सीएम सैनी ने माना कि 11 साल में भाजपा ने भट्टा बैठाया गुडग़ांव (मज़दूर मोर्चा) खट्टर-सैनी के 11 साल के कथित सुशासन वाले राज में गुडग़ांव आवारा पशुओं की सैरगाह बन चुका है तो जर्जर सड़कें, भयंकर जलभराव, कूड़े के पहाड़, खराब विद्युत आपूर्ति के कारण जनता बेहाल हो चुकी है। यह हम नहीं कह रहे खुद सीएम खट्टर ने माना कि गुडग़ांव की हालत खस्ता है, इसीलिए उन्होंने अपने मुख्य प्रधान सचिव भ्रष्ट राजेश खुल्लर को शहर का आमूल-चूल परिवर्तन करने का ठेका दिया है। हालांकि, संघी-भाजपाइयों की कथनी-करनी को बारीकी से समझने वालों का कहना है कि बदलने वाला कुछ नहीं है, खुल्लर केवल इसलिए भेजे गए हैं कि बड़े बड़े बजट वाली योजनाएं बनाई जाएं ताकि लूट कमाई ज्यादा हो सके।
कांग्रेस के कथित भ्रष्टाचारी राज के खिलाफ 2014 में सत्ता में आई भाजपा ने संघी चेहरे मनोहर लाल खट्टर को सीएम बनाया। खट्टर जनता को बेवकूफ बनाने के लिए भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस का डमरू बजाते रहे और उनके आखों के सामने गुरुग्राम नगर निगम में 180 करोड़ का विज्ञापन घोटाला हो गया, उनसे शिकायत भी की गई लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई। सड़क, नाला, श्मशान घाट, टाइल्स बिछाने के नाम पर बड़े पैमाने पर कमीशनखोरी हुई। उनके ही कार्यकाल में हुए पांच करोड़ के घोटाले में नगर निगम के 21 कर्मचारी और एक ठेकेदार दोषी पाये गया, लेकिन न खट्टर ने कोई कार्रवाई न ही सैनी ने। करते भी क्यों यही तो वो होनहार अधिकारी और ठेकेदार हैं जो बचने के लिए और भी मोटे घोटाले कर भ्रष्ट आला अफसरों के जरिए विधायक-मंत्री की मोटी कमाई का इंतजाम करते हैं।
विकास के नाम पर जब धनराशि की बंदरबांट हुई तो शहर साल दर साल बदतर होना ही था। इस बरसात में शहर की जर्जर सड़कें, जल निकासी, चोक सीवर लाइनें, जर्जर बिजली आपूर्ति के कारण जगह जगह करंट उतरने की घटनाएं, सड़कों पर पसरे आवारा पशुओं सहित अनेकों नागरिक समस्याओं ने भाजपा सरकार के पिछले 11 वर्षों में कराए गए विकास के नाम पर हुई खुली लूट उजागर कर दी है। अब नए मुख्यमंत्री सैनी अपने पूर्ववर्ती खट्टर की तरह गुडग़ांव के विकास का डमरू बजाने में लग गए हैं। यह डमरू उन्होंने अपने विश्वासपात्र भ्रष्टाचार में माहिर, प्रशासनिक गलियारों में धूर्त शिरोमणि से कुख्यात रिटायर्ड आईएएस राजेश खुल्लर को सौंपा है।
ये वही खुल्लर है जिन्होंने फरीदाबाद निगमायुक्त रहते हुए नगर निगम में भ्रष्टाचार और लूट कमाई के नए आयाम स्थापित किए थे। उन्होंने ही निगमायुक्त रहते हुए यहां अयोग्य लोगों को नौकरी में लगाया। चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने के लिए नियम-कायदों की खुलेआम धज्जियां उड़ाईं और पार्कों में झूले, कॅनोपी, लोहे की बेंच लगाने और पेड़-पौधों के रखरखाव आदि का काम मनचाहे दाम पर मनचाहे ठेकेदार को बांटा। ठेकेदारों के इतने चहेते हैं कि उनके यहां से ऊंचे पद पर चले जाने के बावजूद ठेकेदार भुगतान के लिए उनसे फोन करवाते। बताया जा रहा है कि सतबीरा जैसे ठेकदारों के लिए वह आज भी किसी को फोन करने को तैयार रहते हैं।
