वन भूमि पर कायम रहेगा सत्ता के दुलारों का कब्जा, सुप्रीम कोर्ट की नाटकबाजी भी चलती रहेगी

वन भूमि पर कायम रहेगा सत्ता के दुलारों का कब्जा, सुप्रीम कोर्ट की नाटकबाजी भी चलती रहेगी
January 12 10:17 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) अरावली के संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध रूप से बनाए गए पांच सौ से अधिक फार्म हाउस, बैंकट हॉल, गोशाला, मैरिज लॉन, शैक्षणिक संस्थान आदि को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद वन विभाग से लेकर प्रशासन तोड़ नहीं पा रहे हैं। तोडऩा तो दूर नया अवैध निर्माण भी नहीं रोक पा रहे हैं। मार्च में वन विभाग को सुप्रीम कोर्ट में कार्रवाई की रिपोर्ट दाखिल करनी है इसलिए उसके अधिकारी नगर निगम, जिला प्रशासन, पुलिस से मदद मांगने की कागजी औपचारिकताओं का पाखंड कर कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे हैं। क्योंकि अधिकतर अवैध निर्माण पिछले दस साल में सत्ता के करीबी रसूखदार, भूमाफिया ने ही कराए हैं जिन्हें मंत्री, विधायक और सत्ता के दलालों का समर्थन प्राप्त है तो प्रशासन की हिम्मत कैसे हो सकती है।

अरावली संरक्षित वन क्षेत्र में अवैध निर्माण को गिराने का आदेश सुप्रीम कोर्ट ने साल 2021 से ही दे रखा है। सर्वाेच्च न्यायालय के आदेश का पालन करना था तो प्रशासन ने खोरी में गरीबों की बस्ती उजाड़ दी और लगातार 22 दिन तक बुलडोजर चला। खोरी के पीडि़तों ने अरावली संरक्षित क्षेत्र में हो रहे अवैध निर्माण को भी गिराए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने इन अवैध निर्माणों को चिह्नित कर तोडऩे का आदेश दिया था।

करीब चार साल बीत गए लेकिन सत्ता के करीबी, भूमाफिया के इन अवैध बैंकट हॉल, मैरिज लॉन, गोशालाओं को तोड़ा नहीं गया। तोडऩा तो दूर वन विभाग, नगर निगम या जिला प्रशासन किसी ने नए अवैध निर्माण पर रोक भी नहीं लगाई। केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के करीबी कैलाश बैंसला, बंटी भाटिया, करतार भड़ाना जैसे अनेक दबंगों ने सत्ता के संरक्षण में अवैध निर्माण कर डाले। यही नहीं जमीन हथियाने के लिए गोपाल गोशाला, नारायण गोशाला, काजल फार्म, अडग़ड़ानंद फार्म सहित अनेक अवैध निर्माण संरक्षित वन क्षेत्र के पेड़ पौधे काट कर बना दिए गए। प्रतिबंध के बावजूद लेकवुड सिटी का निर्माण हो गया। संरक्षित क्षेत्र मेें अवैध कब्जा कर बनाई गई मानव रचना यूनिवर्सिटी को बचाने के लिए तो सरकार यूनिवर्सिटी प्रबंधन से महेंद्रगढ़ नारनौल में थोड़ी सी जमीन लेकर मामला निपटाने पर आमादा है।

ये अवैध निर्माण आज भी बदस्तूर जारी हैं। खास बात यह है सरकार को इन अवैध निर्माणों की रिपोर्ट भी समय समय पर भेजी गईं लेकिन सीएम खट्टर ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की। नतीजा यह रहा कि बीते तीन चार साल में करीब सौ अवैध निर्माण हुए जिनमें गोशालाए, बैंकट हॉल, मैरिज लॉन प्रमुख थे। यहां तक कि बताया जा रहा है कि कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल और उसके सहयोगी ने पूर्व में 23 एकड़ जमीन पर कब्जा कर अवैध निर्माण कराया था लेकिन सत्ता से हटने के बाद केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के इशारे पर 2022 में उनका अवैध निर्माण गिरवा दिया गया था। बताया जा रहा है कि बावजूद इसके कब्जा उनका ही बना हुआ है।

