पलवल (मज़दूर मोर्चा) जनता के वोटों से विधायक बने नयनपाल रावत जनता का नहीं अवैध शराब तस्करों माफिया का प्रतिनिधत्व और संरक्षण कर रहे हैं। संरक्षण भी इतना तगड़ा कि तस्कर की अवैध शराब पकड़े जाने पर पहले तो चौकी प्रभारी से लेकर एसपी पलवल तक सब पर छोडऩे का दबाव बनाया, कानून विरुद्ध होने के कारण अधिकारियों ने उनका आदेश नहीं माना तो विधायक ने भाजपा से समर्थन वापस लेने तक की धमकी दे डाली। समर्थन लेने का कारण बताया कि अधिकारी मनमानी पर उतर आए हैं, जन प्रतिनिधि की नहीं सुन रहे। रावत जी, अधिकारी नियम कानून से बंधे हैं न कि आपकी शराब बिकवाने के लिए, यदि आपके आदेश पूरी तरह मानने लगें तो अवैध शराब तस्करी ही नहीं अपराध, घोटाले सब कुछ चरम पर पहुंच जाएंगे। अल्पमत की कगार पर खड़ी सरकार के सीएम नायब सैनी उनसे तुरंत मिले। भ्रष्टाचार-अपराधमुक्त प्रदेश का ढिंढोरा पीटने वाले सीएम सैनी ने उन्हें संतुष्ट कर सत्ता का साथ देने के लिए मना लिया।
अलावलपुर चौकी इंचार्ज एसआई सुरेश चंद ने मुखबिर की सूचना पर 14 जुलाई की रात करीब नौ बजे अलावलपुर पेट्रोल पंप के पास सफेद रंग की ब्रेजा कार से कई तरह की बीयर, व्हिस्की की 27 पेटी पकड़ी। पुलिस के अनुसार चालक कार छोड़ कर भागने मेें कामयाब हुआ। पकड़ी गई खेप की कीमत करीब एक लाख रुपये आंकी गई थी। बताया जा रहा है कि पुलिस अभी कार और अवैध शराब जब्त कर ही रही थी कि अलावलपुर चौकी प्रभारी एसआई सुरेश चंद के पास विधायक नयनपाल रावत का फोन आया, उन्होंने कार और शराब छोडऩे को कहा। कस्बे में चर्चा जोरों पर है कि पकड़ी गई शराब विधायक नयनपाल रावत की ही है, यह धंधा वह अपने समर्थक सरपंच की पार्टनरशिप में चलाते हैं।
करीब एक लाख की शराब पकड़े जाने पर उन्होंने अपनी विधायकी का रसूख चौकी इंचार्ज पर झाड़ा था लेकिन उसने आला अधिकारियों के आदेश का हवाला देते हुए पल्ला झाड़ लिया, एसएचओ के कहने पर छोड़ देने का आश्वासन दिया। बात बनती न देख विधायक ने तुरंत ही चांदहट थाना प्रभारी दलबीर को फोन कर कार व शराब छुड़वाने को कहा। विधायक के आदेश का पालन एसएचओ ने भी नहीं किया और चौकी प्रभारी को कार्रवाई करने को कहा, लेकिन उसने उनकी भी नहीं सुनी और कार व अवैध शराब जब्त कर आबकारी विभाग को सूचना के साथ पकड़ी गई शराब के सैंपल भेज दिए।
अदना से चौकी प्रभारी से मुंह की खाने से नाराज विधायक ने अपना रुतबा दिखाते हुए एसपी चंद्र मोहन को फोन लगाकर तुरंत ही कार और शराब छुड़वाने को कहा। एसपी ने उनकी बात सुनी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की। 15 जुलाई को विधायक पूरे दिन कार और शराब छुड़वाने के लिए पुलिस अधिकारियों को फोन करते रहे लेकिन कोई बात नहीं बनी। इधर 16 जुलाई को आबकारी विभाग से शराब के अवैध होने की रिपोर्ट आ गई, इस पर रात में मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
