फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) भ्रष्टाचार और सत्ता की दलाली में माहिर नगर निगम के अनेक अधिकारी-कर्मचारी कई साल से एक ही पद पर डटे हुए हैं। लंबे समय तक एक ही सीट से चिपके ये लोग लूट कमाई में कुशल हो चुके हैं। लूट कमाई की हिस्सापत्ती ऊपर तक पहुंचाने और सत्तापक्ष को खुश रखने के कारण ही महंगे लहंगे और गिफ़्ट की शौकीन निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास भी इन्हें इधर-उधर नहीं करतीं, कि क्या पता जिस नए बंदे को लगाया जाए वह अपने कार्य यानी लूट कमाई में इतनी कुशलता के साथ साथ भरोसेमंद भी होगा या नहीं।
खुद को विधायक मूलचंद का रिश्तेदार बताने वाला बल्लभगढ़ का जेई विपिन अपनी तैनाती के बाद से आज तक एक ही जगह डटा हुआ है। इसकी कमाई का ढंग भी निराला है, वार्ड में जलभराव, पेयजल, टूटी सड़क आदि की जनता शिकायत करती रहे लेकिन कोई काम नहीं किया जाता। कारण, छोटा मोटा काम कराने से कमाई नहीं होती, इसलिए समस्या को विकराल होने तक काम नहीं किया जाता। जब जलभराव या पेयजल की समस्या गंभीर होती है तो फिर मोटे टेंडर छोड़े जाते हैं, समझा जा सकता है कि ठेका भी नेताजी के चिंटू को ही दिया जाता है। जेई रविंदर एसई का इतना प्यारा हैं कि सवा दस साल में आज तक ओल्ड फरीदाबाद विधानसभा क्षेत्र के बाहर कहीं तैनाती ही नहीं हुई।
मंत्री कृष्णपाल गूजर का ‘बेटा बना भ्रष्टाचारी ओमदत्त तो इतना रसूखदार है कि निलंबन और चंडीगढ़ मुख्यालय में अटैच होने के बावजूद चंद दिनों में ही उसी पद पर बहाली पा जाता है। निगमायुक्त भी उसे हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पातीं। ओमदत्त अकेला ही मनपसंद जगह पर नहीं डटा है, अपने भ्रष्टाचारी चेले कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश को भी अपने साथ रखता है। मुकेश निगम में रहीं आईएएस वैशाली के लिए दलाली करता था, उनके जाने के बाद से ही ओमदत्त के लिए काम कर रहा है। भ्रष्ट ओमदत्त के चेलों में से ही एक नाम और है वीरू जो उसके इशारे पर ऑनलाइन टेंडर में छेडख़ानी करने से लेकर उसे ब्लॉक करने का काम करता है।
क्लर्क डेविड नागर निगम की मोटी कमाई वाली तोडफ़ोड़ शाखा में करीब छह साल से डटा हुआ है। अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी करने और फिर हफ़्ता तय करने के खेल में माहिर डेविड के बारे में बताया जाता है कि उसे सारे अतिक्रमण और अवैध कब्जे उंगलियों पर रटे हुए हैं और किससे कितना धन प्रतिमाह आता है उसे जुबानी याद है। कमाई की यह सुचारु व्यवस्था उसके हटने से बेपटरी हो सकती है, इसी कारण अधिकारी उसे नहीं हटाते। फिलहाल एक्सईएन नितिन कादियान के कार्यालय में तैनात ठेका क्लर्क सौरभ और लोकेश भी लंबे समय से इसी कार्यालय में कार्यरत है।
