रिश्वत नहीं दी तो शिक्षा विभाग के क्लर्क ने लटका दिया सेवानिवृत्त शिक्षिका का मेडिकल बिल

रिश्वत नहीं दी तो शिक्षा विभाग के क्लर्क ने लटका दिया सेवानिवृत्त शिक्षिका का मेडिकल बिल
December 09 11:30 2024

अनूप चौधरी
फरीदाबाद। भ्रष्टाचार और लूट कमाई के लिए बदनाम शिक्षा विभाग के अधिकारी-कर्मचारी इतने गिर चुके हैं कि वह रिटायर्ड बुजुर्ग शिक्षकों के मेडिकल बिल पास करने में भी मोटी रिश्वत के जुगाड़ में लगे हुए हैं। समाज को नैतिक शिक्षा का पाठ पढ़ाने वाले जो बुजुर्ग शिक्षक यह अनैतिक कार्य नहीं करते तो उनके बिल गायब करने से लेकर फाइल चंडीगढ़ तक भेज कर उन्हें हतोत्साहित किया जाता है। अगर ढंग से जांच की जाए तो ऐसे भी केस सामने आ सकते हैं जिनमें भुगतान होने की आशा ही बुजुर्ग शिक्षक ने छोड़ दी हो और उसके बाद बिल पास कर भुगतान निकाल कर्मचारियों से लेकर अधिकारियों के बीच बंदरबांट की गई हो।

ताजा मामला 70 वर्षीय रानी देवी का है। वह राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय एनआईटी एक नंबर (मैट्रो) से हिन्दी अध्यापिका के पद से सेवानिवृत्त हैं। उनके 75 वर्षीय समाज के गण्यमान्य नागरिकों में शामिल हैं। रानी देवी ने 26 जुलाई 2021 को अपने मेडिकल बिल की चार फाइल जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी बीईईओ के दफ्तर में जमा करवाई थीं जिनका क्रमांक 1635 था। बीईईओ कार्यालय से 27-07-2021 को चारों फाइल जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी दफ्तर (क्रमांक 796 ) में भेज दी थी। डीलिंग क्लर्क ने फाइल लटका दी थी क्योंकि शिक्षिका ने उसे नजराना नहीं दिया। तब से लेकर आज तक बुजुर्ग महिला के मेडिकल बिल पास नहीं हो सके और मामला पंचकूला मुख्यालय पहुंच चुका है।

रानी देवी घुटनों में दर्द के कारण चलने-फिरने में असमर्थ हैं। ऐसे में उनके पति बिल पास कराने के लिए बीते चार साल से बीईईओ-डीईईओ कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं। पीडि़त परिवार के अनुसार जुलाई 2021 में सारे मूल दस्तावेजों के साथ उन्होंने बीईईओ कार्यालय में मेडिकल बिल लगाए थे। तब से ही डीलिंग क्लर्क ने नजराना न मिलने के कारण उनकी फाइलें कमी न होने के बावजूद लटकाता रहा। वह फाइल में कोई आपत्ति नहीं लगा सका जब उसे लग गया कि रिश्वत का पैसा नहीं मिलने वाला तो उसने फाइल ही गायब कर दी। अगस्त 2024 में पीडि़त को बताया गया कि उसकी फाइल गायब है दोबारा बिल लगाकर पूरे दस्तावेज के साथ आवेदन करना पड़ेगा।

रानी देवी और उनके पति ने भागदौड़ का स्कूल से संपर्क कर बिल की प्रति आदि दस्तावेज दोबारा तैयार कर 9 सितंबर 2024 को फाइल डीलिंग क्लर्क कृष्ण गोपाल को सौंपी, जिसकी पावती 2985 है। फाइल लेने के बाद कृष्ण??? गोपाल ने उनके सामने ही दस्तावेजों की जांच की और बहाना बनाते हुए बोला कि स्कूल वालों ने फाइल पर वर्कआउट नहीं किया है। इस पर रानी देवी के पति ने स्कूल प्रिंसिपल को फोन कर कृष्ण गोपाल से बात कराई। कृष्ण गोपाल का कुतर्क सुनकर स्कूल के प्रिंसिपल राजेंद्र अग्रवाल नाराज हो गए और सारी औपचारिकताएं पूरी होने का दावा किया। इस पर कृष्ण गोपाल ने आवेदक को शुक्रवार को आने को कहा और आश्वासन दिया कि उसका बिल पास हो जाएगा। लेकिन 10 सितंबर को सुबह करीब पौने ग्यारह बजे कृष्ण गोपाल ने रानी देवी के पति को फोन कर कहा कि फाइल में से 1 लाख 16 हज़ार 493 रुपये का बिल गायब है। उन्होंने सभी बिल लगाए जाने की बात कही लेकिन कृष्ण गोपाल ने उनकी एक न सुनी, इस पर वह तुरंत कार्यालय पहुंच गए लेकिन डीलिंग क्लर्क अपनी बात पर ही अड़ा रहा, वह दिन भर अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच चक्कर लगाते रहे लेकिन किसी ने उनकी बात पर ध्यान ही नहीं दिया। डीलिंग क्लर्क की कारगुजारी से क्षुब्ध होकर वह डीईईओ अजीत सिंह श्योराण से मिले लेकिन उन्होंने भी कृष्ण गोपाल का पक्ष लेते हुए उन्हें बैरंग लौटा दिया। कोई सुनवाई न होने पर उन्होंने इसकी लिखित शिकायत जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी से की और इसकी प्रति जिला उपायुक्त, मंडल आयुक्त, निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग हरियाणा और मुख्य सचिव हरियाणा को ईमेल के जरिए भेज दी।

