कांग्रेस विसर्जित हो रही है याअपना परिमार्जन कर रही है ?

कांग्रेस विसर्जित हो रही है याअपना परिमार्जन कर रही है ?
October 25 06:43 2025

चंचल
“परिमार्जन” को “विसर्जन” कहने और समझाने वालों को कम अक्ल कहना , खुद को धोखे में रखना होगा । सोची समझी साज़िश के तहत यह अल्फ़ाज़ पतंग की तरह उड़ाया जा रहा है ठीक उसी तरह , जैसे अपाहिज को दिव्यांग कहा जाने लगा है , और बड़े – बड़े विद्वान अपना पिछवाड़ा पीटते हुए , सहमति में खड़े हो गये । गर आपको याद होगा तो – हम बार बार इसे दुहराते जा रहे हैं क़ि ज़ालिम , सनकी , क्रूर , अत्याचारी या तानाशाह ज़िंदा क़ौमों के देश में नही पैदा होते , ये लालची , दब्बू और अनुदान भोगी समाज में उभरते हैं । कुछ दिलचस्प उदाहरण देखिए ।

भारत अपने खुद के विवाद पर खड़ा हो गया है । हँसा जाय , रोया जाय या पूरा तम्बू ही नोच कर फेंक दिया जाय ? (अति पर नही जा रहा हूँ , वेद की ऋचा है – जानाति , इच्छति अथ करोति । इछा शक्ति , ज्ञान और करने का जज़्बा हो , तो तुम अकेले , बड़े से बड़े क्रूर तानाशाह के साम्राज्य को समाप्त कर सकते हो । दूर जाने की ज़रूरत नही , जहां खड़े हो इसी को देख लो , महात्मा गांधी इसका उदाहरण है।) पतंगबाज़ी हो रही है – “कांग्रेस विसर्जित हो रही है ” । कह कौन रहे हैं ?

वो जिनके पास अपना वह इतिहास भी नही है , जिसपर ये गर्व कर सकें या ज़ोर से पढ़ भी सकें । और जो इतिहास है , वह इतना कुरूप , घृणास्पद , और दोखी है क़ि ये खुद उसे मिटाना चाहते हैं , लेकिन उसे मिटा नही पा रहे हैं , क्यों क़ि ये इतने जाहिल और अज्ञानी हैं क़ि इन्हें इतिहास मिटाना तक नही आता । चुनांचे दूसरे के इतिहास में उलझे पड़े हैं । इतिहास मिटाने का तरीक़ा और तरकीब , पूछोगे , कनफुसिया जाहिल रफूगरों से ? आइ टी सेल से ? या काँवरियों से ? इतिहास है , तलवारों तक से नही मिटता , इनसे नही मिटेगा । इनसे कहो वक्त से पूछ लें – इतिहास मिटता कैसे है ?
वक्त पलट कर चाँटा मारेगा – यह आइ पी सी की कोई ज़बरदस्त आपराधिक धारा नही है क़ि “वापस” ले लोगे , अदालत से हट जाओगे , क़ानून से बच जाओगे , लेकिन इतिहास आपके इस “वापस” को भी दर्ज कर लेगा। ख़ता लमहे करते हैं , सजा सदियाँ भुगतती है ।

आज़ादी का जश्न मनाने का समय है , ज़्यादा दिन नही हुए , अमित शाह भाजपा के सदर थे , एक फऱमान जारी कर , अपने कार्यकर्ताओं को इस काम पर लगाया की गाँव स्तर तक पता करो संघ का कोई कार्यकर्ता आज़ादी की लड़ाई में शामिल रहा ? यह एक संस्था की आंतरिक वेदना है समझ में आता है । यहाँ अमित शाह की गलती नही हैं , लेकिन पुरखों की कारस्तानी को पीढिय़ाँ भुगतती हैं । तब आपने उधार का नेता खोजना शुरू किया। शहीद भगत सिंह , कांग्रेसी कम्युनिस्ट निकल आए , भगत सिंह के दस्तावेज बाहर आए , भगत सिंह और बापू के बीच ग़लत इतिहास ठूँसनेवालो को ज़बरदस्त झटका लगा – भगत सिंह अंग्रेज़ी का निज़ाम का ही नही , उनका भी प्रबल विरोधी है, जो अंग्रेज़ी सत्ता के साथ हैं । इतिहास मिटाने चले थे , तमाचा मुह पर पड़ा ।

सुभासचंद बोस की फाइल खोलो , बिरोध में थे तब माँग थी , सरकार में आए तो फाइल ने हाफपैंत उतारना शुरू कर दिया । हरिपुर कांग्रेस में सदर चुने गये सुभास चंद्र बोस का पहला फऱमान – कोई दोहरी सदस्यता नही , कांग्रेस का कोई भी सदस्य किसी साम्प्रदायिक संगठन का न तो सदय बन सकता है , न ही उनके कार्यक्रमों में भागीदारी कर सकता है । हिंदू महा सभा और मुस्लिम लीग से सामान दूरी । फाइल खुल गयी , छोटा कार्यकर्ता , आइ टी सेल , कुपढ नेता हैरान – सुभासचंद बोस ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी को कुटाई के लिए दौड़ा लिया था – ‘बंगाल समेत देश में मज़हबी ज़हर नघोला जाय’ अगली फाइल ? पंडित नेहरु और सुभासचंद्र बोस का रिश्ता तो सहोदर से भी अभिन्न निकला । जब पंडित नेहरु जेल में थे , उनकी पत्नी कमला नेहरु स्विटीजऱलैंड अस्पताल में थी तो कमला जी की देखरेख सुभासचंद बोस ने किया है । उनकी हवाई हादसे में हुई मृत्यु के बाद पंडित नेहरु बोस की परनी और बेटी की इमदाद करते रहे । फाइल ने यह बताया।

नेहरु और बोस के रिश्ते का खुलासा एक इमारत कर रही है , जिसे तुम्हारी ज़ुबान में “बाबर की औलाद” ने बनवाया है – लाल क़िला। सुभास चंद बोस की ख्वाहिश रहा – लाल क़िला से तिरंगा फहराएँगे । खुद बोस तो न आ सके लेकिन नेता की ख्वाहिश पूरी हुयी उनके दोस्त नेहरु ने लाल क़िला से तिरंगा फहरा कर देश को संवोधित किया और भारत माता की जय बोला । दस्तावेज खुले – नेता सुभास चंद बोस की आर्मी ढ्ढहृ्र में एक ब्रिगेड का नाम गांधी ब्रिगेड है दूसरी नेहरु ब्रिगेड । मौत के सामने खड़े नेता सुभास चंद बोस की मोहब्बत और लगाव उस इतिहास का बड़ा हिस्साहै जो जंगे आज़ादी में खड़े दो अलहदा धाराओं का मिलन बिंदु का खुलासा करता है ।सशस्त्र क्रांति का अगुआ नेता सुभाष चंद बोस अहिंसा के सबसे पुजारी को वहाँ भी याद कर रहा है अपनी एक ब्रिगेड का नाम अपने राष्ट्रपिता के नाम पर खड़ा करता है और इधर बापू अहिंसा की मूल धार पर “करो या मरो” का एलान करते हैं । कैसे मिटेगा यह इतिहास ?
-कांग्रेस पार्टी विसर्जित हो रही है ! (यह सत्ता का प्रचार है )।  -नही ! कांग्रेस अपना परिमार्जन कर रही है ! (यह इतिहास का जवाब है )

  Article "tagged" as:
  Categories:
view more articles

About Article Author

Mazdoor Morcha
Mazdoor Morcha

View More Articles