भाई बंदगी में चली गई सीपी राकेश आर्य की कुर्सी

भाई बंदगी में चली गई सीपी राकेश आर्य की कुर्सी
August 25 14:28 2024

मंत्री गूजर के भूमाफिया चेलों ने रिश्तेदार की बेकशकीमती दुकान पर कब्जा किया तो सीपी ने दर्ज करा दिया था केस

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) विधानसभा चुनाव में हर हाल में जीत हासिल करने की नीयत से हर हथकंडे अपनाने में जुटे सीएम सैनी ने 17 अगस्त को चुनाव आयोग की घोषणा से ठीक पहले 15 आईपीएस अधिकारियों को इधर से उधर कर दिया। राजनीति के जानने वालों के मुताबिक सैनी ने चुनाव में जीत निश्चित करने के लिए अपने मोहरे आईपीएस अधिकारियों को राजनीतिक बिसात के सही खानों में बैठाया है। लेकिन चर्चा है कि सीनियर आईपीएस राकेश आर्य का तबादला चुनावी जीत-हार के लिए नहीं बल्कि डीलर मंत्री कृष्णपाल गूजर के भूमाफिया चहेतों के खिलाफ अवैध कब्जा करने, सहित अन्य धाराओं में केस दर्ज कराने के कारण हुआ है।

विभाग के सूत्रों के अनुसार ओल्ड चौराहे के पास स्थित शराब के ठेके के ठीक बगल में प्रवीण गुप्ता उर्फ कक्कन की समोसे की दुकान है। प्रवीण गुप्ता पुलिस आयुक्त राकेश आर्य के करीबी रिश्तेदार हैं। ठीक चौराहे पर स्थित कक्कन की इस बेशकीमती दुकान पर मंत्री गूजर के मेवला महराजपुर के भूमाफिया चेलों की काफी समय से नजर थी। गूजर के तीसरी बार लोकसभा चुनाव जीतते ही ये चेले फिर से अवैध कब्जे करने में सक्रिय हो गए। करीब एक महीने पहले मेवला के लगभग आधा दर्जन गूजरों ने रातों-रात कक्कन की दुकान की पिछली दीवार तोड़कर उस पर कब्जा कर लिया।

कब्जा होते ही कक्कन तुरंत अपने रिश्तेदार सीपी राकेश आर्य की शरण में पहुुंच गए। सीपी ने तुरंत ही डीसीपी सेंट्रल को मेवला के गूजरों के खिलाफ केस दर्ज कर उन पर सख्त कार्रवाई करने का हुक्म सुना दिया। जमीन पर कब्जे को दीवानी मामला बता कर अक्सर पीडि़त को अदालत जाने की सलाह देने वाली पुलिस ने, सीपी के आदेश पर बिना देर किए न केवल केस दर्ज किया बल्कि आरोपी गूजरों को हिरासत में भी ले लिया। बताया जाता है कि गूजर अपने आक़ा मंत्री कृष्णपाल गूजर की शरण में गए। अंत में समझौता हुआ कि गूजर दुकान का कब्जा कक्कन को दे देंगे। समझौते के अनुसार कक्कन को उनकी दुकान तो मिल गई लेकिन गूजरों पर दर्ज केस वापस नहीं लिया गया।

अब चूंकि मामला सीपी साहब का था तो पुलिस ने जल्दी जल्दी तफ्तीश पूरी कर चालान अदालत में पेश कर दिया। बुरी तरह मुंह की खाए गूजर एक बार फिर अपने आक़ा के पास पहुंचे और कहा कि ये बेइज्जती हमारी नहीं बल्कि आपकी है। डबल इंजन सरकारों के बावजूद सीपी द्वारा आदेश नहीं मानना मंत्री गूजर के अहम को चोट पहुंचा गया। बताया जाता है सीएम सैनी की नजर में राकेश आर्य राजनीतिक बिसात में फरीदाबाद के खाने में बहुत सही फिट थे लेकिन केंद्रीय मंत्री ने अपनी बेइज्जती का हवाला देकर उन्हें राकेश आर्य को हटाने के लिए मना लिया। चर्चा ये भी है कि सीएम को समझ नहीं आ रहा था कि राकेश आर्य की जगह फरीदाबाद की कमान किसको सौंपी जाए। कुछ सोच समझ कर, यहां संयुक्त पुलिस आयुक्त रहने के बाद पदोन्नत होकर आईआरबी सोनारिया चले गए ओम प्रकाश नरवाल को कमान सौंपने का निर्णय लिया गया। चुनाव आयोग द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस किए जाने के चंद घंटों पहले सीएम ने इन अधिकारियों के तबादले का फरमान जारी कर दिया।

सुधी पाठकों को बताते चलें कि मंत्री कृष्णपाल गूजर द्वारा अपने चेलों का पक्ष लेने में मुंह की खाने का यह पहला मामला नहीं है। वर्ष 2015 में भी गूजर के सौ-डेढ़ सौ गुंडों ने पूर्ण एंक्लेव निवासी विकास मलिक को बंधक बना कर अपहरण का प्रयास किया था। मौके पर पहुंची पुलिस पीडि़त को छुड़ाकर थाने लाई तो खुद को गूजर का रिश्तेदार बताने वाले ये गुंडे भी थाने पहुंच गए थे। यहां विकास मलिक को पुलिस हिरासत से छीनने की हिमाकत करते हुए इन गुंडों ने एसएचओ भारतेंदु का गिरेबान पकड़ कर उनसे मारपीट तक की थी।

तत्कालीन सीपी सुभाष यादव ने सूचना मिलते ही भारी पुलिस बल भेज कर इन गुंडों की जमकर पिटाई करवाई थी और 11 लोगों को गिरफ़्तार कर गंभीर धाराओं में जेल भेज दिया था। इस मामले में भी गूजर सीपी सुभाष यादव पर उसके गुंडों को छोडऩे का दबाव बनाते रहे लेकिन महकमे की आनबान पर हाथ डालने वालों को सीपी ने उनकी अच्छी सेवा करवाने के साथ साथ मुकदमा भी दर्ज करा दिया था। इस मामले में भी गूजर मोदी से लेकर खट्टर के दरबार में रोए गाए थे, लेकिन सुभाष यादव का तबादला नहीं करा सके थे।

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Mazdoor Morcha
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