थरूर भाजपा के दूसरे निशिकांत बनने को उतावले

थरूर भाजपा के दूसरे निशिकांत बनने को उतावले
June 02 15:45 2025

राकेश अचल
पाकिस्तान के बेनकाब करने वाले अभियान के तहत कई डेलीगेशन विदेशों में पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेसी नेत शशि थरूर पर भाजपा की संगत का असर साफ दिखाई देने लगा है. वे भी भाजपा सांसद निशीकांत दुबे की तरह विदेश में असली मिशन को छोडकर गडे मुर्दे उखाडने में व्यस्त हो गये हैं.कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 2023 में भूकंपके दौरान तुर्किए की मदद करने के लिए केरल सरकार की आलोचना की है. उन्होंने दो साल पहले तुर्किए को दी गई 10 करोड़ रुपये की मदद को गलत बताया.

पाकिस्तान में आतंकवाद का संरक्षण और भारत की ओर से जबाबी आपरेशन सिंदूर की वकालत छोड थरूर को केरल की वामपंथी सरकार पर हमला करने की फुर्सत मिल गई. केरल की ओर से तुर्किए को सहायता दिए जाने के बारे में एक न्यूज पोस्ट करते हुए थरूर कहते हैं कि वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार को अपनी अनुचित उदारता पर विचार करना चाहिए. उन्होंने पोस्ट में लिखा था, “मुझे उम्मीद है कि दो साल बाद तुर्की के व्यवहार को देखने के बाद केरल सरकार अपनी अनुचित उदारता पर विचार करेगी! यह तो बताने की जरूरत ही नहीं कि वायनाड के लोग (केरल का उदाहरण ही लें) उन दस करोड़ रुपयों का कहीं बेहतर इस्तेमाल कर सकते थे.”

सरकारी मिशन पर थरूर की ही तरह विदेश गए माकपा सांसद जॉन ब्रिटास ने थरूर की पोस्ट का जबाब देते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार ने तुर्किए को मदद का हाथ बढ़ाया है तो शशि थरूर सिर्फ केरल पर सवाल क्यों उठा रहे हैं? उन्होंने कहा, “शशि थरूर के प्रति मेरे मन में बहुत सम्मान है. लेकिन ये टिप्पणियां भूलने की बीमारी के लक्षण हैं.” उन्होंने कहा, “यह आश्चर्यजनक और हैरान करने वाला है कि उन्हें केरल का अपमान क्यों करना पड़ा, जबकि वह अच्छी तरह जानते हैं कि मोदी सरकार ने खुद तुर्किए की मदद के लिए ऑपरेशन दोस्त शुरू किया था. केरल की आलोचना अनुचित है.”
आपको बता दूं कि पिछली 22अप्रैल को पहलगाम हत्याकांड के बाद 7 मयी से पाकिस्तान और भारत के बीच चार दिनों तक चले सेना के संघर्ष में तुर्किए ने पाकिस्तान की खुलकर मदद की थी, जिसके बाद से उसके खिलाफ देश में बॉयकॉट की आवाज तेज हो गई है. देश की जनता ने तुर्किए का बॉयकॉट करते हुए घूमने जाने वाली टिकटें कैंसिल करा दीं तो व्यापारियों ने उसके सामानों का बहिष्कार किया है और भारत में संचालित तुर्किए के प्रतिष्ठानों को बंद कर दिया है.

कांग्रेस के विद्वान सांसद थरूर भूल गए कि तीन साल पहले तुर्की की मदद केरल ने ही नहीं खुद मोदीजी की सरकार ने तब की थी जब तुर्की में विनाशकारी भूकंप आया था. इस भूकंप में 55 हजार से ज्यादा लोग मारे गये थे. थरूर को शायद पता नहीं है या वे जानबूझकर भूल गए हैं कि केरल ने तो मानवीय आधार पर सिर्फ 10 करोड़ की मदद की थी लेकिन मोदी सरकार ने तो राहत सामग्री से लदे 6विमान, एक 30विस्तर का चलित अस्पताल और आपदा राहत में दक्ष 250कर्मचारी तुर्की भेजे थे. भारत सरकार ने तो कोविड काल में तुर्की को करोडों रुपये की वैक्सीन मुफ्त में दी थी. ऐसे में क्या थरू प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से अनुचित उदारता का आरोप लगा सकते हैं?

दर असल थरूर मोदी जी की फौज में शामल होने को उतावले हैं और उन्हे लगता है कि वे निशिकांत दुबे की तरह ऊल-जलूल बोलकर मोदीजी की नजरों में चढ जाएंगे. थरूर नही जानते कि मोदी जी कांग्रेसियों को शरण भी देते हैं, टिकट भी देते हैं और मंत्री भी बनाते हैं लेकिन कांग्रेसियों से वे झाडू लगवाने का काम लेते हैं. थरूर को मेरी बात पर यकीन न हो तो वे कांग्रेस छोड भाजपा में पांच साल पहले शामिल हुए ज्योतिरादित्य सिंधिया से पूछ लें. सिंधिया इस समय नाच-गाकर, भाजपा दफ्तर में झाडू लगाकर वक्त काट रहे हैं.

शशि थरूर के प्रति मेरे मन में बेहद सम्मान है. मै उनके लेखों और भाषणों का मुरीद हूँ लेकिन उन्हे निशिकांत दुबे जैसी हरकतें करते देख मुझे चिंता हो रही है. बेहतर हो कि लोकसभा में विपक्ष के और कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी शशि थरूर का राजनीतिक धर्मांतरण होने से बचा लें. उन्हे उनकी हरकतों के लिए क्षमाकर केरल में ही उन्हे काम करने का अलसर दें. अन्यथा एक अच्छे-खासे विद्वान नेता का काम तमा हो जाएगा. भाजपा में शशि थरूर को संसद में मेजें थपथपाने या मोदी-मोदी करने के अलावा कोई दूसरा काम मिलने वाला नहीं है. थरूर खुद अपना राजनीतिक जीवन कीछड में डालना चाहते हैं तो उन्हे कोई न रोक सकता है और न बचा सकता है. शशि थरूर को याद करना चाहिए कि वे जिस दल के मंच से राजनीति करने के लिए उतावले हैं उसी दल के नेता ने उनकी दिवंगत पत्नी सुनंदा को 50 करोड की गर्ल फ्रेंड कहा था. थरूर को उसी भाजपा सरकार ने मुकदमों में भी उलझाया था. बहरहाल शशि थरूर के प्रति मेरी शुभकामनायें हैं. वे जहाँ भी रहें सुखी रहें और शशि थरूर बनकर रहें. उन्हें भाजपा का दूसरा निशिकांत दुबे बनकर कुछ भी हासिल नहीं होने वाला. वे घर के रहेंगे और न घाट के।

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Mazdoor Morcha
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