फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर की सिफारिश पर नगर निगम में जेई लगे हर्षवधन चपराना और एसडीओ राजेश शर्मा बीते मंगलवार को बडख़ल, परमधाम मंदिर के पास स्थित एक कृषि फार्म की बाउंड्री तोडऩे पहुंच गए। आरोप है कि जेई और एसडीओ दोनों ही शराब के नशे में धुत्त थे और जमीन के मालिक संदीप शर्मा व उनके परिजनों ने जब इन दोनों अधिकारियों से तोडफ़ोड़ का आदेश या नोटिस दिखाने को कहा तो ये दोनों धमकियां देने लगे। मजबूर होकर संदीप शर्मा ने 100 पर डायल कर पुलिस को मौके पर बुला लिया। पुलिस दोनों पक्षों को अनखीर चौकी तो ले आई लेकिन वह नगर निगम के अधिकारियों का बचाव करती नजर आई।
संदीप पक्ष का आरोप है कि नशे में धुत्त जेई हर्षवर्धन ने चौकी के अंदर ही उन लोगों को धमकी दी कि ‘मैं यहीं मेवला महराजपुर का रहने वाला हूं अभी पांच सौ लड़के बुला कर तुम लोगो की हड्डियां तोड़ूंगा देखें कौन तुम्हें बचा पाएगा।’ सुधी पाठकों को बताते चलें कि नगर निगम या किसी भी विभाग द्वारा कहीं भी तोडफ़ोड़ करने से पहले संबंधित को नोटिस जारी किया जाता है, इसमें चेतावनी होती है कि यदि अमुक तारीख तक तुमने अतिक्रमण या अवैध कब्जा नहीं हटाया तो उसे बलपूर्वक तोड़ दिया जाएगा। कार्रवाई के लिए पुलिस विभाग से पुलिस बल मांगा जाता है ताकि मौके पर कानून व्यवस्था बनी रहे। नगर निगम सूत्रों के अनुसार मंगलवार को कोई पुलिस बल नहीं मांगा गया था, न ही संदीप शर्मा को कोई नोटिस जारी किया गया था। अनखीर चौकी में भी जेई और एसडीओ राजेश शर्मा तोडफ़ोड़ का कोई लिखित आदेश नहीं दिखा पाए।
संदीप शर्मा और उनके परिवार ने पुलिस चौकी में ही आरोप लगाया कि नगर निगम के एसडीओ राजेश शर्मा करीब एक महीने से अपने एजेंटों के जरिए पांच लाख रुपये की मांग कर रहे थे, एजेंट धमकी दे रहे थे कि पैसा न दिया तो बाउंड्री तोड़ दी जाएगी। दावा किया कि शर्मा से पहले जो एसडीओ थे उन्हें रिश्वत के तीन लाख रुपये दिए गए थे और उन्होंने कभी दोबारा तोडफ़ोड़ नहीं होने का आश्वासन दिया था। राजेश शर्मा ने पद संभालते ही रुपयों की मांग शुरू कर दी, परिवार से सर्वसम्मति से रिश्वत नहीं देने का निर्णय लिया। रिश्वत का पैसा न मिलता देख ही ये दोनों अधिकारी तोडफ़ोड़ करने पहुंचे थे।
इस मामले में अनखीर चौकी पुलिस की भूमिका भी खराब रही, दोनों पर शराब के नशे में चूर होने का आरोप लगाए जाने के बावजूद पुलिस ने उनका मेडिकल चेकअप नहीं करवाया। लोगों की मांग थी कि चौकी में मौजूद ब्रेथ एनालाइजर से ही दोनों का एल्कोहल लेवल जांचा जाए लेकिन चौकी इंचार्ज ने न मेडिकल जांच कराई और न ही ब्रेथ एनालाइजर लगाया, संदीप शर्मा ने हर्ष चपराना के खिलाफ सरकारी ड्यूटी पर रहते हुए गुंडागर्दी करने और धमकाने की शिकायत दी लेकिन उसे भी पुलिस ने दरकिनार कर दिया। यह भी तब जब मामला पुलिस आयुक्त के संज्ञान में भी था।
लगता है कि नगर निगम के तोडफ़ोड़ दस्ते का गठन ही मोटी कमाई करने के लिए किया गया है। पूरे शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण, अतिक्रमण और सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे धड़ल्ले से हो रहे हैं लेकिन मजाल है कि नगर निगम का तोडफ़ोड़ दस्ता वहां पहुंच जाए, वजह साफ है कि ये सारे काम नगर निगम के छोटे से लेकर बड़े अधिकारी तक को मोटा नजराना देने के बाद ही होते हैं। जिस नगर निगम की मुखिया ही मातहतों से खुल कर महंगे गिफ्ट, मोटी नकदी, जेवर आदि की मांग करती हो तो नीचे के अधिकारी बेखौफ होकर जनता से लूटपाट क्यों नहीं करेंगे। हर्षवर्धन चपराना तो तोडफ़ोड़ शाखा में लगाया ही इसीलिए गया है कि एक तो उसे सजातीय मंत्री गूजर का वरद्हस्त प्राप्त है दूसरे वह संयुक्त आयुक्त का कलेक्शन एजेंट है, इतनी खूबियों के कारण ही उसे लूट कमाई वाले तोडफ़ोड़ दस्ते में लगाया है।
आश्चर्य नहीं होना चाहिए कि वन विभाग को अरावली में अवैध निर्माण गिराने के लिए न तो पुलिस बल मिल पा रहा है और न ही नगर निगम का तोडफ़ोड़ दस्ता। इस कारण वन विभाग अरावली संरक्षित क्षेत्र में चिह्नित दो सौ से अधिक अवैध निर्माण तोड़ नहीं पा रहा। इधर नगर निगम के ‘होनहार’ जेई-एसडीओ हैं जो उन जगहों पर बिना पुलिस बल के ही जेसीबी लेकर तोडऩे पहुंच जाते हैं जहां से नजराने की रकम नहीं आई हो। यह सब स्थानीय शहरी निकाय और कैबिनेट मंत्री विपुल गोयल के शहर में हो रहा है। मंत्री द्वारा इस घटना का संज्ञान नही लिया जाना इस बात का संकेत है कि नगर निगम के भ्रष्ट और खाऊ कमाई अधिकारी-कर्मचारियों को सरकार की मूक सहमति मिली हुई है।