फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा)। थाना तिगांव अंतर्गत मंझावली गांव में लाठियों से पीट कर मार डाले गए किसान प्रभुनाथ के हत्यारोपियों को पुलिस न केवल बचा रही है बल्कि उनके इशारे पर गांव के निर्दोष लडक़ों को जबरन पकड़ रही है। ये आरोप बृहस्पितवार को पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचे मंझावली गांव के लोगों और पीडि़त पक्ष ने लगाया। गांव वालों को पुलिस आयुक्त ने निष्पक्ष कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
मंझावली गांव,भाटी फार्म निवासी गुड्डी-प्रभुनाथ दंपति सहित उनके बेटे बेटियों पर एक सितंबर की सुबह बारह-पंद्रह लोगों ने हमला कर दिया था। हमले में गंभीर रूप से घायल प्रभुनाथ की इलाज के दौरान मौत हो गई थी जबकि गुड्डी, बेटा राजेश सिंह और दो बेटियां बुरी तरह से जख्मी हो गए थे। राजेश सिंह ने गांव के ही पूर्व सरपंच राजेश शर्मा, राकेश शर्मा सहित उनके परिवार के बारह लोगों के खिलाफ हत्या का नामजद केस दर्ज कराया था। पुलिस इस केस में अभी तक तीन नामजद आरोपियों को ही गिरफ्तार कर पाई है। सीपी ऑफिस पहुंचे गांव वालों में करणपाल यादव ने आरोप लगाया कि पुलिस मुख्य आरोपी राजेश शर्मा, राकेश शर्मा और करमबीर शर्मा को नहीं गिरफ्तार कर रही, बल्कि उनके इशारे पर गांव के निर्दोष गरीब युवकों को पकड़ रही है। पुलिस का मौजूदा व्यवहार देखने से लोगों की बात पर यकीन सा होता है। पीडि़ता ने 29 सितंबर को हुए हमले की जानकारी एसएचओ को दी थी लेकिन न तो वो मौके पर आए और न ही उन्होंने कोई निरोधात्मक कार्रवाई की थी। दरअसल, हमलावरों की योजना किसी को कत्ल करने की नहीं बल्कि इन लोगों के हाथ पैर तोडऩे की थी। इसमें मारपीट जैसी हल्की धाराओं में केस दर्ज होता और मुकदमा चलता रहता लेकिन अधिक चोट लगने से प्रभुनाथ की मौत हो गई। तफ्तीश और कार्रवाई की रफ्तार देखते हुए गांव वालों की बात सही लगती है कि ये हमला तिगांव पुलिस की मिलीभगत से हुआ था।
गांव के राम किशोर ने बताया कि घटना में उनका बेटा रामदत्त नहीं था और न ही एफआईआर में उसका नाम है, बावजूद इसके पुलिस आरोपियों के इशारे पर उनके बेटे को फंसा रही है। गांव की ही गीता ने बताया कि राकेश शर्मा के इशारे पर पुलिस उनके बेटे कल्लू को तलाश रही है, बेेटे को हाजिर कराने के लिए पुलिस ने उन्हें दो दिन तक अवैध रूप से बंधक बना कर हिरासत में रखा, इसके बाद बिना लिखापढ़ी छोड़ दिया।
दिनेश ने आरोप लगाया कि तिगांव थाने मेें बारह साल से तैनात एएसआई धर्मपाल हत्यारोपियों की खुल कर मदद कर रहा है, इसी कारण आज तक मुख्य आरोपी खुले में घूम रहे हैं और पुलिस से मिलीभगत कर निर्दोषों को फंसा रहे हैं। घटना की चश्मदीद गवाह और पीडि़ता गुड्डी ने भी पुलिस पर निर्दोषों को बेवजह परेशान करने का आरोप लगाते हुए कहा कि जिन लोगों को उन्होंने मारते हुए देखा था उनका ही नाम एफआईआर में दर्ज कराया गया है लेकिन पुलिस उन्हें नहीं पकड़ रही, अगर पुलिस किसी निर्दोष को पकड़ेगी तो वह इसका विरोध करेंगी। पुलिस आयुक्त राकेश आर्य ने प्रदर्शनकारियों को उचित कार्रवाई का आश्वासन तो दिया लेकिन एक महिला को दो दिन अवैध रूप से हिरासत में रखने वाले दोषी पुलिस कर्मियों पर कार्रवाई करने की जरूरत नहीं समझी। समझा जा सकता है कि जब पुलिस आयुक्त ही कानून और मानवाधिकार की धज्जियां उड़ाने वाले मातहतों को कुछ नहीं कह रहे तो फिर पुलिस कितनी ईमानदारी से काम करेगी।