मनीष आजाद भारत द्वारा एक झटके में लाखों भारतीय अप्रवासियों को वापस बुला लेने का दांव अमेरिका को गहरी चोट दे गया है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा किसी तरह से भारत को खुश करने की कोशिश की जा रही है। …. तेजी से बदलते घटनाक्रमों के बीच आज अमेरिका की जिला अदालत ने ट्रम्प के उस आदेश पर रोक लगा दी जिसमे अफ्रीका के निवासियों के लिए, सिटिजनशिप बर्थराइट खत्म कर दिया गया था। इससे अमेरिका में रह रहे अफ्रीकी देशो के लोगो को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था। विश्व मे मानव अधिकार, भाईचारा, समानता और नागरिक अधिकार लिए समर्पित, और वसुधैव कुटुम्बकम के प्रणेता, श्री नरेंद्र मोदी की सलाह के बगैर उठाया गया यह कदम, भारत सरकार को नागवार गुजरा। पूर्व राष्ट्रपति ओबामा और बिडेन, माननीय मोदी जी की सहमति के बिना कोई कदम नही उठाते थे। सूत्रों के अनुसार, मोदी जी के कठोर एक्शन से घबराए ट्रम्प ने अपने आदेश को खुद निरस्त करने का मन बना लिया था।
परन्तु व्हाइट हाउस के सलाहकारों ने सम्मानजनक रास्ता निकालते हुए, एक लोकल कोर्ट से उस आदेश को निरस्त करवा दिया। वैश्विक कूटनीति पर निगाह रखने वाले राजनीतिक पंडितो की मानें, तो दरअसल अपने राजनीतिक हितों को कोर्ट के माध्यम से हैंडलिंग की तकनीक भी मूलत: मोदी जी द्वारा ईजाद की गई है। तो उनके तरीके से काम करके, ट्रम्प प्रशासन ने नाराज मोदी जी को मनाने का एक संकेत भी दिया है, जो अब भी उनका फोन नही उठा रहे। …. हैरान परेशान ट्रम्प प्रशासन समझ ही नही पा रहा, की ष्ट्र्र-हृक्रष्ट के पथ प्रदर्शक होने के बावजूद जब वही नीति अमेरिका में लागू की गई, तो नाराज होने का क्या तुक है। इस पर हमारे संवाददाता को सुप्रसिद्ध फि़ल्म क्रिटिक, पण्डित विस्मृत भटक ने बताया कि हिंदी भाषा ठीक से न जानने के कारण ट्रम्प और उनकी टीम, ये भारी गलती कर गए। दरअसल अमेरिकी नीति नियंता “हम करें तो रासलीला-तुम करो तो कैरेक्टर ढीला” नामक लोकप्रिय संघगीत का अर्थ, समझ ही न पाए। … उधर अमेरिका के तमाम एयरपोर्ट पर भारतीयों की भीड़ उमड़ी हुई है। ऑपरेशन घर वापसी के नाम से प्रसिद्ध हो चुका यह माइग्रेशन, आजाद भारत के इतिहास की सबसे बड़ी वापसी होगी। हालात यह है कि एयरलाइंस की टिकट न मिलने के कारण बहुत से लोग कार्गो प्लेन में भर-भर कर भारत लौटने की कोशिश में हैं। कुछ तो प्लेन के बोनट और कुछ टायरों पर भी बैठे है। कुछ ने निजी बुलबुलों का इंतजाम किया है। एटलांटा में साइबर सिक्यूरिटी एक्सपर्ट रहे एक दम्पत्ति तो सीधे तैर कर भारत पहुच रहे हैं। …. भयंकर धक्का मुक्की का वातावरण है। यहां भारतीयों की खुशी उफान पर है, लोग बल्लियों उछल रहे हैं। संवाददाता गोदी मनीष ने अपनी आंखों से देखा, कि अधिकांश लोगो को अपने परिवार जनों के उत्साह को नियंत्रण में रखने के लिए, स्थानीय अधिकारियों से उन्हें चेन में बांधने का आग्रह करना पड़ा है। इससे अमेरिका में चेन, रस्सी और हथकड़ी की कमी होने की संभावना है, यह एक नया संकट होगा। …. बहरहाल सभी आने वालों को भारत मे अच्छा स्वागत मिले इसकी तैयारियां जोरों पर हैं। उन्हें एयरपोर्ट पर ही रजिस्ट्रेशन कर 5 किलो पौष्टिक चावल और कुम्भ का पैसिंजर टिकट दिया जाएगा। इसके लिए संसद द्वारा 8 लाख करोड़ का अतिरिक्त बजट स्वीकृत किये जाने की खबर है। …. छपते छपते- सूचना है की अमेरिकी प्रशासन ने मोदी जी को फोन न उठाता देखकर, सात माफीनामे ड्राफ्ट किये है। जिसमे उन्होंने स्वयं को मोदी जी का भटका हुआ चेला बताते हुए, एक और मौका देने की गुहार लगाई है। माफ किये जाने पर ट्रम्प ने आजीवन क्रांति से किनारा कर लेने का आश्वासन दिया है।