फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) लूट कमाई की एमसीएफ नामक खान मेें किसी ढंग के अफसर को तो भाजपा सरकार भेज नहीं सकती। आला दर्ज के छंटे हुए एक से बढ़कर एक बदतरीन अफसरों को बोली के आधार पर ये लूट की खान कुछ समय के लिए अलॉट की जाती है। पूर्व निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने रिकॉर्ड तोड़ लूट मचाई, चर्चे बहुत दूर-दूर तक पहुुुंचे तो लूट के कई दावेदारों ने अपनी अपनी अर्जियां लगा दीं। सीएम नायब सैनी को उनमें सबसे बढिय़ा आवेदक धीरेंद्र खडगटा जी नजर आए।
सरकार द्वारा निगमायुक्त बना कर भेजे गए नौकरशाह (आईएएस) धीरेंद्र खडगटा निगम के मुखिया से ज्यादा पार्षद, विधायक और मंत्री के ही नहीं उनके पीए के नौकर की तरह काम कर रहे हैं। यहां तक कि निगम के जेई भी उन्हें धमका कर मनचाहा चार्ज देने को मजबूर कर रहे हैं और वह यस मैन की तरह दबाव बनाने या हड़काने वाले हर व्यक्ति के आदेश का पालन करते हुए फरमान जारी कर रहे हैं। आईएएस धीरेंद्र खडगटा जिस तरह अपने मातहतों, नेताओं उनके दलालों के सामने नतमस्तक हैं इसका अर्थ है कि वह भी निगम के भ्रष्टाचार की गंगा मेें डुबकियां लगा रहे हैं, और मोटी कमाई वाली कुर्सी के मोह में नेताओं की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहते।
पूर्व निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने अंधाधुंध लूट कमाई करने वाले जिन जेई व अन्य कर्मचारियों को इधर उधर कर दिया था खडगटा के राज में वे सब अपनी जगह लौट आए हैं। जाहिर सी बात है कि ये लोग काम करने नहीं बल्कि पूर्ववत लूट कमाई करने के लिए ही लौटे हैं। अब लूट कमाई में निगमायुक्त का हिस्सा न हो यह नामुमकिन है। पूर्व निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास के कार्यकाल में निगम कर्मचारी अपना काम कराने के लिए मैडम के दलाल प्रेम शर्मा का सहारा लेते थे। अब कर्मचारी सीधे निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा से मिलकर मनचाहा पद हासिल कर रहे हैं।
चर्चा है कि निगम में एसटीपी मास्टर के नाम से बदनाम एचकेआरएन यानी ठेके के जेई मनोज शर्मा एसटीपी का चार्ज छिन जाने से काफी परेशान था। बताया जा रहा है कि माह की शुरूआत में मनोज सीधे खडगटा से मिला और एसटीपी का चार्ज देने का दबाव बनाया। धमकी दी कि अगर चार्ज नहीं दिया तो एसटीपी चलने नहीं देगा। अपने पिछले कारनामों से रूबरू कराते हुए उसने एसटीपी का चार्ज उसे दिया जाना सबके लिए फायदे का सौदा होना बताया। जेई के दबाव में आए निगमायुक्त ने उसे एसटीपी का चार्ज दे दिया। खडगटा ने मोटी कमाई वाले अमृत, रैनीवेल और नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम यानी एनसीएपी भी मनोज शर्मा के पास ही रहने दिए।
