फरीदाबाद में कोरोना जांच के नाम पर निजी लैब और बीके अस्पताल ने मचाई अंधेरगर्दी..

फरीदाबाद में कोरोना जांच के नाम पर निजी लैब और बीके अस्पताल ने मचाई अंधेरगर्दी..
November 22 03:13 2020

 

टेस्टिंग के मनमाने रेट, पैसे की रसीद देने को तैयार नहीं, डॉक्टरों से मिलीभगत

मजदूर मोर्चा ब्यूरो

फरीदाबाद: शहर में कोरोना के मरीज बेतहाशा बढ़ रहे हैं और जिला प्रशासन ने बड़े पैमाने पर एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं लेकिन इसी के साथ शहर के प्राइवेट लैब से मनमाना पैसा वसूलने की सूचनाएं भी मिल रही हैं। कोरोना टेस्ट करने वाली प्राइवेट लैब पर जिला प्रशासन की जरा भी नहीं चल रही है। हालांकि इन पर तमाम कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है लेकिन जिला प्रशासन ने इनकी लूट को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

कैसा ये गोरखधंधा

अरुण खरबन्दा नामक शख्स ने शिकायत की है उन्होंने गुरुवार 19 नवम्बर को सेक्टर 9 स्थित एसआरएल टेस्टिंग लैब पर कोरोना जांच के लिए बुकिंग कराई। इस एसआरएल सेंटर चलाने वालों ने अरुण खरबन्दा से 1500 रुपये मांगे। परिवार ने जब लैब वाले से इसकी रसीद मांगी तो उसने रसीद ही देने से मना कर दिया। सरकार की ओर से ऐसे टेस्ट का रेट 900 रुपये तय किया गया है लेकिन कोई भी निजी लैब इसे मानने को तैयार नहीं है।

ऐसा अकेला सेक्टर 9 की किसी एक प्राइवेट टेस्टिंग लैब का हाल ही नहीं है। कुछ लैब तो डॉक्टरों के रेफर करने पर टेस्ट कर रही हैं। डॉक्टर खुद पूरी मोटी फीस वसूल लेता है। बाद में वह टेस्टिंग लैब से रिपोर्ट मंगाकर इलाज शुरू कर देता है।

प्राइवेट डॉक्टरों या नर्सिंग होम से रेफर किये जा रहे कथित कोरोना संक्रमित मरीजों की रिपोर्ट सीधे उसी प्राइवेट डॉक्टर के पास आ जाती है। वह मरीज कोरोना के नाम पर उस अस्पताल में तीन-चार दिन रखा जाता है। मोटा बिल वसूल कर और उसी लैब से दूसरी कोरोना नेगेटिव रिपोर्ट मंगाकर मरीज को घर भेज दिया जाता है। मरीज को अंत तक कन्फ्यूजन रहता है कि उसे कोरोना हुआ था या नहीं। मामूली खांसी, जुकाम और बुखार वालों को भी कोरोना संक्रमित घोषित किया जा रहा है। यह सारा खेल प्राइवेट लैब एजेंसियां और कुछ प्राइवेट डॉक्टर मिलकर खेल रहे हैं।

बिना आधार जांच नहीं

बेलसिना कुमार ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में शिकायत की है कि कोरोना लक्षण पाये जाने पर उनकी 80 साल की चाची को फरीदाबाद के एक नामी प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया लेकिन अस्पताल ने उनसे आधार कार्ड मांगा। घर वाले बुजुर्ग महिला का आधार कार्ड लेकर नहीं गये थे। उस प्राइवेट अस्पताल ने उस बुजुर्ग महिला का टेस्ट करने और भर्ती करने से मना कर दिया। आरोप है कि फरीदाबाद में निजी अस्पताल सिर्फ ऐसे कोरोना मरीजों को ही भर्ती कर रहे हैं या उनका इलाज कर रहे हैं जिनकी आर्थिक स्थिति अच्छी होती है या फिर उनके पास कोई मेडिक्लेम होता है। बड़ी तादाद में ऐसे मरीज वापस किये जा रहे हैं जिनके पास न पैसा है और न मेडिक्लेम। सरकारी अस्पताल की तादाद कम होने और स्थिति अच्छी न होने की वजह से अधिकांश लोग प्राइवेट अस्पतालों की तरफ भागते हैं लेकिन प्राइवेट अस्पतालों का रवैया लूट खसोट वाला है।

इमरजेंसी की बजाय ओपीडी

कुछ निजी अस्पतालों में कोरोना के संदिग्घ मरीजों को इमरजेंसी केस नहीं मानते हुए उन्हें जबरन ओपीडी में लाया जाता है। वहां से उनके लिए अनावश्यक टेस्ट लिख दिये जाते हैं। मरीजों को ऐसे – ऐसे टेस्ट लिखे जाते हैं, जिनकी उसे जरूरत ही नहीं है। सरकार का निर्देश है कि कोरोना के मरीजों को इमरजेंसी केस माना जाए लेकिन निजी अस्पताल इसकी खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। मरीजों के साथ आये लोग या तीमारदार डॉक्टरों से जब तमाम टेस्ट के बारे में पूछते हैं तो वे चुप्पी लगा जाते हैं, क्योंकि उन्हें अस्पताल मैनेजमेंट ने इस बारे में किसी भी तरह की बात मरीज या उसके घर वालों से करने से मना कर रखा है।

बीके अस्पताल में भी वसूली

फऱीदाबाद के सरकारी अस्पताल में कोरोना टेस्टिंग के नाम पर भी वसूली हो रही है। हरियाणा सरकार का निर्देश है कि सरकारी अस्पतालों में कोरोना जाँच मुफ़्त होगी।

फरीदाबाद के रहने वाले सतीश मित्तल, उनकी पत्नी और बेटा कोरोना से ठीक होने के बाद जब पुष्टि के लिए  बीके अस्पताल की लैब में आये तो वहाँ तैनात लैब टेक्नीशियन पंकज राजपूत ने उनसे नौ सौ रुपये प्रति मरीज के हिसाब से बिना रसीद के मांगे। जो उन्होंने नहीं दिये और उसको शिकायत करने की धमकी दी। तो उसने फ्री में टेस्ट किया।

बीके अस्पताल प्रशासन ने खुद सरकार का नोटिफिकेशन दीवार पर चिपका रखा है। जिसमें स्पष्ट किया है कि विदेश यात्रा या किसी कम्पीटिशन में जाने के लिए अगर कोरोना मुक्त होने का प्रमाण पत्र चाहिये तो उसके 600 से 900 रूपए लगेंगे। लेकिन यहां तो कोरोना के सामान्य मरीजों से भी बेधडक़ वसूली की जा रही है।

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