खास बात यह कि दोनों दारूबाज निगम कार्यालय में दो बार शराब पीते रंगेहाथ पकड़े गए और जांच के बाद एक बार तो नौकरी से बर्खास्त भी किए गए, लेकिन न तो सरकार को और न निगम को इनसे बेहतर कोई दूसरा कर्मचारी मिला। बर्खास्तगी के बावजूद इन्हें अपने दलाली के हुनर के चलते बहाल कर दिया गया। फि़लहाल ये दोनों नशेड़ी अपने आका नितिन कादियान के लिए नशे का इंतजाम कर अपनी सीटें बचाए हुए हैं। निगम अधिकारियों की मोटी कमाई वाली विज्ञापन शाखा में पांच साल से जमा नेतराम डागर मैडम से लेकर सभी अधिकारियों का चहेता है। विज्ञापन शाखा के मुखिया अतिरिक्त निगम आयुक्त रविन्द्र पाटिल के दफ्तर में नक़ली पीए प्रेम का राज होने के कारण नेतराम डागर पर विशेष आशीर्वाद है क्योकि हराम की कमाई का कुछ हिस्सा प्रेम की जेब में भी डाल दिया जाता है। सूत्रों के अनुसार अवैध विज्ञापनों से प्रतिमाह नगर निगम को एक करोड़ से अधिक की कमाई होती है जो ऊपर तक खर्च होती है। यही नहीं इस शाखा में सत्तापक्ष के नेताओं का भी बड़ा दखल है, उनके इशारे पर ही विपक्षियों के विज्ञापन हटाने का काम नेतराम डागर करता है।
इस समय नगर निगम में शहर का कूड़ा चर्चा का विषय बना हुआ है। कूड़े का चार्ज भी लंबे समय से अरुण के पास है वह अपने फर्जी डिग्री वाले आका एक्सईन पद्मभूषण के लिए कूड़े की छोटी-बड़ी गाडिय़ों से वसूली कर रहा है। रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार का अन्य अड्डा जन्म मृत्यु कार्यालय है। यहां हिना खान नाम की क्लर्क बीते चार पांच सालों से काम कर रही है। जानकारों के अनुसार इस कार्यालय में मोटी रकम लेकर फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण बनाए जाने कई मामले पकड़े जा चुके हैं, लेकिन कर्मचारियों को हटाया नहीं जाता। निगम के जानकार कहते हैं कि यहां भ्रष्ट कर्मचारी-अधिकारी और सत्तापक्ष के नेताओं का गठजोड़ है। नेता अपने चाटुकार कर्मचारी को उसके मनपसंद पद पर तैनात कराते हैं। कुर्सी के दम पर लूट कमाई करने वाले ये कर्मचारी अधिकारी को खुश करने के लिए बाकायदा हिस्सापत्ती पहुंचाते हैं। अधिकारी भी जानते हैं कि नेताजी के चेले को हटाना उनके लिए फायदे का सौदा नहीं होगा तो भागते भूत की लंगोटी की तरह उससे रुपये बटोरते हैं। दरअसल, ये कर्मचारी नगर निगम के कारकुन न होकर भाजपा विधायक, मंत्री और नेताओं के कार्यकर्ता के रूप काम कर रहे हैं, सत्ता का हाथ हो तो फिर क्या चीफ इंजीनियर, क्या सुपरिंटेंडेंट और क्या निगमायुक्त, किसी की भी हिम्मत कार्रवाई की तो होती नहीं है। ये कर्मचारी अकेले लूट कमाई करें यह भी अधिकारियों को नामंजूर होगा, ऐसे में कर्मचारी खुद कमाता है और शिष्टाचार का पालन करते हुए ईमानदारी से अधिकारी तक पैसा पहुंचा देता है। अंटी में रुपये, गिफ्ट, ज्वैलरी आदि आती रहे तो फिर अधिकारी क्यों हटाएंगे।
नगर निगम में लगातार छोटे-बड़े घोटाले खुलते चले आ रहे हैं, बावजूद इसके न तो पूर्व सीएम खट्टर ने कोई सख्त कार्रवाई की और सीएम सैनी की कार्यशैली देखकर नहीं लगता कि वह भी कुछ करेंगे। वर्षों से एक ही सीट पर जमे भ्रष्ट अधिकारी-कर्मचारी रोज-रोज नए घोटाले कर रहे हैं, अब चर्चा है कि चौराहों पर लगने वाली मूर्तियों में खूब बंदरबांट भी की गई है।