प्रशासक वर्ग नहीं रोकना चाहता नगर निगम का भ्रष्टाचार

प्रशासक वर्ग नहीं रोकना चाहता नगर निगम का भ्रष्टाचार
March 19 16:02 2023

अनाधिकृत कर्मचारियों से भरवाई जा रही मेजरमेंट बुक, हेराफेरी के लिए नहीं होते जिम्मेदार
फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पहले दो सौ करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता, अब एनआईटी के वार्ड छह में दो गलियों के निर्माण का दो बार भुगतान किए जाने का आरोप, नगर निगम में भ्रष्टाचार के कारनामे लगातार खुल रहे हैं। दरअसल नगर निगम को चलाने वाला प्रशासक वर्ग भ्रष्टाचार को रोकना नहीं चाहता। शायद यही कारण है कि पूर्व कमिश्रर ने भ्रष्टाचार रोकने के जो उपाय किए थे उनके जाते ही वर्तमान प्रशासक वर्ग ने उसे दरकिनार कर दिया।

वार्ड नंबर छह निवासी राम सिंह ने हाल ही में शिकायत की है कि इस वार्ड की गली नंबर छह का निर्माण मार्च 2019 में 13 लाख रुपये की लागत से किया गया था। इसी गली का नवंबर 2019 में दोबारा निर्माण दिखा फिर से 12 लाख रुपये की बंदरबांट की गई। दरअसल इस मामले में निर्माण कार्य की मेजरमेंट बुक (एमबी)आउटसोर्स में भर्ती अभियंता ने भरी थी। मालूम हो कि आउटसोर्स के कर्मचारी की कोई जवाबदेही नहीं होती। कुछ सामाजिक और आरटीआई कार्यकर्ताओं ने तत्कालीन एमसीएफ कमिश्रर यश गर्ग को इस गोरखधंधे की जानकारी दी थी। इस पर उन्होंने 11 मई 2020 को पत्र जारी कर आउटसोर्स के कर्मचारियों के एमबी भरने पर रोक लगा दी थी। उनके आदेश के मुताबिक केवल नियमित जूनियर इंजीनियर ही एमबी भर सकता है। यदि जूनियर इंजीनियर का पद खाली है तो पद भरे जाने तक ही असिस्टेंट इंजीनियर एमबी भरेगा। इस व्यवस्था का पालन सख्ती से किए जाने और गलती होने पर संबंधित एक्जीक्यूटिव इंजीनियर की जिम्मेदारी होना तय किया गया था। यश गर्ग के स्थानांतरण के बाद यह व्यवस्था कुछ दिन तो ठीक से चली लेकिन वर्तमान में फिर वही ढर्रा शुरू हो गया है। आउटसोर्सिंग के इंजीनियर एमबी भर रहे हैं। इन इंजीनियरों को एमबी भरने का आदेश और अधिकार दिया जाना नगर निगम में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने की प्रशासनिक वर्ग की मंशा को ही दर्शाता है।

दरअसल बिना जवाबदेही वाले यह आउटसोर्स कर्मचारी वित्तीय अनियमितता और हेराफेरी के कार्यों में नियमित अधिकारियों की रक्षा ढाल के रूप में काम करते हैं। भ्रष्टाचार साबित होने पर अधिक से अधिक इन कर्मचारियों की सेवा समाप्त कर दी जाती है और अधिकारी सीधे तौर से जवाबदेह नहीं होकर बच जाते हैं। इस संबंध में नगर निगम कमिश्रर जीतेंद्र दहिया से मज़दूर मोर्चा ने उनका पक्ष जानना चाहा लेकिन उनका फोन नहीं उठा। उनका पक्ष मिलने पर प्रकाशित किया जाएगा।

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