गुडग़ांव (मज़दूर मोर्चा) अमर उजाला द्वारा मुख्यमंत्री नायब सैनी की चापलूसी में आयोजित संवाद कार्यक्रम के माध्यम से सैनी ने खुल कर झूठ-पर-झूठ बोला और किसी भी पत्रकार की हिम्मत उनसे सवाल करने की नहीं हुई। करते भी कैसे, जब कार्यक्रम ही चापलूसी के लिए किया गया हो तो कोई क्या बोले? यहां सैनी साहब फरमाते हैं, ‘हमारे लिए संकल्प पत्र भगवान की तरह है हर वादे को हम पूरा कर रहे।’ वास्तव में भगवान भी उनके लिए संकल्प पत्र की भांति झूठ का पिटारा ही है।
वहां किसी ने सैनी से यह नही पूछा कि तीन माह पूर्व वृद्धों एवं विधवाओं की पेंशन को 3000 से 3500 रुपए मासिक करने की जो घोषणा की थी उसका क्या हुआ? विदित है कि अपनी इसी घोषणा को दो माह बाद संशोधित करते हुए इसे 3500 से 3200 कर दिया और अंत में अब मिल रहे हैं केवल वही 3000 मासिक। सैनी साहब दावा करते हैं कि उनके प्रत्येक सरकारी अस्पताल व मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस के पांच पैसे भी नहीं लगते। पांच पैसे तो तब लगेंगे न, जब कहीं डायलिसिस होता हो। $फरीदाबाद के बीके अस्पताल की बात तो छोडि़ए, छांयसा स्थित मेडिकल कॉलेज तक में ऐसी कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। राज्य भर में यदि किसी सरकारी अस्पताल में यह उपलब्ध भी है तो मुफ्त का तो सवाल ही पैदा नहीं होता। जहां मामूली मरहम-पट्टी तक मुफ्त नहीं होती हो वहां भला डायलिसिस कैसे मुफ्त हो सकता है?
लाडो लक्ष्मी नामक अपनी जिस योजना के लिए सैनी ने पांच हजार करोड़ रुपए के बजट की बात कही है, उसकी सच्चाई भी सामने आने में बहुत समय नहीं लगेगा। इसकी सच्चाई भी उक्त वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन से अलग होने वाली नहीं है। इतना ही नहीं इस योजना के नाम पर जो पैसा बंटेगा वह भी राजनेताओं के लगुओं-भगुओं की जेब में जाने वाला है। रही बात 24 फसलों की एमएसपी पर खरीद की तो यह एक ऐसा खुला झूठ है कि जैसे दिन दोपहर को कोई ये कहे कि रात के 12 बजे हैं। सैनी इतना बड़ा झूठ बोल कर आखिर किसको बेवकूफ बनाना चाह रहे हैं? इस सच्चाई को हर वह किसान मंडिका आरती पल्लेदार तथा सरकारी खरीद से जुड़ा हर लुटेरा कर्मचारी यह भली-भांति जानता है कि एमएसपी के नाम पर गरीब किसानों के साथ कैसी लूट-मार हो रही है?
बाढ़ अथवा ओलावृष्टि आदि से नष्ट होने वाली फसलों के मुआवजे के रूप में सैनी ने किसानों को जो 15 हजार 500 करोड़ रुपए बांटने की बात कही है वह सरासर झूठ है। यदि कोई वास्तविक पत्रकार उस मजमे में होता तो वह उनसे पूछ सकता था कि इस मुआवजे का पूरा विवरण प्रकाशित कराएं। ‘मज़दूर मोर्चा’ आज भी उनसे मांग करता है कि इस मुआवजे का पूरा विवरण प्रकाशित करें। सैनी की यह बात बिल्कुल सच है कि वे एक साधारण आदमी हैं और संघ एवं मोदी की कृपा से मुख्यमंत्री बन बैठे हैं। उनकी केवल एक ही योग्यता है कि वे अपने आकाओं के इशारों पर नाचने में कोई कोताही नहीं करते। वास्तव में ही वे उस खिलौने की भांति हैं जिसमें उनके आका चाभी भर देते हैं और वह नाचने व बोलने लगता है। अपराध व अपराधियों के बारे में राज्य को मुक्त कराने का जो दावा वे कर रहे हैं वह इतना ही खोखला है जितने वे खुद हैं। राज्य भर के हर इलाके में बढ़ते अपराध व अपराधियों के खौफ को जिस तरह से जनता झेल रही है वह किसी से छिपा नहीं है। अधिकांश पुलिस के थाने-चौकियां लूट कमाई के अड्डे बन चुके हैं। इनमे तैनाती पाने के लिए पुलिसकर्मी राजनेताओं के साथ बाकायदा हिस्सा-पत्ती करते हैं।
सैनी समेत तमाम संघी भाजपाई नेताओं की प्रोपेगेंडे को लेकर सोच यह है कि जितना मर्जी झूठ बोल सको बोला करो। उनके प्रचार-साधनों के द्वारा झूठ जिस तेजी से फैलता है उसका खंडन, उस तेजी के हजारवें हिस्से के बराबर भी नहीं होता। कहावत है कि सच जब तक अपने जूते पहनता है तब तक तो झूठ पूरी दुनियां का चक्कर लगा कर आ जाता है। बस यही इन झूठे नेताओं का मुख्य आधार है।
सोशल मीडिया द्वारा हो रही पुलिसिंग सैनी भले ही पालतू तोते की भांति अपराध नियंत्रण का राग अलापते रहें, परन्तु असली कीर्तन तो आज कल हरियाणा के डीजीपी ओम प्रकाश सिंह कर रहे हैं। उनके बस का और तो कोई काम है नहीं, वे महज सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिसिंग करते नजर आ रहे हैं। लगता है उन्हें इस बात से कोई लेना-देना नहंी कि उनके थाने-चौकियों में क्या हो रहा है, पुलिसकर्मी आम जनता की कैसे ऐसी-तैसी कर रहे हैं? उनकी रुचि एक यूट्यूबर की भांति केवल इस बात पर रहती है कि कितने लाइक और कितने शेयर मिले। 31 दिसम्बर को रिटायर होने वाले सिंह, चला-चली की इस बेला में, सोशल मीडिया के द्वारा ही जनता पर अपनी छाप छोडऩा चाहते हैं।