पलवल के मोर्चे पर कोई पहुंचा रहा खाना, तो कोई पहुंचा रहा कंबल
किसान आंदोलन धार्मिक यज्ञ से भी बड़ा यज्ञ है: पद्म सिंह, गांव किठवाड़ी
मजदूर मोर्चा ब्यूरो
फरीदाबाद: किसानों का आंदोलन अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है। पलवल के पास राष्ट्रीय राजमार्ग पर बैठे किसानों का समर्थन करने के लिए जिस तरह गांवों के आम लोग, एनजीओ वाले पलवल पहुंच कर समर्थन कर रहे हैं, खाने और कंबल से मदद कर रहे हैं, वह अप्रत्याशित है। तेवतिया पाल के बाद भुडेर पाल से जुड़े ग्रामीण सोमवार को भारी तादाद में अपने ट्रैक्टरों के साथ पहुंचे। रविवार को यहां पर तेवतिया पाल के किसानों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर पूर्व मंत्री करण सिंह दलाल और रघुवीर सिंह तेवतिया पहुंचे थे। मजदूर मोर्चा टीम सोमवार (28 दिसम्बर) को पलवल में थी। यह टीम वहां कुछ घटनाक्रमों की खुद गवाह बनी। पलवल में बैठे ज्यादातर किसान मध्य प्रदेश, पंजाब और हरियाणा के कई इलाकों से हैं।
किठवाड़ी से आया खाना
किठवाड़ी में 28 दिसम्बर को पंचायत की तरफ से यज्ञ आयोजित किया गया था। इसमें भंडारा भी था। गांव वालों ने तय किया कि भंडारा न सिर्फ किठवाड़ी में चलेगा बल्कि पलवल में नैशनल हाईवे पर बैठे किसानों के लिए यह भंडारा भेजा जाएगा। गांव से ट्रैक्टर ट्राली पर कई क्विंटल पूड़ी, सब्जी और खीर लेकर आए पदम सिंह ने बताया कि यज्ञ तो हमने गांव में किया लेकिन पलवल में बैठे किसान दरअसल असली यज्ञ कर रहे हैं। किसानों का आंदोलन धार्मिक यज्ञ से भी बड़ा यज्ञ है। इसलिए हमारे गांव ने किसान भाइयों के लिए यहां भी भंडारा भेजने का फैसला किया और हम लोग अपनी ट्रैक्टर ट्रालियों से भोजन लेकर यहां आ गए।
मजदूर मोर्चा से जुड़े राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि गांवों के लोग जब किसान आंदोलन को धर्म से भी बड़ा यज्ञ बताने लगें तो समझिए कि यह आंदोलन अब महज किसानों का आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि यह जन आंदोलन बन चुका है। दिल्ली के सभी कोनों पर बैठे किसानों के पास खुद के संसाधनों की कमी नहीं है। हर जगह रोटी बनाने, आटा गूंथने, आलू छिलने, सब्जी काटने की मशीनें लगी हुई हैं। लोग खुद वॉलंटियर बनकर सेवा कर रहे हैं। उनके पास खुद का राशन है, उन्हें बाहर से खाने की दरकार नहीं है लेकिन इसके बावजूद लोग खाना भेज रहे हैं तो वे उसे मना भी नहीं कर रहे हैं।
एमवीएन से आया कंबल
मजदूर मोर्चा टीम को उस वक्त हैरानी हुई जब उसने देखा कि एमवीएन स्कूल की गाड़ी से आए कंबल किसान स्थल पर उतारे जा रहे हैं। एमवीएन स्कूल पलवल के प्रिंसिपल संजीव जैन और मुख्य सुरक्षा अधिकारी की देखरेख में ये कंबल लाए गए थे। इस संवाददाता ने प्रिंसिपल संजीव जैन से पूछा कि ये कंबल किसने भिजवाए हैं। उन्होंने बताया कि हमारे चेयरमैन ने किसानों के लिए 250 कंबल भेजे हैं। हमारे स्कूल के संस्थापक स्व. गोपाल शर्मा खुद ग्रामीण पृष्ठभूमि से रहे हैं। पूरा परिवार किसानों के दर्द को समझता है। चूंकि ठंड