फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) पत्तलपाड़ मीडिया की प्रोपगेंडा लहर पर सवार होकर सत्तारूढ़ हुई भाजपा के मंत्री राव नरबीर ने उसी को औक़ात दिखा दी। बीते मंगलवार को सेक्टर 12 में मंत्री राव नरबीर सिंह की अध्यक्षता में ग्रीवांस कमेटी की बैठक का पाखंड रखा गया था। हमेशा की तरह पत्रकारों को बैठक की कवरेज करने का निमंत्रण प्रशासन द्वारा भेजा गया था। तय समय पर मीडिया, गोदी मीडिया और पत्तलपाड़ बैठक में पहुंचे, कुछ अंदर बैठ गए और कुछ अंदर जाने की तैयारी कर रहे थे। लेकिन ये क्या कुछ पुलिस वाले आए और कवरेज करने से रोकते हुए बाहर जाने को कहा। कुछ ने विरोध किया लेकिन पुलिस वालों और प्रशासन ने सख्ती से उन्हें बाहर खदेड़ दिया। बेचारे पत्तलपाड़ बाहर निकल कर बहिष्कार की धमकी देते रहे लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। दरअसल, भाजपाई राव नरबीर और सरकार को अच्छी तरह से मालूम है कि सरकारी टुकड़ों पर पलने वाली गोदी मीडिया करेगी वही जो हम चाहेंगे। हुआ भी वही थोड़ी देर शोर शराबे के बाद सब शांत हो गए।
दरअसल, राव नरबीर को जनवरी में हुई ग्रीवांस कमेटी की बैठक का कवरेज याद आ गया था। पुलिस आयुक्त के बैठक में अनुपस्थित होने पर उन्होंने नाराजगी जताई थी लेकिन वह आला पुलिस अधिकारी का कुछ बिगाड़ नहीं पाए थे। इस बेइज्ज़़ती से बचने के लिए उन्होंने इस बार मीडिया को बाहर कर दिया। वैसे उन्होंने कुछ नया नहीं किया, संघ-भाजपा हमेशा सच्ची पत्रकारिता से डरते रहे हैं और ऐसे पत्रकारों से दूरी बनाए रखते हैं। लेकिन राव नरबीर ने इस बार तो तलुए चाटने वाले अपने पालतुओं को भी बेइज्ज़त कर निकलवा दिया।
देखा जाए तो ग्रीवांस कमेटी की बैठक का पाखंड इसलिए किया जाता है कि मीडिया दिखाए कि सरकार आम जनता के हित में कितना काम कर रही है। पाखंड इसलिए है क्योंकि इसमें असली और गंभीर किस्म की शिकायतों को तो रखा ही नहीं जाता। दरअसल होता यह है कि उपायुक्त के पास आने वाली बेशुमार शिकायतों में से कोई दस-पंद्रह शिकायतें चुन लेते हैं, जिनका समाधान करना जिला प्रशासन को ही होता है लेकिन बैठक में उनका निवारण मंत्री से करवाया जाता है। आठ दस का निवारण कराया जाता है बाकी पेंडिंग कर दी जाती हैं।
बैठक के नाम पर पूरे दिन मंत्री की आवभगत में पूरा प्रशासनिक अमला झोंक दिया जाता है और आला अधिकारी सारे जरूरी काम छोड़ कर मंत्री जी के साथ बैठक में शामिल होते हैं। शिकायतें कितनी होती हैं दस-पंद्रह, अरे इससे ज्यादा शिकायतें तो प्रत्येक अधिकारी अपने कार्यालय में बैठकर रोज सुनता है और कार्रवाई करता है। इससे भी अहम बात जो दस-पंद्रह शिकायतें होती हैं वह भी प्रशासन खुद अपनी सहूलियत के हिसाब से चुनता है, बीती दस-बारह ग्रीवासं कमेटियों की बैठक के अनुभव से दावे के साथ कहा जा सकता है कि जो शिकायतकर्ता होते हैं वह भी पार्टी से जुड़े होते हैं या किसी राजनेता की सिफारिश पर उनकी शिकायत चुन कर रखी जाती है। नागरिक जिस बैठक को सरकार द्वारा जनहित में की जाने वाली बैठक समझता है दरअसल वह मैच तो पहले ही फिक्स हो चुका होता है। बस मंत्री जी का पाखंड हो जाता है और मीडिया में वाह-वाही छप जाती है।
Rajiv Jaitley
राव नरबीर ने बस इतनी सफाई दी कि उनके यहां ग्रीवांस कमेटी की बैठक में मीडिया को नहीं बुलाया जाता इसलिए उन्होंने प्रशासन को मना किया था। समझने वाली बात है कि ग्रीवांस कमेटी जैसी सार्वजनिक बैठक, जिसके बारे में अच्छी तरह पता है कि केवल बड़ाई ही छपनी है, उस का कवरेज किए जाने से सरकार और उसके मंत्री बच रहे हैं तो सच्ची पत्रकारिता उनको कितनी अखरती होगी। इधर, बाहर निकाले जाने से आहत पत्तलपाड़ों-गोदी मीडिया ने बहिष्कार और करवेज की बायकाट जैसे क्रांतिकारी उद्गार तो प्रकट किए लेकिन उनके आकाओं ने न केवल समाचार का प्रकाशन किया बल्कि मीडिया के साथ हुए अन्याय को भी हजम कर गए। बुधवार को भाजपा प्रवक्ता राजीव जेटली ने सेक्टर 12 स्थित सूचना कार्यालय में मीडिया को बुला कर चाय पिलाई, चाय पीते ही सारे अपनी बेइज्जती भुलाकर एक बार फिर सरकार की चाटुकारिता में लग गए।