फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) घोषणावीर पूर्व सीएम खट्टर ने 2018 में गांव बुखारपुर में शानदार स्टेडियम बनाने की हवा-हवाई घोषणा की थी। इस स्टेडियम के मुद्दे को भाजपा ने विधानसभा चुनाव में भी खूब भुनाया था। चुनाव में भाजपा के मूलचंद की जीत हुई और बुखारपुर स्टेडियम का बुखार भी उतर गया। गाहे-बगाहे स्थानीय जनता ने स्टेडियम का सवाल उठाया तो उसे कभी यह बता कर संतुष्ट कर दिया गया कि सरकार ने धनराशि जारी कर दी है तो कभी बताया जाता कि लोक निर्माण विभाग अन्य प्रोजेक्टों के कारण स्टेडियम निर्माण के लिए समय नहीं निकाल पा रहा है। अब विधानसभा चुनाव फिर से सिर पर हैं, आचार संहिता लागू होने के कारण मंत्री मूलचंद तो खुद कोई घोषणा नहीं कर सकते तो जिला खेल अधिकारी देवेंद्र सिंह गुलिया को आगे किया गया है।
भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार बुखारपुर स्टेडियम छह साल में भी नहीं बन पाने के पीछे सरकार की मंशा न होना ही प्रमुख है। पूर्व सीएम खट्टर ने बल्लभगढ़ की सभा में बुखारपुर स्टेडियम बनवाने की घोषणा तो कर दी लेकिन जब पीडब्ल्यूडी ने इसके लिए चार करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार कर सरकार को भेजा तब ही इसे ठंडे बस्ते में सरका दिया गया था। दरअसल, खट्टर सरकार केवल पचास लाख रुपये में ही चार सौ मीटर एथलेटिक ट्रैक, कबड्डी मैदान, वॉलीबाल कोर्ट, बाउंड्रीवाल, मल्टीपरपज रूम आदि बनवाना चाहती थी। इसके लिए खेल निदेशालय से लोक निर्माण विभाग को पचास लाख रुपये का भुगतान भी कराया गया। लेकिन लोनिवि के समझदार अधिकारियों ने पचास लाख रुपये में पूरा काम नहीं किए जाने की बात कह हाथ खड़े कर दिए थे।
काम तो कराना था नहीं सिर्फ दिखावा करना था तो जनता को धोखा देने के लिए पीडब्ल्यूडी अधिकारियों पर दबाव डाला गया, और बताया गया कि सरकार के आदेश पर पीडब्ल्यूडी काम करने को तैयार हो गया। लेकिन मामला रहा वही ढाक के तीन पात, न सरकार ने पैसा जारी किया और न ही पीडब्ल्यूडी ने काम किया। जब जनता स्टेडियम की आवाज उठाती तो विधायक से लेकर मंत्री तक बताते कि पीडब्ल्यूडी के पास कई प्रोजेक्ट हैं, इसलिए स्टेडियम के लिए समय नहीं मिल पा रहा है, पहली फुर्सत मिलते ही स्टेडियम का निर्माण शुरू करवा दिया जाएगा। छह साल में पीडब्ल्यूडी ने सैकड़ों प्रोजेक्ट बना डाले लेकिन स्टेडियम तो बनना ही नहीं था।
अब विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है तो एक बार फिर बुखारपुर के स्टेडियम का नाटक किया जा रहा है। अब बताया जा रहा है कि यह काम लोक निर्माण विभाग से लेकर हरियाणा पुलिस हाउसिंग कॉर्पोरेशन को दिया गया है। खास बात ये है कि कॉर्पाेरेशन ने खट्टर की घोषणा में कुछ बदलाव करते हुए स्टेडियम की ड्राइंग में बास्केट बॉल व हैंडबॉल कोर्ट, खो-खो व फुटबॉल मैदान को भी शामिल किया है। इसके साथ ही निर्माण लागत चार करोड़ से बढ़कर सात करोड़ रुपये रखी गई है। सवाल है कि जो सरकार छह साल में चार करोड़ रुपये खर्च नहीं कर सकी वो सात करोड़ कैसे खर्च करेगी। ज़ाहिर है कि ये प्रोजेक्ट का बुखार भी चुनाव तक ही चढ़ा रहेगा, चुनाव खत्म होते ही उतर जाएगा। रही जनता की बात तो जिस तरह पिछले छह साल से टूटे फूटे मैदान में खेल कूद कर रही है आगे भी वहीं खेलती रहेगी।