पुलिस विभाग के सूत्रों के अनुसार विधायक नयनपाल रावत का पारिवारिक सदस्य विकास विभाग में प्रोबेशनर एसआई पद पर तैनात है। बघोला चौकी पर तैनाती के दौरान वह विधायक के अवैध शराब तस्करी वाले वाहनों को सुरक्षित निकालता था। 12 जुलाई को पलवल एसपी का चार्ज संभालने वाले चंद्र मोहन को विकास की करतूत का पता चला तो उन्होंने उसे अपने दफ़्तर के कोने में बैठा दिया। इसके साथ ही उन्होंने अवैध शराब तस्करी नेटवर्क ध्वस्त करने का आदेश दिया। नयनपाल रावत को जैसे ही पता चला कि उसके प्रिय एसआई विकास को एसपी ऑफिस में लगा दिया गया है तो उन्होंने उसे दोबारा बघोला चौकी में तैनाती दिलाने के लिए पुलिस अधीक्षक चंद्र मोहन को कई बार फोन किए लेकिन उन्होंने उसे को अपने कार्यालय में ही रखा।
बेचारे नयनपाल रावत, हरियाणा भंडारण निगम के चेयरमैन पद से पहले ही निवृत्त हुए बैठे हैं, जहां से कुछ चुग्गा पानी आ जाया करता था। अंतिम समय में अल्पमत में आई सरकार को समर्थन देकर बचाया फिर भी मंत्री तक नहीं बनाया गया। अब अवैध शराब का धंधा कर रहे हैं तो वो भी पुलिस नहीं करने दे रही है, न ही उनकी सुनी जा रही है। बड़ी मुश्किल से तो पिछले चुनाव के कर्ज उतारे थे, अगला चुनाव सिर पर खड़ा है, सरकार कमाई का कोई साधन बनाने नहीं दे रही है, तो नाराज न हो तो क्या करें।
विधायक ने वीडियो जारी कर बताया कि वह इसलिए नाराज थे कि यदि मेरे लोगों को किसी प्रकार की राहत नहीं दे रहे, विकास कार्य रुके हुए हैं बहुत सारे काम यहां और चंडीगढ़ में रुके हुए हैं तो मेरा सरकार मेंं रहने का क्या फायदा। रावत जी की ये बातें थोथी और धंधेबाजी के अलावा कुछ नहीं है, पांच साल में उन्होंने जनता के हित में न तो स्कूल बनवाने की मांग की, बिजली-पानी-सडक़ जैसी आधारभूत सुविधाओं के विकास की भी मांग नहीं की। वह खुद बता रहे हैं कि शराब का धंधा करने वालों की गाडिय़ां पकड़े जाने से नाराज हैं, वह यह छिपा गए कि नशे का यह धंधा उनकी पार्टनरशिप में ही चलता है।
गुस्से में आए नयनपाल रावत को अधिकारियों को अपना महत्व बताने के लिए सरकार से नाराजगी जताने का बड़ा फैसला लेना पड़ा। उन्होंने 16 जुलाई को पत्रकारों को बुलाकर अधिकारियों के नाफरमानी करने के कारण भाजपा सरकार से समर्थन वापस लेने पर विचार करने का संदेश दे दिया। तीन निर्दलीय विधायकों के भाजपा का समर्थन छोडऩे से संकट में आई सैनी सरकार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले नयनपाल के गुस्सा होने का समाचार प्रकाशित होते ही सीएम सैनी ने उन्हें तुरंत ही मिलने के लिए बुला लिया। 17 जुलाई की शाम सीएम सैनी से मिलकर रावत ने अपना दुखड़ा सुनाया। सैनी ने उन्हें हर तरह की मदद देने का आश्वासन देकर अपनी कुर्सी बचा ली।
सीएम से सौदेबाजी होने के बाद रावत ने भी सरकार को समर्थन जारी रखने का संदेश सुना दिया। हां, इतना जरूर हुआ कि जिस अवैध शराब की कीमत एक लाख रुपये से अधिक आंकी जा रही थी, उसे घटा कर महज 32 हजार 400 रुपये कर दिया गया।
नयनपाल पृथला की जनता से पहले ही विश्वासघात कर चुके हैं जब उन्होंने भाजपा को समर्थन देने की घोषणा की थी, जनता को यदि भाजपा को ही जिताना होता तो वह भाजपा प्रत्याशी सोहन लाल को वोट करती उन्हें नहीं। एक जनप्रतिनिधि होने के बावजूद शराब तस्करी में शामिल होना और अवैध शराब छुड़वाने के लिए पुलिस के आला अधिकारियों पर दबाव बनाना बताता है कि नयनपाल की आंखों का पानी मर चुका है और जनता के हित में नहीं अपना हित साधने के लिए ही सत्ता का दुरुपयोग कर रहे हैं।