिंटू का कारोबार अब खतरे में है। पिंटू कहते हैं कि हम दिन रात कोर्ट का चक्कर काटते हैं, कभी इधर तो कभी उधर। इस केस के लगने के बाद से अब हमें कोई भाड़ा नहीं देता है, लोग कर्ज देने से भी मना कर देते हैं कि ये कहां अदा कर पाएगा।
वकील पायोसी कहती हैं कि गो सुरक्षा को लेकर बनाए गए कानूनों को लेकर असल में क्या हो रहा है वो देखने की जरूरत है। जिला प्रशासन के पास यह अधिकार है कि वो उस गाड़ी को जब्त कर सकता है जिसमें गायों को लेकर जाया जा रहा हो और इस केस के सेक्शन 5 और 8 के तहत केस भी हो सकता है। ज्यादातर मामलों में, ज्यादातर मज़दूरों के लिए ये गाडिय़ां जीविका का बड़ा स्रोत होती हैं। उनकी सारी कमाई इन ट्रांसपोर्ट वाली गाडिय़ों पर (निर्भर) होती है।
कुशीनगर में हमने ये देखा कि इस जिले में इस कानून के तहत बहुत से लोगों पर मुकदमे चल रहे हैं जो (कैब) ड्राइवर खुद हमें शहर में घुमा रहा था उस पर भी ऐसा ही मामला है, उसके खिलाफ पांच साल पहले गोहत्या से जुड़े कानून के मामले में केस लगा था, जो आज तक चल रहा है। ड्राइवर ने बताया कि (तब) पुलिस की गाड़ी आई और मुझे थाने ले गई, हमसे रिश्वत मांगी गई, वो एक लाख 70 हजार रुपये मांग रहे थे, जब हम नहीं दे सके तो हमें जेल भेज दिया गया। मेरे गांव में ही इस तरह के 70 मामले हैं लेकिन वो लोग (आरोपी) ऐसा काम नहीं करते हैं।
हमने उत्तर प्रदेश के डायरेक्टर जनरल को इन सभी मुद्दों से जुड़े सवालों की एक फेहरिस्त भेजी। हमने उनके जवाबों का तीन हफ़्तों तक इंतजार किया लेकिन ये रिपोर्ट छापने के वक्त तक कोई जवाब नहीं मिला। कुशीनगर में हमने जिस पुलिस अधिकारी से बात की उन्होंने घूस लेने और धमकाने के आरोपों को खारिज किया और इन मामलों को ऐसा बताया कि ये कहीं एक आध ही हुए हैं। उन्होंने भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दावा किया। साल 2020 में एक मामले की सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि यूपी पुलिस गोरक्षा कानूनों का मासूमों के खिलाफ गलत इस्तेमाल कर रही है। साल 2023 में इसी अदालत ने कहा था कि उत्तर प्रदेश के अंदर गायों को एक जगह से दूसरी जगह ले जाना अपराध नहीं है।
कुशीनगर से हम बिहार में गए जो भारत के सबसे गरीब राज्यों में से एक है और यहां की सरकार में बीजेपी भी सहयोगी है। नालंदा में हमारी मुलाकात 19 वर्षीय डेयरी किसान हर्षवर्धन राज से हुई जो गायों की अच्छी नस्ल खरीदना चाहते हैं। हर्षवर्धन राज ने बताया कि उनके पास बिहार की नस्लें थीं जो 15 से 20 लीटर दूध देती थीं लेकिन मुनाफा नहीं हो रहा था, मतलब फार्म नुकसान में जा रहा था, क्योंकि उत्पादन कम था और गायों की संख्या ज्यादा थी।
