मज़दूर मोर्चा ब्यूरो 1960 के दशक में करनाल व हिसार में हवाई पट्टियां बनाई गई थी। इन्हें फ्लाइंग क्लब का नाम दिया गया था। प्रशिक्षुओं से प्रति फ्लाइंग घंटे के हिसाब से फीस वसूली जाती थी। उस वक्त दोनों ही रनवे (हवाई पट्टियां) कच्चे होते थे। इन पर छोटे यानी दो से दस सीट वाले विमान आसानी से आ जा सकते थे।
वर्ष 71-72 में सरकार ने हिसार के रनवे को कुछ ठीक-ठाक करके 30-40 सीटों वाले हवाई जहाजों के आवागमन का जुगाड़ बना कर व्यापारिक सेवा शुरू करा दी थी। यह सेवा दिल्ली से हिसार, पटियाला होते हुए चंडीगढ़ तक चलती थी। पूर्णतया अव्यहारिक होने के चलते यह सेवा साल भर भी नहीं चल पाई। उसी तरह का अव्यवहारिक प्रयास अब भाजपाई सैनी सरकार करने जा रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर टर्मिनल बिल्डिंग खड़ी करने के लिए अच्छी-खासी रकम 5200 का प्रावधान कर दिया गया है। मीडिया से छन कर आ रही जानकारी के अनुसार हवाई अड्डे का पहला चरण जिसमें घरेलू टर्मिनल और बुनियादी ढांचा शामिल है, 2018 में बन कर तैयार हुआ था लेकिन नियमित उड़ानेंं शुरू नहीं हो पाई थीं। अब प्रधानमंत्री मोदी दूसरे चरण का उद्घाटन करने जा रहे हैं जिसमें फिलहाल एयर ट्रैफिक कंट्रोल टावर, दस हजार फीट लंबी हवाई पट्टी, मेेंटिनेंस, रखरखाव और ओवरहॉल हैंगर शामिल हैं।
बताया जा रहा है कि उद्घाटन के बाद शुरूआती तौर पर हिसार से अयोध्या स्थित राममन्दिर तक की सेवा शुरू करने की घोषणा की गई है। किसी को भी समझने में कठिनाई नहीं होनी चाहिए कि वायु मार्ग से अयोध्या जाने वाली जनता अधिक से अधिक एक माह में निपट लेगी। क्योंकि अधिकांश भक्त तो 22 जनवरी 2024 को इसकी प्राण प्रतिष्ठा के तुरन्त बाद ही मत्था टेक चुके हैं। रही बात हिसार से दिल्ली जाने वालों की तो वायु मार्ग के बजाय सड़क मार्ग आज ज्यादा सुविधाजनक हो चुका है। संदर्भवश जिस धूमधाम से अयोध्या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा चालू किया गया था वहां अब कौवे कांव-कांव कर रहे हैं, वहां जिस हवाई यातायात का ढिंढोरा पीटा गया था वह पूरी तरह से दिवास्वप्र साबित हुआ है। जानकार बताते हैं कि सरकार को भी अच्छी तरह मालूम है कि सिर्फ ङ्क्षढढोरा ही है, यही कारण है कि अभी उड़ान सेवाएं शुरू नहीं हुई हैं लेकिन अधिकारियों ने कहना शुरू कर दिया है कि 70 सीटों वाले विमान उड़ाए जाएंगे और जरूरत पड़ी तो 40 सीटों वाले भी चलाए जाएंगे, यानी हवाई अड्डा चालू होने से पहले ही यात्रियों का टोटा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
हिसार शहर से हवाई अड्डे पहुंचना और फिर दिल्ली हवाई अड्डे से दिल्ली शहर पहुंचने में जितना समय लगता है इतने समय में तो बजरिया कार पहुंचना कहीं ज्यादा सुविधाजनक होगा। कुल मिला कर हरियाणा सरकार का यह कृत्य केवल जनता को लुभाने के लिए किसी नौटंकी से कम नहीं है। जितना रुपया इस नौटंकी पर बर्बाद किया जाएगा उतने में जनता को कुछ न कुछ बेहतर स्वास्थ्य अथवा शिक्षण सेवाएं दी जातीं तो जनता का कुछ भला हो सकता था। चर्चा इस बात की भी है कि हवाई अड्डे के नाम पर जमीनों के भाव बढऩे का अनुमान लगाते हुए कई राजनेताओं ने अच्छी-खासी जमीनें पहले से ही खरीद ली थी, उन्हें जरूर इस सौदे से भारी मुना$फा हो सकता है।