बहुत बढ़ गई है तो हमारे चेयरमैन जो इस समय बेंगलुरु में थे, उन्होंने फौरन कंबल भेजने का निर्देश दिया। हम लोग किसी तरह का प्रचार नहीं चाहते हैं। यह दिल से जुड़ा मामला है। हम आगे भी यहां बैठे किसानों की हर तरह से मदद करते रहेंगे। इसी तरह दुधौला से कुछ लोग एक ट्रैक्टर ट्राली पर आलू की बोरियां लेकर आए थे। बहुत पूछने के बावजूद उन्होंने अपना नाम नहीं बताया। उनका कहना था कि नाम बताने पर प्रचार हो जाएगा, उससे हमारा मकसद पूरा नहीं होगा। हम ये मदद प्रचार के लिए नहीं कर रहे हैं। किसानों की रसोई चला रहे प्रबंधकों ने बताया कि हमारे पास इतना कच्चा राशन आ रहा है कि उसे संभालना मुश्किल हो रहा है। राशन लाने वाले हमें भी अपने नाम नहीं बताते। हमारे पास ऐसी कोई सूची नहीं है जिसे देखकर बताया जा सके कि कहां-कहां से राशन आ रहा है।
सभी का स्वागत, सभी को प्रसाद
मजदूर मोर्चा टीम ने देखा कि मौके पर चल रहे लंगर में गरीब, मजदूर तबके के लोग भी भारी तादाद में खाना खाने के लिए बैठे थे। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजर रहे लोग अपने वाहन रोककर लंगर में शामिल हो जाते हैं। आसपास गांवों के जो किसान समर्थन के लिए आते हैं, वे भी लंगर में बैठते हैं। वहां ड्यूटी पर मौजूद हरियाणा पुलिस के जवानों ने बताया कि वे लोग भी लंगर में ही खाते हैं और उन्हें बड़े प्रेम से खाना परोसा जाता है। एक बंदूकधारी पुलिसकर्मी ने बताया कि ये हमारे परिवारों के ही तो लोग हैं। इनके साथ खाना खाने में हमें शर्म कैसी। ये ठीक है कि हम सरकार की ड्यूटी पर हैं लेकिन इनका भोजन करना कोई अपराध नहीं है।
एक तरफ जहां लंगर चल रहा था तो दूसरी तरफ पेठे की मिठाइयां और मीठी बूंदी और चाय भी थी। मजदूर मोर्चा टीम ने इन सभी चीजों का खाया और पाया कि सभी की गुणवत्ता बहुत अच्छी थी। चाय इतनी अच्छी थी कि उसने सारी थकान मिटा दी।
कश्मीर की खुशबू
पलवल के मोर्चे पर कश्मीर से आए पांच युवक नजर आए। ये लोग अखिल भारतीय किसान महासभा की कश्मीर यूनिट के सदस्य थे। इनका नेतृत्व मोहम्मद तनवीर कर रहे हैं। तनवीर ने मजदूर मोर्चा को बताया कि कश्मीर के लोग खुद तमाम तरह की मुश्किलों में फंसे हुए हैं लेकिन उन्हें किसानों के दर्द का एहसास है। इसलिए हम एकता प्रदर्शित करने के मकसद से दिल्ली के हर बॉर्डर पर जा रहे हैं। हमारे वहां सेब और अन्य फलों के बाग हैं। वह काम भी खेत के किसान जैसा ही है। इसलिए कश्मीर के लोग किसानों के दर्द को शिद्दत से महसूस कर रहे हैं। यह पूछने पर कि धारा 370 हटने के बाद वहां क्या बदला, तनवीर ने कहा कि कुछ भी नहीं बदला। कश्मीर में जो सेना और पुलिस के जो बैरिकेड्स पहले थे, वे उसी जगह आज भी हैं। सेना ने जहां डेरा डाला हुआ था, वहीं आज भी है। जो दहशत पहले थी, वही दहशत आज भी है। कुछ भी तो नहीं बदला। शाम ढलते ही वहां सब कुछ वीरान हो जाता है। वो पहले भी था, वो आज भी है। आप दिल्ली से कश्मीर को नहीं चला सकते। कश्मीरियत से ही कश्मीर को चलाया जा सकता है। आज नहीं तो कल मुल्क के हुक्मरां इसे समझेंगे।