मामला ऊपर तक पहुंचने से कृष्ण गोपाल अपनी पर उतर आया। उसने गायब मेडिकल बिल की सत्यापित कॉपी स्कूल से लाने को कहा। आवेदक ने एक बार फिर स्कूल से मेडिकल बिल की कॉपी निकलवाई और प्रिंसिपल राजेंद्र अग्रवाल से सत्यापित करा डीलिंग क्लर्क को सौंप दी। बिना रिश्वत काम नहीं करने के आदी डीलिंग क्लर्क ने आपत्ति लगाते हुए बिल की मूल प्रति की मांग कर दी, जिसके लिए आवेदक ने असमर्थता जताई। इसके बाद दफ़्तर में एक दलाल उनके पास आया और उन्हें एसओ से मिलने की सलाह देते हुए कहा कि आप उनसे (रिश्वत देकर) सेटिंग कर लो। समझाने लगा कि डीलिंग क्लर्क को नजराना दे दो तो फाइल यहीं पास हो जाएगी नहीं तो बेवजह पंचकूला के चक्कर काटने पड़ेंगे, उसमें भी मोटा खर्च होगा, बेहतर है यहीं ले देकर निपटारा कर लो।

संभ्रांत नागरिक होने के कारण उन्हों ने रिश्वत देने से इनकार कर दिया और एक बार फिर स्कूल से न केवल खोया हुआ बिल बल्कि बाकी सारे दस्तावेजों की पूरी फाइल ही बनवाई। सारी औपचारिकताएं पुख्ता तौर पर पूरी करने के बाद एक अक्तूबर 2024 को बीईईओ कार्यालय में मेडिकल बिल फाइल जमा करवाई, इसका क्रमांक 530 है। इसी दिन क्रमांक 531 पर मेडिकल बिल की दूसरी तीन फाइलें भी जमा करवाईं। बीईईओ कार्यालय से सभी फाइलें सात अक्तूबर को डीईईओ दफ़्तर पहुंच गईं जहां उनकी रिसीविंग क्रमांक 3560 और 3561 पर दर्ज की गई। इस बार भी किसी भी फाइल में कोई कमी नहीं पाई गई। बिना जेब भारी हुई कोई काम नहीं करने वाले डीलिंग क्लर्क ने कहा कि बिल जमा करवाने में विलंब के कारण अब इसकी स्वीकृति यहां से नहीं बल्कि पंचकूला से मिलेगी, इसलिए फाइलें पंचकूला भेजी जा रही हैं।

इसके बावजूद डीलिंग क्लर्क ने फाइलें भेजने में भी खेल किया। एक अक्तूबर 2024 को जमा की गई फाइल काफी विलंब के बाद विभाग की मेडिकल ब्रांच पंचकूला भेजी गईं। आवेदक वहां पहुंचा तो सुपरिंटेंडेंट ने उन्हें बताया कि मेडिकल बिल की फाइल पर एसओ के हस्ताक्षर और मुहर नहीं हैं, यह डीलिंग क्लर्क की लापरवाही से हुआ है। आवेदक ने उन्हें बताया कि डीलिंग क्लर्क ने जानबूझ कर ऐसा किया है यदि वह उसे रिश्वत दे देते तो फाइल वहीं पास हो जाती यहां नहीं भेजी जाती, सुपरिंटेंडेंट भी मौन साध गए। आवेदक ने इसकी शिकायत निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग और अतिरिक्त निदेशक मौलिक शिक्षा विभाग से की है। अब देखना है कि ये आला अधिकारी उस भ्रष्ट डीलिंग क्लर्क और उसके चट्टे बट्टों के खिलाफ क्या कार्रवाई करते हैं।

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Mazdoor Morcha
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