फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) धरातल पर कोई काम करने की बजाय सरकार मीडिया में बयानबाजी करके अपना कर्तव्य पूरा कर लेना चाहती है। नौ जनवरी के अखबारों में सरकार ने प्रकाशित करवाया कि मेवला महाराजपुर में अर्बन हेल्थ सेंटर (यूएचसी)बना कर उस क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। ताकि हर छोटी-मोटी बीमारी एवं प्रसव आदि के लिए बड़े यानी बीके अस्पताल की ओर लोगों को न दौडऩा पड़े। अखबारों में ऐसी खबरें छपने से पढऩे वालों को प्रतीत होता है कि सरकार उनकी भलाई के लिए कितनी चिन्ता-ग्रस्त है। इसके विपरीत असली सच्चाई केवल वही लोग जान पाते हैं जिनके क्षेत्र में यह बना हो। यानी मेवला महाराजपुर में रहने वाले।
सर्वविदित है कि करीब तीन वर्ष पूर्व इसी गांव में करोड़ों रुपए की लागत से यूएचसी के नाम पर शानदार चार-मंजिला भवन का निर्माण किया गया था। इसमें एक एसएमओ, पांच मेडिकल अफसरों व अन्य 112 पेैरा मेडिकल स्टाफ तैनात करने की बात कही गई थी। सदैव उद्घाटन करने की ताक में रहने वाले स्थानीय सांसद एवं केन्द्रीयमंत्री कृष्णपाल गूजर से यह नहीं बर्दाश्त हो सका था कि तत्कालीन मुख्यमंत्री खट्टर इसका उद्घाटन करें। इसलिए गूजर ने खट्टर से पहले ही यूएचसी का उद्घाटन कर दिया था और बाद में फिर खट्टर ने भी किया। बेशक उद्घाटन दो-दो बार हो गए, भवन निर्माण पर करोड़ों रुपए खर्च क र दिए गए लेकिन जनता को इससे कतई कोई लाभ नहीं मिल पाया। क्योंकि वहां न तो पर्याप्त संख्या में डॉक्टर, अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ तैनात किया गया और न ही आवश्यक दवाएं एवं उपकरण आदि उपलब्ध कराए गए। स्थानीय लोग आकर्षक बिल्डिंग देखकर एक बार आते तो जरूर हैं लेकिन निराश होकर सरकार को कोसते हुए लौटने के बाद दोबारा मुड़कर नहीं आते।
जाहिर है जब धरातल पर जनता को कोई सुविधा न दे पाए तो सरकार अखबारों के माध्यम से लुभावनी बयानबाजी करके यह जताने का प्रयास करती है कि वह जनता के लिए भरपूर सुविधाएं देने में व्यस्त है। करीब छ: माह पूर्व यानी जबसे डॉ. मीनाक्षी बतौर एसएमओ यहां तैनात हुई हैं तो इस हेल्थ सेंटर की कार्यशैली में काफी बदलाव होने लगा है। उनके छोटे से कार्यकाल में करीब 40 डिलीवरियां वो खुद करा चुकी है। ऑपरेशन थियेटर तथा लेबोरेटरी के आभाव में वे खुद तथा उनके सहयोगी सर्जन व हड्डी विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी ओर से भरसक प्रयास करते हैं कि यथा सम्भव आने वाले मरीजों को कुछ सेवा दे सकें। मजेदार बात तो यह भी है कि इतनी बड़ी बिल्डिंग की सफाई के लिए एक स्वीपर तक की तैनाती न होने के बावजूद डॉ. मीनाक्षी ने अपने स्तर पर भाग-दौड़ करके कोराली हेल्थ सेंटर से एक स्वीपर को यहां तैनात कराया है। मौके पर गए इस संवाददाता ने पाया कि बिल्डिंग की ऊपरी दो मंजिलों में सिविल सर्जन ने कब्जा करके अपने कुछ दफ्तरों, स्टोर व अन्य कबाड़े भर दिए हैं। यदि इन मंजिलों का सदुपयोग किया जाए तो यह 100 बिस्तरों का अस्पताल बन सकता है। परन्तु यह तभी सम्भव हो सकता है जब यहां का ऑपरेशन थियेटर तथा लेबोरेटरी आदि तमाम उपरकणों आदि से सुसज्जित हो इसके साथ-साथ पूरा स्वीकृत स्टाफ भी तैनात हो। फिलहाल यहां तीन स्टाफ नर्स तथा छ: एएनएम ही तैनात हैं।
डॉक्टर मीनाक्षी से तो मुलाकाल नहीं हो पाई लेकिन स्थानीय लोगों ने उनकी भूरि-भूरि प्रशंंसा करते हुए कहा कि यह बेचारी तो जी-जान से पूरी मेहनत करने में जुटी है। लेकिन जब ऊपर वाले ही कोई सुनवाई न करें तो यह तमाम तरह के औजार उपकरण तथा दवाएं आदि अपने घर से कैसे ले आए? लोगों ने यह भी बताया कि स्टाफ की कमी से निपटने के लिए डॉ. मीनाक्षी अमृता मेडिकल कॉलेज से कुछ प्रशिक्षु छात्रों को अपनी सहायता के लिए लाकर काम चला जरूर रही हैं, लेकिन यह कोई स्थायी समाधान नहीं है। दुख की बात तो यह है कि दुनियां भर की डींगे हांकने वाले स्थानीय सांसद एवं केद्रीयमंत्री कृष्णपाल गूजर का यह पैतृक गांव है।