हर्षवर्धन कहते हैं कि ब्रीडिंग करना बहुत जरूरी है जब तक फार्म में तीस लीटर से ज्यादा दूध देने वाली गायें नहीं होंगी तब तक धंधा मुनाफे वाला नहीं होगा। इसी कारण उन्होंनें पंजाब या हरियाणा जाकर गायें खरीदकर लाने की योजना बनाई। कुछ महीने पहले हर्षवर्धन को पंजाब से आठ ऐसी गर्भिणी गायें मिल रही थीं जो बहुत दुधारू थीं, उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश में पांच जगहों पर उन्हें रोका गया और उनसे रिश्वत मांगी गई। उन्होंने बताया कि उन्होंने पैसे तो दिए लेकिन सिर्फ वही एक नुकसान नहीं था। एक गाय का बछड़ा मर गया क्योंकि यूपी में पुलिस ने बहुत तंग किया, हरियाणा, पंजाब तो एक दिन में पार कर गए थे लेकिन यूपी में तीन दिन तक गायों को रोके रखा गया। साधारणतया यूपी पार करने में अधिकतम डेढ़ दिन लगता है। हर्षवर्धन के आसपास के डेयरी किसान भी उनके इस नुकसान से प्रभावित हुए हैं।
यहीं के डेयरी किसान धीरेंद्र कहते हैं (गायें) हरियाणा-पंजाब से लाने की सोचते हैं लेकिन बहुत परेशानियों के कारण हिम्मत नहीं पड़ती। सब लोग कहते हैं कि खर्चा लगता है, अन्य दिक्कतें हैं, पुलिस तंग करती है इस सबको देख कर हिम्मत नहीं हो रही। (गायें खरीदने में) दस लाख रुपये लगेंगे लेकिन परेशानी हुई तो (परेशानी और नुकसान के मद्देनजर) कैसे हिम्मत होगी।
पश्चिम से पूरब के सफर में हमें एक शिकायत नजर आई जो काफी आम थी वो ये कि जो लोग गायों को लेकर एक जगह से दूसरी जगह तक जाते हैं उन्हें पुलिस प्रताडऩा का सामना करना पड़ता है। हमने डेयरी एक्सपर्ट पी सेतुमाधवन से इन कानूनों के (कारण) कारोबार पर पडऩे वाले असर पर बात की। उन्होंने माना कि गोरक्षा के लिए बने इन कानूनों का डेयरी इंडस्ट्री पर असर पड़ा है, इसके कई पहलू हैं जिसमें गोरक्षक, मारपीट, कानूनी मसले और भ्रष्टाचार शामिल हैं। इन क़ानूनों के कारण बूढ़े मवेशियों को लेकर भी समस्या है। गोरक्षा कानूनों के कारण किसानों को उन गायों को भी पालना पड़ता है जो बूढ़ी हो चुकी होती हैं। किसानों की आमदनी पर इसका बड़ा असर पड़ता है। मुनाफा घटने के कारण किसान गोपालन से बचने लगे हैं। बताते हैं कि उन्होंने गुजरात में कई जगहों पर इसका असर देखा है जहां किसान गायों को सड़कों पर आवारा छोड़ देते हैं।
कानून जैसे जैसे अपना काम करता है एक डर का माहौल भी बनता है। डेयरी किसान हर्षवर्धन की यह बात कि डर तो बहुत लगता है, जैसे ही हरियाणा-पंजाब पार कर उत्तर प्रदेश में दाखिल होते हैं दिल धड़कने लगता है कि अब पुलिस तो तंग करेगी ही करेगी। ब्रीडर रवि नरवाल कहते हैं कि जब किसी बंदे को पता लग गया कि इस धंधे में जाने से लॉस होता है तो कौन जाएगा, कोई भी नहीं जाएगा। गोरक्षा कानूनों के तहत होने वाली सजाओं की संख्या देश में बहुत कम है, उदाहरण के तौर पर साल 2022 में हरियाणा में इस कानून के तहत 402 मामले दर्ज किए गए थे जिनमें से सिर्फ आठ मामलों में मुकदमा चला। कई राज्यों ने ऐसे आंकड़े जारी भी नहीं किए हैं। साभार : बीबीसी