दिल्ली विस्फोट के नाम पर अल्फला मेडिकल यूनिवर्सिटी पर हिन्दूत्ववादी हमला

दिल्ली विस्फोट के नाम पर अल्फला मेडिकल यूनिवर्सिटी पर हिन्दूत्ववादी हमला
November 17 06:36 2025

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) एमबीबीएस तथा पीजी कोर्स कराने वाले इस मेडिकल कॉलेज ने आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करके राज्य सरकार से यूनिवर्सिटी का दर्जा प्राप्त किया हुआ है।
इसका संचालन एक पारिवारिक ट्रस्ट द्वारा किया जाता है। ट्रस्ट के लोगों ने फाइनेन्स के धंधे में इंदौर वासियों को तगड़ा चुना लगाया था। वहां के लोगों से बच कर ये लोग दिल्ली आ गए थे। पैसे की कोई कमी न होने के चलते इन्होंने 1997 के आसपास गांव धौज व फतहपुर तगा के बीच 70 एकड़ जमीन खरीद कर पहले एक इन्जीनियरिंग कॉलेज शुरू किया था। उसके बाद वहां पहले एक डिस्पेंसरी फिर एक छोटा सा अस्पताल उसके बाद वर्ष 2018 में मेडिकल कॉलेज की स्थापना की थी। अभी बीते एक-दो साल से यहां पीजी के भी कुछ कोर्स शुरू कर दिए गए।

विदित है कि किसी भी प्रकार का कोई शिक्षण संस्थान खोलने के लिए राज्य सरकार, यूनिवर्सिटी तथा विषय विशेष की काउंसिल से भी विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियां लेनी होती है। लेकिन हरियाणा सरकार तथा ईएसआई कॉर्पोरेशन बिना कोई औपचारिता पूरा किए, अपने मेडिकल कॉलेजों को चालू कर लेते हैं। दूसरी ओर अल्फला जैसे मेडिकल कॉलेज अधिकतम ऑपचारिकताएं तो पूरी करते ही हैं, छोटी-मोटी कसर रह जाने के बदले सम्बन्धित अधिकारियों को घूस देते हैं। ऐसी ही कुछ छुट-मुट कमियां इस मेडिकल कॉलेज में भी है। इसके दबाव में अधिकारियों को घूस तो दी ही जाती है साथ में सरकारी आयुष्मान योजना का भार जिसे कोई ढो कर राजी नहीं, उसे यह संस्थान ढोता है।

संस्थान का अल्पसंख्यक दर्जा होने के चलते इन्हें मैनेजमेंट कोटे में अत्यधिक सिटें प्राप्त होती हैं जिससे ये लोग अच्छी-खासी कमाई कर लेते हैं। प्राइवेट दुकानदार की भांति केवल मुनाफाखोरी के लिए काम करने वाले ये लोग अपने यहां दाखिला लेने अथवा नौकरी लेने वालों की कोई विशेष छान-बीन भी नहीं करते, वैसे भी छान-बीन करना कोई आसान काम नहीं होता। सरकार तो फिर भी इसे अपने संसाधनों से करा लेती है लेकिन निजी संस्थानों के लिए यह कठिन काम होता है। इसी के चलते यहां काम करने वाले फैकल्टी अपेक्षाकृत सस्ते दामों पर मिल जाती है और इसी तरह दाखिला लेने वाले छात्र भी अधिक मोल-भाव करने की स्थिति में नहीं होते।

एक सफल व्यापारी की भांति अल्फला ट्रस्ट ने भी यहां नर्सिंग व पैरा मेडिकल कॉलेज भी शुरू कर रखे हैं। ये लोग मुनाफाखोरी के लिए बेईमान व्यापारी तो हो सकते हैं, बल्कि हैं भी। लेकिन किसी तरह भी आतंकवादी अथवा आतंकवादियों के पोषक नहीं हो सकते। संस्थान में पढऩे-पढ़ाने अथवा अन्य कोई काम करने के बाद बाहर जाने पर कोई क्या करता है, इसकी रखवाली संस्थान के काबू से बाहर है। लेकिन इसके बावजूद दिल्ली कार धमाके को लेकर भाजपाई सरकार अपने मुस्लिम विरोधी एवं हिन्दूत्ववादी एजेंडे पर उतर आई है। देश की कुछ प्राइवेट यूनिवर्सिटियों के एक संगठन ने इसकी सदस्यता को लेकर एक नोटिस जारी कर दिया है जिसका कोई विशेष महत्व नहीं समझा जाता। इसी तरह नैक (नेशनल एक्रेडेशन) कमिशन ने भी एक नोटिस जारी किया है। अमितशाह की ईडी नामक जिस एजेंसी ने कभी इस ओर झांका तक नहीं था वह भी अब इसमें घुसने को तैयार है। यानी कि भाजपा सरकार तथा इसके तमात लगुवे भगुवे इस यूनिवर्सिटी के पीछे हाथ धोकर पिल पड़े हैं।
सभी प्रकार की शिक्षाओं का व्यापार करने वाले शिक्षा व्यापारियों की भांति यह ट्रस्ट भी केवल शिक्षा व्यापार ही तो कर रहा था। अब इसके यहां कोई आतंकवादी घुसपैठ कर गए तो पूरे संस्थान को कैसे तबाह किया जा सकता है?

अपराधी तो, केवल अपराधी ही होता है। उसकी कोई जाति अथवा धर्म नहीं होता। हां, वह केवल अपने आपको बचाने के लिए जाति एवं धर्म को कवच की भांति इस्तेमाल जरूर करता है। उसके इस काम में कवच बनने वाले लोग देश के दुश्मन तो होते ही हैं अपनी जाति व धर्म का भी बड़ा नुक्सान कर बैठते हैं।

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Mazdoor Morcha
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