जिस दिन भी शादियों का जोर होता है सूरजकुंड सड़क पर जाम लगना सुनिश्चित रहता है मंगलवार रात को दस बजे यह संवाददाता सूरजकुंड से अजरौंदा के लिए निकला तो बामुश्किल आधे घंटे का सफर तय करने में पूरे दो घंटे लग गए। सूरजकुंड से 21 सेक्टर जाने वाली सड़क भी वाहनों से ठसाठस थी और उधर से सूरजकुंड की ओर जाने वाली लेन का भी यही हाल रहा। कुछ लोग जो प्रशासन के निकम्मेपन से भली भांति परिचित थे उन्होंने रूट बदलते हुए सूरजकुंड से निकल कर बदरपुर होकर हाइवे का रास्ता पकड़ा लेकिन जिन्हें प्रशासन पर दक्षता पर विश्वास था वो घंटो जाम में फंसे रहे।
15 किलोमीटर के जाम में जहां हजारों छोटे बड़े वाहन फंसे खड़े हों तो समझा जा सकता है कि कितना तेल जला होगा और वायुमंडल कितना प्रदूषित हुआ होगा। जो सरकार जाम मुक्त करने के नाम पर तरह तरह की घोषणाएं करती फिरती है वह इस छोटी सी समस्या को सुलझाने में पूरी तरह से विफल है। दरअसल होता यह है कि जहां मोड़ अथवा कोई चौराहा बनता है वहीं ट्रैफिक फंसता है और फंस कर खड़ा हो जाता है। इस रूट पर कुल मिलाकर चार पांच ही ऐसे प्वाइंट बनते हैं जिन पर यदि ट्रैफिक पुलिस तैनात कर दी जाए तो कोई समस्या न बने। इतना भी नहीं तो कम से कम दो राइडर भी अगर घूमते रहें तो स्थिति को बखूबी नियंत्रित किया जा सकता है परंतु शासन-प्रशासन की नीयत स्थिति नियंत्रित करने के बजाय फर्जी प्रोजेक्टों की ढोल पीटने की है।