मनोज चार्ज लेकर निकला ही था कि मंत्री विपुल गोयल का पीए प्रशांत निगमायुक्त से मिलने पहुंच गया। उसने कर्मचारियों की लिस्ट थमाते हुए उनके नाम के आगे बताए गए विभाग देने का सीधा आदेश दिया। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार खडगटा ने काम हो जाने का आश्वासन दिया इस पर प्रशांत ने कहा कि मैं यहीं बैठा हूं ऑर्डर रिलीज करो तभी जाऊंगा। बेचारे खडगटा ने मंत्री के पीए की सूची के अनुसार मातहतों को काम सौंप दिए। प्रशांत ने जेई पूनम मलिक को प्लानिंग शाखा देने को कहा। पूनम मलिक वाहन, स्टोर और एसटीपी का चार्ज संभाले हुए थीं। प्रशांत के आदेश पर खडगटा ने प्लानिंग शाखा में लंबे समय से जमे जेई दीपक अहलावत को हटा पूनम मलिक को लगा दिया और उनसे स्टोर व वाहन का चार्ज लेकर दीपक को दे दिया।
ठेका जेई संदीप तलवार को पूर्व सीएम खट्टर ने काम में लापरवाही और गड़बड़ी करने के जुर्म में बर्खास्त कर दिया था। निगम में सलाहकार तैनात अनिल मेहता की सिफारिश पर खट्टर के आदेश को दरकिनार कर संदीप को दोबारा ठेका जेई तैनाती दी गई थी। यह संदीप भी प्रशांत की गुडलिस्ट में शामिल था और उसे वार्ड नंबर 17 का अतिरिक्त प्रभार दिलाया गया। इसी तरह एनआईटी तोड़ फोड़ शाखा में रह कर महंगी स्कॉर्पियो के मालिक बने ठेका जेई आरिफ हुसैन को खडगटा ने एक बार फिर एन्फोर्समेंट शाखा की जिम्मेदारी सौंप दी है ।
विज्ञापन ठेकेदारों से मिलीभगत कर प्रतिमाह नगर निगम को लाखों रुपयों का चूना लगाने वाले जेई अंकित गोयल को भी प्रशांत के कहने पर वार्ड 39 का चार्ज भी दे दिया गया। ठेकेदारों से मिलीभगत करने वाले अंकित गोयल ने ठेकेदारों को वही साइटें दे दीं जिन पर कोर्ट ने स्टे दे रखा है। नियम और सुरक्षा मानकों को ताक पर रख कर ठेकेदारों को सड़क किनारे साइटें भी अलॉट कीं जो वाहन और चालकों के लिए खतरा साबित हो सकती हैं। बल्लबगढ़ में मोटी लूट करने में जुटे जेई जतिन यादव को वार्ड नंबर 42 का प्रभार दिया गया। बताया जाता है कि हजारों में वेतन पाने वाले जतिन यादव ने मोटी कमाई के बल पर एसडीओ अमित की पार्टनरशिप में करोड़ों रुपये कीमत की फैक्टरी खोल ली है।
पीए प्रशांत के अलावा कई जेई ने खुद ही खडगटा से मिलकर मनपसंद वार्ड अपने नाम करवा लिए। राजनेताओं की सिफारिश पर खडगटा ने बीते छह जून को 16 जेई व अन्य कर्मचारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग का आदेश जारी किया। निगम में यह भी चर्चा है कि कुछ कर्मचारियों की ट्रांसफर पोस्टिंग किए जाने से बडख़ल विधायक धनेश अदलखा निगमायुक्त से सख्त नाराज हैं। भरोसेमंद सूत्रों के अनुसार अदलखा ने खडगटा को धमकाया कि देखता हूं तू नगर निगम कैसे चलाता है। खडगटा धनेश को मनाने और यह समझाने के लिए कि उनकी आज्ञानुसार ही काम करेगा अदलखा को लगातार फोन करते रहे लेकिन उसने फोन ही नहीं हटाया। वक्त वक्त की बात है जब कभी महताब सिंह निगमायुक्त होते थे, इसी अदलखा को बतौर पार्षद बुरी तरह हड़काते हुए कहा था कि मेरे दफ़्तर में दिख गया तो टांगें तोड़ दूंगा, सिर में एक भी बाल नहीं बचेंगे, और एक आज का वक्त है कि खडगटा जैसे निगमायुक्त उसके सामने बिछने को लालायित हैं।
खडगटा जिस तरह राजनेताओं से लेकर मातहतों को खुश करने के लिए पद की गरिमा को तार तार करने में लगा है उससे तो यही लगता है कि आने वाले समय में नगर निगम में हरामखोरी और लूट कमाई के नए कीर्तिमान गढ़े जाने वाले हैं। निगम के कर्मचारियों में चर्चा है कि जिस तरह धीरेंद्र खडगटा बिना रीढ़ वाले प्रशासकों की मानिंद काम कर रहे हैं भ्रष्टाचारी अधिकारियों की पौ बारह है।
