फरीदाबाद (म.मो.) जि़ले भर में डॉक्टरों के अलावा 1100 अन्य स्वास्थ्यकर्मी सरकारी अस्पतालों व स्वास्थ्य केन्द्रों में कार्यरत हैं। इनमें से केवल 400 कर्मचारी नियमित एवं पक्की नौकरी में हैं जबकि शेष 700 ठेकेदारी, जिसे एनएचएम का नाम दिया गया है, के तहत कार्यरत हैं। शहर के विस्तार एवं बढ़ती जनसंख्या को देखते हुए यहां कम से कम 2500 स्वास्थ्यकर्मियों की आवश्यकता है।
अपनी जनविरोधी नीतियों के चलते सरकार ने बीते कई वर्षों से नई भर्तियां पूरी तरह से बंद कर रखी हैं। सेवा निवृत होने से रिक्त हुए स्थानों को ठेकेदारी व्यवस्था से भरने की नीति केवल इसलिये अपनाई जा रही है कि ऐसे कर्मियों का जम कर शोषण किया जा सकता है। इन कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की अपेक्षा मात्र एक चौथाई वेतन पर ही रखा जाता है। इसके अलावा इन्हें जब मर्जी काम से हटाया जा सकता है। इतना ही नहीं इन्हें पेंशन व अन्य कोई सेवा लाभ भी नहीं मिलता। अपनी वेतन वृद्धि व सेवा शर्तों में सुधार को लेकर ये लोग हड़ताल पर चल रहे हैं।
1100 कर्मियों में से जब 700 कर्मी हड़ताल पर होंगे तो पहले से ही चरमराई स्वास्थ्य सेवाओं का जो दीवाला निकला है उससे वे गरीब मरीज़ त्रस्त हैं जो सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं के भरोसे हैं। कहने की जरूरत नहीं कि निजी स्वास्थ्य सेवायें इतनी महंगी हैं कि उन लोगों के वश की नहीं। जाहिर है ऐसे में, जब बीमारियों का सीजन चल रहा हो तो जनता का एक बड़ा वर्ग भारी मुसीबत में फंस कर रह गया है। गर्भवती एवं प्रसव वाली महिलाओं के लिये तो यह संकट और भी भारी हो गया है।
दरअसल इन हड़ताली कर्मियों का उद्देश्य मरीज़ों को दुखी करना नहीं है, वे तो केवल इसके द्वारा सरकार पर दबाव बना कर अपनी मांगों को मनवाना चाहते हैं। मरीजों को सेवायें देने का दायित्व सरकार का है न कि किसी व्यक्ति विशेष का। जनता को सेवायें प्रदान करने के लिये सरकार आवश्यकतानुसार कर्मियों की भर्ती करती है जो अपनी सेवाओं के बदले वेतन एवं भत्ते आदि लेते हैं। लेकिन बेईमानी की नींव पर खड़ी सरकार हर तरह से प्रयास करती है कि सस्ते से सस्ते में कर्मियों को काम पर लगाकर खानापूर्ति की जाये।
इन कर्मचारियों द्वारा हड़ताल की स्थिति में मरीजों को होनेवाली परेशानी के लिये सरकार पूरी तरह से जिम्मेदार है न कि कर्मी। लेकिन बेशर्मी पर उतरी सरकार को इस बात से कोई सरोकर नहीं कि जिन लोगों को सेवा देना उसका दायित्व है और वह सेवा नहीं दे पा रही है। सेवा के आभाव में लोग मरते हैं तो मरें उसकी बला से।