बढ़ता प्रदूषण, तमाशबीन बनी सरकार

बढ़ता प्रदूषण, तमाशबीन बनी सरकार
January 07 16:49 2026

फरीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) शुद्ध हवा में सांस लेना मनुष्य का जन्मसिद्ध मौलिक अधिकार है। जो सरकार मनुष्य के इस मौलिक अधिकार को भी सुरक्षित न रख सके उससे निकृष्ट एवं निकम्मी कोई सरकार हो नहीं सकती। आज न केवल फरीदाबाद एवं एनसीआर बल्कि देश भर में प्रदूषण का स्तर इतना अधिक बढ़ता जा रहा है कि शुद्ध हवा के अभाव में बीमार होने वाले दिन-प्रति-दिन बढ़ते जा रहे हैं। मुख्यत: सांस संबंधी व आंखों की बीमारी को लेकर अस्पतालों में लम्बी लाइनें लगी हुईं हैं। सांस संबंधी बीमारियों से फेफड़ोंं व गले को सीधे तौर पर प्रभावित नजर आते हैं, लेकिन परोक्ष रूप से इसका असर किडनी, लीवर व ह्दय पर भी पड़ता है। यह एक प्रकार से धीमें जहर का काम करते हुए मनुष्य को अकाल मृत्यु की ओर धकेलता है।

ऐसा नहीं है कि प्रदूषण से मुक्ति पाना असम्भव है। दुनियां में अनेकों देश ऐसे मौजूद हैं जो प्रदूषण से पूर्णतया मुक्त हैं। वहां यदि थोड़ा सा भी प्रदूषण होने लगे तो हल्ला मच जाता है। लोग सड़कों पर उतरने लगते हैं, सरकार हिल जाती है। लेकिन भारत में ऐसा कुछ नहीं होता। यहां प्रदूषण लेवल 500, 600, 700 आदि कितना ही हो जाय, कोई फर्क नहीं पड़ता। आतिशबाजी व पटाखे पूरे जोर-शोर से चलते रहते हैं।

सड़कों पर वाहनों का जाम लगना व धूल का उडऩा जारी रहता है। कूड़े व कबाड़े के ढेर जहां-तहां जलते रहते हैं। बिजली सप्लाई बाधित होने पर डीजल-जनरेटर धुआं उगलने लगते हैं और कारखानों की चिमनियां तो निर्बाध रूप से यह काम करती रहती हैं। इस तरह फैलाए गए प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेप एक, दो, तीन, चार की घोषणा करके प्रशासन अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है। हां,केवल दिखावे के लिए सड़कों पर कुछ पानी का छिड़काव जरूर करा दिया जाता है, जिसका कोई प्रभाव प्रदूषण पर नहीं पड़ता। दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण का जब हल्ला मचने लगता है तो सरकार किसानों पर पराली जलाने का आरोप लगाती है। जिस सरकार को जलते पटाखे, कूड़े-कबाड़े के ढेर व धुआं-धूल नहीं दिखते, उन्हें 400 किलो मीटर दूर से आता पराली का धुआं दिख जाता है।

सर्वविदित है कि भारत में हवा पूरब से पश्चिम या पश्चिम से पूरब की ओर चलती ही है। इसके बावजूद रोक-थाम जीरो इसके अलावा प्रदूषण को सरकारों ने अपनी कमाई का एक बड़ा साधन बना लिया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मोटी कमाई का साधन बन चुके हैं। प्रदूषण नियंत्रण के नाम पर दिल्ली सरकार अपने यहां प्रवेश करने वाले व्यापारिक वाहनों से अच्छी-खासी वसूली करती है। यानी कि सरकार को पैसा देकर प्रदूषण फैलाने की छूट है। इसके अलावा जनता का ध्यान बढ़ते प्रदूषण से हटाने के लिए धर्म की अफीम तो भाजपा सरकार के पास है ही। जनता को मंदिरों, धार्मिक पदयात्राओं व हिन्दू-मुस्लिम के मसलों में ऐसा उलझा कर रखा जाता है कि लोग प्रदूषण द्वारा अपनी अकाल मृत्यु को भी नहीं देख पाते।

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Mazdoor Morcha
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