आमदनी अठन्नी, शौक सौ रुपइया तो क्यों न करें लूट कमाई
नगर निगम में हजारों रुपये में वेतन पाने वाले जेई की खर्चीली जीवनशैली देखकर समझ में आ जाएगा कि क्यों ये कर्मचारी अपनी मनपसंद जगह पाने के लिए निगमायुक्त धीरेंद्र खडगटा पर दबाव डाल रहे हैं। निगम का शायद ही कोई जेई ऐसा होगा जो बीस लाख से कम कीमत वाले चार पहिया वाहन पर न चलता हो। डेढ़ लाख रुपये कीमत का लेटेस्ट आईफोन और करीब इतनी ही कीमत वाला सैमसंग फोल्ड फोन लेकर चलते हैं। निगम के जेई मनोज, विपिन, अरुण, परवीन बैँसला, शिव कुमार, आरिफ, महंगी कारों के मालिक हैं तो जेई पूनम मलिक वेन्यू और हाई राइडर जैसी लाखों कीमत वाली गाडिय़ों पर चलती हैं। जेई परवेज आलम भी लंबे समय से बल्लभगढ़ तोड़ फोड़ शाखा में अपना सिक्का जमाए बैठा है।
सुधी पाठकों को याद दिलाते चलें ये वही जेई परवेज आलम हैं जिनके लिए वार्ड तीन के पार्षद रवि भगत ने मज़दूर मोर्चा के संवाददाता को दस हजार रुपये प्रति अवैध इमारत का आफर दिया था। रवि भगत ने परवेज आलम के खिलाफ खबर न छापने का अनुरोध करते हुए पेशकश की थी कि प्रत्येक महीने चार से पांच अवैध बिल्डिंगों से वसूली की जाएगी जिसमें से दस हजार पार्षद का, दस हजार उनके सहयोगी का, दस हज़ार संवादाता का और दस हजार रुपये संवाददाता को मिलाने वाले बिचौलिए को मिलेंगे।
शायद ही कोई जेई ऐसा हो जो हर महीने दस से पंद्रह हजार रुपये ब्रांडेड जूतों या कपड़ों पर न खर्च करता हो। निगम रिकॉर्ड के अनुसार अधिकतर जेई दिल्ली एनसीआर के रहने वाले नहीं हैं। अधिकतर जेई तो रोजाना 40 से 100 किलोमीटर दूर से निजी कार से आते जाते हैं, यानी ईंधन में ही प्रतिमाह आठ से दस हजार खर्च और चार हजार से अधिक टोल टैक्स चुकाते हैं। जेई अजीत बंचारी से तो शिव कुमार उत्तर प्रदेश के जेवर से, पंद्रह बीस हजार वेतन पाने वाला कंप्यूटर ऑपरेट मुकेश शर्मा भी जेवर से रोजाना आता जाता है।
जेई रविंदर पलवल से, कपिल होडल से, विशाल सोहना से, कोई दिल्ली से तो कोई मेवात से अप डाउन करते हैं। आने जाने में ईंधन-टोल टैक्स पर ही दस से पंद्रह हजार खर्च करने के बावजूद अधिकतर जेई ने 15 से 20 हजार रुपये महीने किराए पर फ्लैट भी ले रखे हैं, बिजली बिल और रहना खाना ओर अय्याशी अलग से, ओल्ड फरीदाबाद जोन के भ्रष्ट जेई शिव कुमार ने कार्यालय के पास ही करीब पंद्रह हजार रुपये महीने पर फ्लैट ले रखा है जिसमें वह और कंप्यूटर ऑपरेटर मुकेश शर्मा रहते भी हैं और निगम के ऊपरी काम भी निपटाते हैं, यहां महिला ड्राफ्टमैन अन्नू बाला को भी आने जाने में असुविधा नहीं रहती।
निगम के कनिष्ठ अभियंताओं की महंगी जीवन शैली को करीब से देखने वाले कहते हैं कि यदि सरकार केवल यह पता लगाए कि नौकरी लगने से पहले इनके घर की आर्थिक स्थिति क्या थी और एक दो साल में क्या हो गई तो निश्चित ही सभी आय से अधिक संपत्ति बनाने के जुर्म में जेल भेज दिए जाएंगे लेकिन जिस कुएं में ही भांग घुली हो यानी जहां चपरासी से लेकर निगमायुक्त, और पार्षद से लेकर विधायक-मंत्री तक लूट कमाई और हिस्सापत्ती में लगे हों वहां यही सब तो होगा। इसी को तो कहते हैं कि अंधी जनता पीस रही है, कुत्ते चाट रहे हैं।