भारत में ‘हिंदू खतरे में’ क्यों बताया जा रहा है?

भारत में ‘हिंदू खतरे में’ क्यों बताया जा रहा है?
February 13 09:57 2026

अजय शुक्ला
2014 से देश में एक लगातार दोहराया जा रहा वाक्य गूंज रहा है—
‘हिंदू खतरे में है। ‘
डर का यह मंत्र इतना बार दोहराया गया कि सवाल पूछना ही देशद्रोह बन गया।
आपको बताया गया कि एक दिन कोई मुसलमान आएगा और आपको मार देगा।
इसलिए उससे पहले मर जाना ज़्यादा सुरक्षित है।
आप मर सकते हैं—
सीवर का ज़हरीला पानी पीकर,
नकली कफ सिरप और जहरीली शराब से,
धार्मिक स्थलों की अव्यवस्था और भगदड़ों में,
कोरोना में ऑक्सीजन के बिना,
लॉकडाउन में सैकड़ों किलोमीटर पैदल चलकर,
कुंभ जैसी अनियंत्रित भीड़ में कुचलकर,
प्रदूषित हवा में घुटकर,
नोटबंदी की लाइनों में खड़े रहकर,
हवाई जहाज़ों और ट्रेनों की दुर्घटनाओं में,
भ्रष्टाचार से ढहते पुलों के नीचे,
राशन-खाद की लाइनों में,
और यहां तक कि ‘प्रायोजित राष्ट्रवादÓ की आड़ में हुई आतंकी घटनाओं में भी।
लेकिन एक काम मत कीजिए—
सरकार से सवाल मत पूछिए।
शिक्षा क्यों बर्बाद है, यह मत पूछिए।
अस्पताल क्यों चरमरा रहे हैं, यह मत पूछिए।
महंगाई, बेरोज़गारी, पेट्रोल-डीज़ल, रसोई गैस, रुपया, कजऱ्—कुछ मत पूछिए।
महिला सुरक्षा, शुद्ध हवा-पानी, बच्चों का भविष्य—इन पर चुप रहिए।
क्योंकि सवाल पूछते ही कहा जाएगा—
‘हिंदुत्व खतरे में है। ‘
और आप अचानक देशद्रोही हो जाएंगे।
यह कोई संयोग नहीं है।
यह सत्ता की रणनीति है।
जब नागरिक सवाल छोड़ देता है,
तब शासक जवाबदेही छोड़ देता है।
और जब सड़कें ख़ामोश हो जाती हैं,
तब शासन निरंकुश हो जाता है।
यह लड़ाई हिंदू-मुसलमान की नहीं है।
यह लड़ाई नागरिक बनाम सत्ता की है।
यह तय करने की लड़ाई है कि
देश जनता का होगा
या डर के ठेकेदारों का।
सोचिए—
क्या आपने इसी ‘अच्छे दिन ‘, इसी भय-आधारित विकास और इसी चुप्पी की कल्पना की थी?
अगर नहीं,
तो याद रखिए—
जिसे हम सत्ता में बिठा सकते हैं,
उसे सत्ता से उतार भी सकते हैं।
जय हिंद। जय भारत।

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