करनाल। चालीस साल से न्याय की तलाश में भटक रहे करनाल के घरौंडा हलके के ऊॅंचा समाना गांव के गरीब परिवारों ने गांव के बाहर धरना शुरू कर दिया। पांच दिन तक उनका धरना जारी रहेगा। अभी तक राजनीतिक दलों ने उनका साथ नहीं दिया हैं। पांच दिन बाद वह धर्म परिवर्तन कर सकते हैंं।
धरना दे रहे परिवारों की अगुवाई कर रहे राजकुमार कौशिक का कहना है कि आजादी के 78 साल बाद भी हम आजाद नहीं हैं। गरीब परिवारों को न्याय नहीं मिल रहा हैं। डा. अंबेडकर द्वारा बनाए संविधान का फायदा आजादी के 78 साल बाद भी गरीब लोगों को नहीं मिल रहा है। सरकार ने भले ही गरीबों को घर बनाने के लिए प्लाट दिए लेकिन उन पर दबंगों ने कब्जा कर लिया। आरक्षण के बल पर बड़े पद पर पहुंचे अफसर भी अपने बर्ग को न्याय दिलवाने की बजाए उनको प्रताडि़त कर रहे हैं। चालीस साल से न्याय की लड़ाई लड़ रहे दलित तथा ब्राह्मण समुदाय के परिवारों ने निराश होकर हिंदू धर्म छोड़ कर मुस्लिम धर्म को अपनाने का निर्णय लिया हैं। यह परिवार अब प्रशासन को जगाने के लिए धरना शुरू कर चुके हैं। धरना देने वालों में शामिल महिलाएं बुजुर्ग व पुरुष हाथों में तख्तियां लेकर न्याय की गुहार लगा रहे हैं।
करनाल जिले के ऊंचा समाना गांव के दर्जन से अधिक गरीब परिवार सरकार, प्रशासन द्वारा सुनवाई नहीं करने से परेशान हैं। इस गांव के दो परिवार ऐसे हैं जिन्हें 1984 में बीस सूत्री कार्यक्रम के तहत 100-100 गज के प्लाट मिले थे। लेकिन आज तक इन परिवारों को प्लाट पर कब्जा नहीं मिल सका है। ये परिवार राष्ट्रपति एपीजे अब्द्ल कलाम, मौजूदा राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू, प्रधामंत्री अटलविहारी बाजपेई, नरेंद्र मोदी सहित मुख्यमंत्री बंसी लाल से लेकर नायाब सिंह सैनी से मिल चुके हैं। इनके आदेशों के बाद भी प्रशासन कब्जा धारियों तथा भू माफिया से कब्जा नहीं हटवा सका हैं। कब्जाधारियों के खिलाफ एससी-एसटी एक्ट के तहत थाना मधुवन में मामला दर्ज होने के छह साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई हैं।
फरियादियों का कहना है कि आरोपियो पर स्थानीय एमएलए और डीएसपी का आशीर्वाद हैं। डीएसपी ने उल्टे फरियादियों के खिलाफ पर्चा दर्ज करवा दिया। धरना स्थल पर राजकुमार, सूरज भान, देवी, कुलदीप, रोशनी, आशा, कोमल, कविता, तथा जोगिंद्रो सहित तमाम गांव वाले शामिल थे।