शहर की सफाई के लिए जरूरी वाहनों की सर्विस भी नहीं करा रहा निगम प्रशासन

शहर की सफाई के लिए जरूरी वाहनों की सर्विस भी नहीं करा रहा निगम प्रशासन
March 19 15:31 2023

पंक्चर होने पर अपने खर्च पर टायर की मरम्मत कराने को मजबूर वाहन चालक
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। शहर की नागरिक सुविधाओं को दुरुस्त रखने में इस्तेमाल होने वाली नगर निगम की गाडिय़ां खस्ताहाल हैं। सुपरसकर मशीन हो, जेसीबी या अन्य छोटी बड़ी गाडिय़ां, बीते पंद्रह महीनों से किसी की भी सर्विस नहीं हुई है। टूट-फूट होने पर कलपुर्जे भी नहीं बदले जा रहे। खस्ताहाल वाहनों को दुरुस्त कराने के बजाय अधिकारी केवल हुक्म बजाने का तुगलकी आदेश सुना देते हैं, बेचारे चालक अपने खर्च पर गाडिय़ों को चलने योग्य बनवा रहे हैं। जाहिर है कि चालक तनख्वाह से तो यह काम करा नहीं सकता। जब सारे अधिकारी लूटने खाने में लगे हैं तो चालक भी कहीं न कहीं से तो खर्चा वसूल करेगा ही।

नगर निगम वाहन चालक यूनियन के अध्यक्ष परसराम अधाना ने बताया कि निगम के किसी भी वाहन की पिछले पंद्रह महीनों से सर्विस नहीं हुई है। नियमानुसार दस हजार किलोमीटर या पांच माह पर वाहन की सर्विस कराई जानी चाहिए। सर्विस नहीं कराए जाने के कारण जेसीबी, हाईवा और ट्रैक्टर भी खराब हो रहे हैं। सुपर सकर सहित छोटे-बड़े पुराने वाहनों की भी हालत खस्ता है। अधाना बताते हैं कि निगम की वर्कशॉप में वाहनों के लिए बहुत जरूरी सामान जैसे मोबिल ऑयल, ग्रीस, ईंधन यूरिया, कूलेंट, फैन बेल्ट, जेसीबी के डोल, फिल्टर, टायर, बैटरी, ट्रॉली के बेयरिंग, हाइड्रोलिक पाइप आदि नहीं हैं। यहां तक कि टायर पंक्चर किट भी नहीं है। पंक्चर होने पर चालकों को अपना खर्च कर टायर सही करवाना पड़ता है। चालकों का दर्द यह है कि अधिकारी काम करने का फरमान तो जारी कर देते हैं लेकिन खस्ताहाल वाहनों को दुरुस्त कराने की बात कहे जाने पर आला अधिकारियों से कहने की सलाह देकर पल्ला झाड़ लेते हैं। काम नहीं होने पर अधिकारी नाराजगी भी जताते हैं। परसराम अधाना ने निगम कमिश्रर जीतेंद्र दहिया को लिखित शिकायत देकर समस्या सुलझाने की मांग की है।

इकोग्रीन के अनफिट वाहन दौड़ रहे सडक़ों पर
स्मार्ट सिटी का कचरा प्रबंधन करने की जिम्मेदार इकोग्रीन कंपनी पर मानो प्रदूषण नियंत्रण, सडक़ सुरक्षा और वाहनों के मानक लागू नहीं होते। इस कंपनी के सैकड़ों वाहन फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट के बिना दौड़ रहे हैं। यदि इन वाहनों से कोई हादसा होता है तो इन्हें पकडऩा मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा।

आरटीओ नियमों के मुताबिक किसी भी कॉमर्शियल वाहन को प्रतिवर्ष मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना होता है। प्रदूषण नियंत्रित होने का सर्टिफिकेट भी हर तीन महीने बाद लेना जरूरी है। बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के वाहन सडक़ पर नहीं चल सकते। यदि चलते हुए पाए गए तो मोटा जुर्माना लगता है। इकोग्रीन के सैकड़ों वाहनों में से अनेक तो बिना रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट के चल रहे हैं। फिटनेस और प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट तो किसी भी वाहन का नहीं है। सडक़ पर दौड़ रहे निजी कंपनी के इन सैकड़ों वाहनों पर इतनी मेहरबानी क्यों?

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Mazdoor Morcha
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