20 एमएलडी का एसटीपी देकर सीएम ने उड़ाया प्रदूषण नियंत्रण का मजाक

20 एमएलडी का एसटीपी देकर सीएम ने उड़ाया प्रदूषण नियंत्रण का मजाक
June 01 15:27 2025

फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सीएम नायब सैनी ने शहर को बीस एमएलडी के नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की घोषणा की तो गोदी मीडिया और पत्तलपाड़ों ने ऐसे ढिंढोरा पीटा मानो अब शहर में सीवरेज की समस्या पूरी तरह हल हो गई। मीडिया में सरकार की तारीफों के पुल बांध दिए गए, यह देखे बिना कि जरूरत तो दो सौ से अधिक एमएलडी के एसटीपी की है। जिन दो एसटीपी की शोधन क्षमता 107 एमएलडी होने का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, वो पूरी ताकत लगा कर भी 90 एमएलडी ही शोधित कर पा रहे हैं और इनका शोधित पानी इतना घटिया है कि किसी भी इस्तेमाल में नहीं लिया जा सकता।

स्थानीय शहरी निकाय विभाग की ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार शहर मेें प्रतिदिन 2820 लाख लीटर (282 एमएलडी) सीवरेज निकलता है। इसके शोधन के लिए शहर में दो प्रतापगढ़ व मिर्जापुर एसटीपी हैं। इन दोनों की क्षमता हाल ही में बढ़ाई गई है। क्षमता बढ़ाए जाने के बाद इन दोनों एसटीपी की क्षमता 97.5 एमएलडी सीवेज शोधन की हो गई है लेकिन प्रतिदिन केवल 90 एमएलडी ही शोधित हो पा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार 192 एमएलडी सीवेज बिना शोधन के ही बहाया जा रहा है। इसके अलावा बादशाहपुर में एक 45 एमएलडी क्षमता का एसटीपी है जो अभी तक चालू नहीं हो पाया है ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार यह प्लांट शोधन के मानक ही पूरे नहीं कर सका है।
इस आधार पर शहर को कम से कम दो सौ एमएलडी क्षमता के एसटीपी की जरूरत है। 20 एमएलडी के एसटीपी निर्माण की घोषणा करते समय सीएम सैनी ने कहा था कि जो भी प्रोजेक्ट बनाए जाएं वो आने वाले तीस- चालीस साल में होने वाले बदलावों के आधार पर बनाए जाएं। बातें तो सीएम साहब बड़ी बड़ी कर गए, लगता है उन्हें फरीदाबाद की सीवरेज निकासी और सीवेज शोधन के आंकड़ों की जानकारी नहीं है, यदि ऐसा है तो यह दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि राज्य का मुखिया इतना बेखबर है। यदि उन्हें जानकारी है तो फिर बीस एमएलडी के एसटीपी की घोषणा करते वक्त तीस-चालीस साल का विजन नहीं प्रस्तुत करते। दरअसल, सैनी भी उसी परंपरा को निभा रहे हैं जो उनसे पहले संघी खट्टर करते आए हैं यानी काम भले ही न करो लेकिन काम का ढिंढोरा जोर शोर से पीटो। पत्तलपाड़ मीडिया तो सवाल करने से रही, वो तो बस सरकार ने जो कहा उसे रामराज की सबसे बड़ी उपलब्धि के रूप में जनता के सामने सफेद झूठ के रूप में पेश कर देगी।

सामान्य बुद्धि वाला व्यक्ति भी जानता है कि पहले तो वर्तमान की आवश्यकता यानी 192 एमएलडी सीवेज क्षमता को विकसित किया जाना चाहिए। बीस एमएलडी का एसटीपी तो ऊंट के मुंह में जीरा ही है। स्थानीय शहरी निकाय मामलों के जानकारों के अनुसार दरअसल, सरकार के पास कोई विजन नहीं है, अधिकारी जो भी उल्टी सीधी राय देते हैं सरकार आंख बंद कर उसे मान लेती है। एफएमडीए में भी अधिकतर वही अधिकारी रिटायरमेंट के बाद भर लिए गए हैं जिन्होंने नगर निगम, हूडा या अन्य विभागों में रह कर शहर की लुटिया डुबोई थी।

सेवानिवृत्ति के बाद लगाए गए इन भ्रष्ट और हरामखोरी में माहिर अधिकारियों को जवाबदेही का भी डर नहीं रह गया है। ऐसे में ये सरकार को ऐसी हवा-हवाई योजनाओं की सलाह देते हैं जिनके पूरा होने से जनता को लाभ हो न हो लेकिन इनकी जेबें भर जाएं, क्योंकि अधिकतर अधिकारी नेताओं की सिफारिश पर लगाए जाते हैं तो जाहिर सी बात है कि ईमानदारी से उनकी भी हिस्सापत्ती पहुंचाते हैं। जब नेता को उसका हिस्सा मिले, अधिकारी मोटे कमीशन डकारे और जनता अंधभक्ति में डूबी हो तो सवाल करने वाला कोई बचता नहीं। तो दो सौ एमएलडी की जगह बीस एमएलडी का एसटीपी बने या बादशाहपुर एसटीपी की तरह धन की बंदरबांट हो जाए सब मुमकिन है। जनता को मूर्ख बनाने के लिए तीस-चालीस साल बाद का ख्वाब दिखाने में पत्तलपाड़ मीडिया तो मौजूद ही है।

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Mazdoor Morcha
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