बल्लबगढ़ (मज़दूर मोर्चा) मोहना रोड स्थित एक ढाबे से बुधवार रात खाना लेकर लौट रहे 23 वर्षीय प्रिंस शर्मा की जलभराव होने के कारण सडक़ किनारे खुले हुए नाले में डूबने से मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने 112 पर फोन कर पुलिस को घटना की सूचना दी लेकिन पुलिस युवक को बचाने नहीं बल्कि घटना की जानकारी लेनेे ही आई थी। स्थानीय लोग तो डंडे और बांस आदि नाले में डाल कर प्रिंस की तलाश में जुटे रहे लेकिन मौके पर पहुंचे पुलिसकर्मियों ने दमकल या एसडीएआरएफ की टीम को बुलाना उचित नहीं समझा, मानो वह युवक के मरने का इंतजार कर रहे थे। प्रिंस को डूबे दस घंटे से ज्यादा बीतने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और जाम लगाने की तैयारी शुरू की। जाम लगाने की बात सुनते ही एसडीएम त्रिलोकचंद से लेकर पुलिस सब सक्रिय हो गए। सत्ता की मलाई चाटने को फडफ़ड़ा रहे नेता टिपरचंद भी पहुंचे। इसके बाद एसडीआरएफ टीम बुलाई गई। टीम ने प्रिंस को डूबने की जगह से करीब सौ मीटर दूरी पर तलाश लिया।
परिजनों के अनुसार प्रिंस माता-पिता का इकलौता बेटा था। स्थानीय लोगों में युवक की मौत को लेकर गुस्सा है। दरअसल, प्रिंस की मौत कमीशनखोर मंत्री, भ्रष्ट नगर निगम अधिकारियों और खाऊ ठेकेदार की मिलीभगत से अधूरा बनाकर छोड़े गए नाले में डूबने हुई है। चर्चा है कि नगर निगम के दो सौ करोड़ घोटाले के आरोपियों में एक सतबीरा ठेकेदार से चालीस लाख की लग्जरी कार गिफ़़्ट लेने वाले मंत्री मूलचंद शर्मा ने अपने चहेते गुडग़ांव के प्रदीप की इन्नोसेप्ट कंपनी को यह नाला बनाने का ठेका दिलावाया था। निवर्तमान पार्षद दीपक चौधरी नाला निर्माण में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हैं। उनके अनुसार तीन साल पहले सीएम खट्टर ने इस नाले को पक्का बनाने की घोषणा की थी। दस करोड़ रुपये के मूल टेंडर में यह नाला कवर्ड बनाया जाना था। उनका आरोप है कि ठेकेदार आधा अधूरा काम कर पेमेंट लेकर चलता बना। पूरा नाला ढंकने के बजाय केवल मुख्य गलियों के सामने ही स्लैब डाली गई बाकी जगह उसे खुला छोड़ दिया गया।
ज़ाहिर है कि ठेकेदार को अधूरे काम का भुगतान ऐसे नहीं हुआ होगा, ठेका दिलाने वाले मंत्री जी, निगम के भ्रष्ट अधिकारियों तक की मोटी हिस्सेइदारी होगी, और ठेकेदार को भी अपने लिए मोटी रकम बचानी थी, तो कटौती नाले को ढंकने में की गई। तकनीकी जानकारों के अनुसार नाला कवर करने में पूरे नाले का करीब तीस प्रतिशत खर्च होता, यानी दस करोड़ के नाले में करीब तीन करोड़ का तो सीधा खेल हो गया, इसके अलावा कमीशन आदि की जो बंदरबांट हुई होगी वो अलग। स्थानीय लोगों के अनुसार इस नाले में आए दिन गायें-बछड़े आदि गिर कर मरते और घायल होते रहते हैं, इसे ढंकने या रेलिंग लगवाने की मांग लंबे समय से की जा रही है लेकिन मंत्री मूलचंद शर्मा से लेकर निगम अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंगती।
एक युवक की जान लेने के बाद भी निगम के निर्लज्ज और भ्रष्ट एक्सईएन ओपी कर्दम गलती दुरुस्त करने के बजाय जनता को ही दोषी ठहराने की कोशिश में झूठ पर झूठ बोल रहा है। उसने दावा किया कि ठेकेदार ने नाले की मुंडेर सडक़ से डेढ़ फीट ऊंचाई पर बनाई है, दूसरे छोर पर रहने वालों ने मिट्टी डाल कर इस मुंडेर को पाट दिया है। एक्सईएन होने के बावजूद शायद ओपी कर्दम ने यह नाला देखा नहीं है नाले की मुंडेर कहीं भी सडक़ से ऊपर नजर नहीं आती है। उसके झूठ का खुलासा नगर निगम के चीफ इंजीनियर और उसके बड़े भाई बीके कर्दम ने यह कहकर कर दिया कि नाले पर रेलिंग लगवाई जाएगी। अगर नाले की मुुंडेर इतनी ऊंची है तो फिर रेलिंग लगाने की क्या जरूरत है या फिर रेलिंग के नाम पर एक बार फिर कमीशन और लूट कमाई के मौके तलाशे जा रहे हैं।
एसडीएम त्रिलोकचंद ने कहा कि इस घटना मेें किसी व्यक्ति विशेष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। त्रिलोकचंद जी ये जो आपके प्रशासन ने मरने के लिए नाला खुला छोड़ रखा है, इसे ढंकने या सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी किसी है।
आए दिन होने वाली इस तरह की मौतों को बचाने के उपाय तो हैं अगर हूकूमत चाहे तो। हुकूमत ये घोषित कर दे कि इस तरह की दुर्घटनाओं के लिए जिम्मेदार नगर निगम आयुक्त या एफएमडीए सीईओ या हूडा एडमिनिस्ट्रेटर को सीधे हवालात में भेज दिया जाएगा और उसके खिलाफ मुकदमा कायम किया जाएगा तो ये कांड रुक सकते हैं। अगर निगमायुक्त या चेयरमैन या एडिमिनिस्ट्रेटर को जेल जाना पड़े तो फिर ठेके मूलचंदों के हिसाब से नहीं दिए जाएंगे, भुगतान मूलचंदों के कहने पर नहीं किया जाएगा, बंदरबांट भी नेताओं के इशारे पर नहीं होगी। ऐसे हादसे में यदि एक अधिकारी भी अंदर कर दिया जाए तो सारी व्यवस्था दुरुस्त होने में देर नहीं लगेगी। अधिकारी केवल ढंग के ठेकेदार को ही काम देगा भुगतान भी तब ही करेगा जब ठेकेदार पूरा कर देगा।