सरकार से मोटा वेतन और सरकारी खर्चे पर ऐशो आराम की जिंदगी गुजारने वाले खुल्लर ने भूमाफिया से मिलीभगत कर नगर निगम की मालिकाना वाली करोड़ों रुपये कीमत की जमीन के वारे न्यारे करवा दिए। समझा जा सकता है कि उन्होंने यह मेहरबानी मुफ्त में नहीं की होगी। इस बेशकीमती ज़मीन को बचाने और वापस पाने के लिए एडीए ब्रांच ने बड़ा वकील करने की अनुशंसा की थी, लेकिन खुल्लर ने अवैध कब्जाधारकों को फायदा पहुंचाने के लिए बड़ा वकील करने से ही मना कर दिया था। एडीए की रिपोर्ट में आज भी दर्ज है कि निगमायुक्त खुल्लर द्वारा बड़ा वकील नहीं किए जाने के आदेश के कारण, यह मामला केोर्ट से वापस लिया गया है।
सीएम खट्टर के प्रधान सचिव रहते हुए खुल्लर ठेकेदारों का भुगतान कराने के लिए निगम में फोन कर दबाव भी बनाते थे। अपने प्रिय ठेकेदार राजपाल को मंदिर और धामिैक स्थलों के सामने सोलर लाइट लगाने का ठेका दिया था। राजपाल ने 32 लाख के काम का 56 लाख रुपये का बिल बनाया तो उसका भुगतान रोक दिया गया। जून 2024 में खुल्लर ने निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास को फोन कर राजपाल का भुगतान तुरंत करने का आदेश दिया था, उन्होंने आदेश का पालन करते हुए फौरन भुगतान करा भी दिया। मार्च 2024 में भी खुल्लर ने तत्कालीन निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास को फोन कर प्रॉपर्टी आईडी के नाम पर फर्जीवाड़ा करने वाली सिंप्लेक्स सोल्यूशंस कंपनी का रोका गया एक करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान जारी करा दिया था। नगर निगम के चर्चित दो सौ करोड़ के घोटाले के आरोपियों में एक ठेकेदार सतबीरा भी खुल्लर का करीबी है। निगम सूत्रों के अनुसार सतबीरा को बिना काम भुगतान करने के लिए भी खुल्लर निगम में फोन करते थे।
खट्टर राज में खुल्लर ने पूरे राज्य में हर महकमे में लूट कमाई के चैनल विकसित कर लिए थे। जानकार बताते हैं कि निगम के दो सौ करोड़ के घोटाले में आरोपियों को बचाने के लिए उन्होंने विजिलेंस जांच भी प्रभावित करा दी। उनके इन्ही गुणों के कारण सैनी ने उन्हें न केवल अपना मुख्य प्रधान सचिव बनाया बल्कि कैबिनेट मंत्री का दर्जा भी दे दिया था, जो काफी विरोध होने के कारण उन्हें वापस लेना पड़ा था। सैनी ने खुल्लर को गुडग़ांव नगर निगम भेजा है। छह दिन तक जन संपर्क और जमीनी देखरेख का नाटक करने के बाद खुल्लर ने उन्हीं समस्याओं के बारे में बताया जो बीते ग्यारह साल में भयावह हो चुकी हैं। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक की नौटंकी कर बिजली, पानी, सड़़क, सीवर, आवारा पशु, पेयजल, जल निकासी आदि दुरुस्त कराने का फरमान सुनाया है।
जाहिर है कि मुख्य प्रधान सचिव कह रहा है तो अधिकारी छोटे काम के भी बड़े बड़े बजट बनाएंगे और बड़ी लूट का खेल होगा। जिस तरह बीते ग्यारह वर्षों में खट्टर सरकार गुडग़ांव में सड़क, नाली, सीवर, पेयजल, जल निकासी आदि सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपयों का बंदरबांट करती रही है, खुल्लर और गुडग़ांव नगर निगम के उसके चेले चपाटे भी यही सब करने वाले हैं, यकीन न हो तो अगली बारिश में मिलेनियम सिटी के विकास पर खर्च किए जा रहे मिलियनों रुपयों का हाल देख लेना।