सु्प्रीम कोर्ट ने जून 2024 में अवैध निर्माणों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया तो इन अवैध निर्माण को तोडऩे का पाखंड किया गया। वन विभाग ने बिजली महकमे को पत्र लिख कर अवैध निर्माणों से बिजली कनेक्शन काटने का अनुरोध किया था। बताया जाता है कि बीस टीमें भी बनाई गई थीं लेकिन केवल उन चंद फार्म हाउसों का कनेक्शन ही काटा गया जिनके मालिक सत्ता पक्ष के साथ नहीं थे, हालांकि बाद में उनमें से भी अधिकतर ने नेताओं के यहां हाजिरी भरी और कनेक्शन बहाल कर दिए गए। कई फार्म हाउस वालों के यहां बड़े बड़े डीजल जेनेरेटर सेट भी लगे हुए हैं, जिन पर न तो एनजीटी की नजर जाती है और न ही प्रदूषण नियंत्रण विभाग की।

करीब आठ माह से हाथ पर हाथ धरे बैठे वन विभाग को अब मार्च में सुप्रीम कोर्ट को जवाब देने की सुधि आई है तो पाखंड किया जा रहा है। बीते दो सप्ताह से अरावली में अवैध निर्माण तोडऩे की कागजी कवायद की जा रही है लेकिन अधिकारी कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। बीते 26 दिसंबर को वन विभाग के अधिकारियों की मैराथन बैठक हुई और 27 दिसंबर को तोडफ़ोड़ की कार्रवाई तय की गई, पुलिस आयुक्त से फोर्स मांगी गई।

समय पर वन विभाग के अधिकारी तामझाम लेकर पहुंच गए लेकिन शाम तक पुलिस बल ही नहीं पहुंचा। पुलिस बल नहीं मिलने के कारण कार्रवाई नहीं हो पाना कागजों में दर्ज कर कर्तव्यों की इतिश्री कर ली गई। सोमवार को भी वन विभाग की टीम कार्रवाई का दिखावा करने पहुंच गई जबकि इस दिन भी नगर निगम से तोडफ़ोड दस्ता और पुलिस बल दोनों ही नहीं पहुंचे। बीते शुक्रवार को भी यही नाटक तिहराया गया और जल्द कार्रवाई की बात कह सब लौट गए। इन्हें लौटना ही था और भविष्य में भी न केवल इसी तरह लौटते रहेंगे बल्कि सत्ता के संरक्षण में लगातार हो रहे अवैध निर्माणों पर चुप्पी भी साधे रहेंगे।

सबको मालूम है कि भाजपा सरकार इन अवैध निर्माणों को संरक्षण दे रही है, यही कारण है कि सरकार ने अक्तूबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट में दलील पेश की थी कि यदि पीएलपीए 1900 की धारा तीन व चार लागू की गई तो करीब 40 फीसदी हिस्सा प्रभावित हो जाएगा लेकिन न्यायालय ने दलील को खारिज करते हुए 25 अक्तूबर 1980 के बाद बने सभी अवैध निर्माण हटाने का आदेश बरकरार रखा। इससे भी बात नहीं बनी तो खट्टर सरकार ने अप्रैल 2023 में केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिख कर फरीदाबाद में पीएलपीए की धारा चार-पांच के तहत संरक्षित अनंगपुर, अनखीर गांव, सेक्टर 46, लेजर वैली सहित कुछ अन्य इलाकों को संरक्षित क्षेत्र से बाहर किए जाने की सिफारिश की थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लागू कराने का जिम्मा तो सरकार का ही है लेकिन जब अवैध निर्माण करने वाले ही सरकार और प्रशासन में ऊंचे पदों पर बैठे हों तो फिर कार्रवाई के नाम पर यही होना है। रही बात सु़प्रीम कोर्ट में रिपोर्ट देने की तो जब तक भूमाफिया संरक्षक सरकार और प्रशासन रहेगा, ठोस कुछ होने वाला नहीं।

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Mazdoor Morcha
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