फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बिल्कुल आज से एक साल पहले, 1 दिसंबर 2024 को भी कैंडल मार्च किया गया था, जिसमें स्थानीय लोगों ने इस कूड़ा घर के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया था। इस मामले में एनजीटी में केस चल रहा है, लेकिन तारीख पर तारीख बढ़ती जा रही है। सरकार हमारी आवाज़ नहीं सुन रही है। हमारे मंत्री जी, कृष्णा पाल गुर्जर जी, के पास हम 5-6 बार जा चुके हैं, लेकिन हर बार सि$र्फ मीठी गोली देकर यह कह दिया जाता है कि ‘कमिश्नर से बात कर रहे हैं। ‘ इसके बावजूद डंपर लगातार आते रहे।
कुछ समय के लिए जब लोग थोड़े शांत हुए, तो दिन-रात 50-60 डंपर आने लगे। लेकिन 2-4 दिन पहले कुछ महिलाओं और पुरुषों ने डंपरों को रोका, तब पता चला कि एमसीएफ से 5 गाडिय़ाँ आ रही हैं, और उनके नंबर भी हमें दिए गए हैं। बाकी सभी गाडिय़ाँ बिना अनुमति और वैध तरीके से आ ही थीं। आज सैकड़ों की संख्या में लोग कैंडल मार्च में शामिल हुए और अपना विरोध दर्ज कराया। आगे की रणनीति लोगों ने यह बनाई है कि यदि अब डंपर आए, तो हर हालत में सब मिलकर उन्हें रोका जाएगा और एक भी डंपर आगे नहीं जाने दिया जाएगा। कैंडल मार्च समाप्त होने के बाद, 200 से अधिक लोग सेक्टर 55 की पुलिस चौकी पहुँचे और रूष्टस्न के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया, क्योंकि एमसीएफ अपनी मनमानी कर रहा है।
हमने अपनी शिकायत दर्ज करा दी है और हमें भरोसा दिलाया गया है कि 2-4 दिनों में एफअईआर दर्ज कर ली जाएगी। डंपिंग-यार्ड को लेकर सेक्टर 56, गांव प्रतापगढ़ व आसपास के निवासियों का संघर्ष तो प्रसंशनीय है, लेकिन इसकी दिशा में कुछ परिवर्तन की आवश्यकता है। जिन राजनेताओं के आगे-पीछे घूम कर, उनकी चापलूसी करके समस्या का समाधान चाहते हैं, वह होने वाला नहीं। इन बेशर्म व ढीठ एवं चोर नेताओं के विरुद्ध कड़े संघर्ष की आवश्यकता है। इन नेताओं से पूछा जाना चाहिए कि वे अपनी पॉश कालोनियों में डंपिंग यार्ड क्यों नहीं बनबाते, गरीब बस्तियों में ही गंदगी के ढेर क्यों लगाए जाते हैं। रही बात थाने में एफआईआर दर्ज कराने की तो इससे कुछ होने जाने वाला नहीं है। अव्वल तो ये लोग इसे दर्ज करने वाले नहीं हैं और यदि गलती से दर्ज कर भी ली गई तो किसी कार्रवाई की कोई सम्भावना नहीं हो सकती। -सम्पादक