फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) जि़ले भर के अनेकों स्कूल इस कदर जर्जर हो चुके हैं कि उनमें बच्चों को बैठाना सुरक्षित नहीं समझा जाता, लिहाज़ा उन्हें गर्मी, सर्दी के बावजूद खुले आसमान के नीचे धरती पर बैठाया जाता है।
इस समस्या से निपटने के लिए शिक्षा विभाग ने इस जि़ले के लिए 30 करोड़ रुपए स्वीकृत किए हैं। अच्छी बात है, लेकिन देखने वाली बात यह है कि इस रकम का इस्तेमाल होता कैसे है? इस रकम से क्या वास्तव में ही स्कूल भवनों की हालत सुधरेगी अथवा मास्टर यतिन्द्र शास्त्री जैसे भ्रष्टाचारियों के घर भरे जाएंगे? विदित है कि यतिन्द्र द्वारा करीब 60 लाख रुपए खर्च करके सेहत पुर गांव में ऐसा स्कूल भवन बनवाया गया था जिसे एक दिन भी इस्तेमाल किए बगैर तोडऩे पर ही हजारों रुपए खर्च हो गए। जि़ले में इस तरह का यह कोई इकलौता मामला नहीं है। गांव भांकड़ी व एनआईटी तीन नम्बर आदि जैसे अनेकों स्कूलों का निर्माण घोटाला ‘मज़दूर मोर्चा’ प्रकाशित कर चुका है। समझा जाता है कि स्थानीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल द्वारा कुछ स्कूलों की जर्जर हालत को देखने के बाद शिक्षा निदेशालय से उक्त बजट जारी कराया गया है। अब विपुल गोयल का यह दायित्व भी बनता है कि इस बजट में होने वाली किसी भी सेंधमारी को रोकें तथा धन का सदुपयोग सुनिश्चित करें।