फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) हाल ही में अतिरिक्त नगर निगमायुक्त (एसीएमसी) का चार्ज संभालने वाली आईएएस सालोनी शर्मा ने भले ही काम पूरी तरह से शुरू नहीं किया हो लेकिन प्रत्येक ठेकेदार से उनके नाम की दो प्रतिशत कमीशन की वसूली शुरू हो चुकी है, भले ही यह रकम उन तक पहुंचे या न पहुंचे। पूर्व एसीएमसी स्वप्निल पाटिल के लिए ठेकेदारों-कर्मचारियों से वसूली करने वाला दलाल प्रेम कुमार शर्मा अब सालोनी मैडम के नाम पर लूट खसोट कर रहा है। निगम में चर्चा है कि दल्ला प्रेम नई नवेली आईएएस के नाम पर वसूली कर तो रहा है लेकिन उन्हें रिश्वत के नाम पर ऊंट के मुंह में जीरा ही पकड़ा रहा है। जब तक मैडम अपने ‘गैर सरकारी अधिकारों’ की समझ पूरी तरह से हासिल करेंगी तब तक खाऊ प्रेम उनके नाम पर वसूले गए लाखों रुपये डकार चुका होगा।
निगम में फिक्सर प्रेम शर्मा की वसूली और चाटुकारिता के टैलेेंट के खूब चर्चे हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि वैसे तो प्रेम शर्मा निरीक्षक है लेकिन कभी अपने पद पर रहते हुए काम नहीं करता, करे भी कैसे सफाई कर्मचारी यानी झाड़ू लगाने की योग्यता वाले व्यक्ति को निरीक्षक बना दिया जाए तो वह क्या लिखा पढ़ी करेगा और क्या सरकारी चिट्ठियां के जवाब दे पाएगा। यही कारण है कि वह अपनी ड्यूटी नहीं करता बल्कि निगमायुक्त, एसीएमसी जैसे आला अधिकारियों का एजेंट बन कर ठेकेदार और जेई से लेकर एक्सईएन, एसडीओ, चीफ इंजीनियर तक पर रौब जमा कर वसूली करना पसंद करता है। आला अधिकारी भी सीधे रिश्वत लेने के बजाय प्रेम शर्मा जैसा दल्ला रखना पसंद करते हैं। प्रेम में तो इससे भी ज्यादा टैलेंट हैं, वसूली ही नहीं, साहब-मैडम के व्यक्तिगत शौक, ख्वाहिशें और जरूरतें पूरी करने के लिए भी हमेशा हाजिर रहता है और इसके लिए ठेकेदार से लेकर साहब के मातहतों को भी काम पर लगाने में माहिर है। निगम कर्मचारी चर्चा करते हैं प्रेम शर्मा के इसी टैलेंट की बदौलत जो भी अधिकारी जाता है, वो आने वाले दूसरे अधिकारी को इस दल्ले के हवाले कर जाता है। ये अलग बात है कि प्रेम उस अधिकारी की दलाली के साथ कई अन्य कर्मचारियों-ठेकेदारों के जा बेजा काम करा कर अपना रसूख बनाने के साथ नोट भी छापता है।
एसीएमसी सालोनी शर्मा के नाम पर दो प्रतिशत वसूली से ठेकेदार दबाव में हैं। कुछ ठेकेदारों का कहना है कि एसीएमसी का कमीशन एक प्रतिशत फिक्स था लेकिन मैडम के आने के बाद प्रेम जबरन दो प्रतिशत वसूल रहा है। मैडम से मिलने का प्रयास करो तो प्रेम शर्मा ही सबसे बड़ी बाधा बन जाता है, यानी बिना प्रेम के मैडम से कोई संवाद नहीं हो सकता। वैसे ही ठेकेदारों से निर्धारित कमीशन के अलावा एसओपी के नाम पर, तो कभी बिल कटौती का डर दिखा कर वसूली की जा रही है। कमीशन ही इतना हो जाता है कि कोई भी ठेकेदार मानक के अनुरूप काम नहीं कर सकता, आखिर उसे भी तो परिवार चलाना है। ऐसे में एसीएमसी की दोगुनी की गई कमीशन राशि भी विकास कार्य में कटौती करके ही तो निकाली जाएगी। पैसा चाहे प्रेम शर्मा की जेब में जाए या मैडम सालोनी शर्मा के पर्स में अंतत: घटिया निर्माण के रूप में नुकसान तो जनता का ही होना है।
मोदी-संघ के चहेते ‘यशस्वी’ सीएम नायब सैनी के राज में प्रदेश के सभी शहरों के नगर निगम, नगर निकायों में भ्रष्टाचार और लूट खसोट खुलेआम चल रही है। खास बात यह कि भ्रष्टाचार या हेराफेरी का खुलासा होने पर सैनी सरकार के स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल की गाज वीरेंद्र कर्दम जैसे उन कर्मचारियों पर ही गिरती है जो थोड़ा बहुत काम करते हैं।
इसका अर्थ यह नहीं है कि बीके कर्दम हरामखोरी नहीं करता था, करता तो था लेकिन वो ओमदत्त की तरह सारा डकारने के बजाय जनता की सहूलियत भर का काम भी करवा ही देता था। इसके विपरीत प्रेम शर्मा की तरह रोज भ्रष्टाचार के नए रिकॉर्ड बनाने वाले कर्मचारी न सिर्फ मनपसंद जगह पर जमे रहते हैं बल्कि उन्हें पदोन्नति जैसे इनाम भी मिलते हैं। सफाई कर्मचारी पर भरती हुआ प्रेम कुमार शर्मा अधिकारियों के लिए वसूली, दलाली करते हुए कराधान शाखा में निरीक्षक पद तक पहुंच गया। उसकी लूट कमाई के टैलेंट के दीवाने अधिकारियों ने उसे पदोन्नत करने में रूल्स व रेगुलेशंस को भी दरकिनार कर दिया। सरकार ने सभी कर्मचारियों के लिए राज्य कंप्यूटर पात्रता परीक्षा (एससीईटी) पास करना अनिवार्य कर दिया, यह परीक्षा उत्तीर्ण किए बिना पदोन्नति पाने वाले को बढ़ा हुआ वेतन नहीं देने का नियम है। अधिकारियों ने अपने वसूली एजेंट को इस परीक्षा से न केवल बचा रखा है बल्कि नियम तोड़ कर बढ़ा हुआ वेतन भी जारी कराया जो आज भी उसे बिना परीक्षा पास किए मिल रहा है। उसके लिए यह नियम पहली बार नहीं तोड़ा गया है। सफाई कर्मचारी से लाइब्रेरी अनुचर बनाने का कोई नियम नहीं, बावजूद इसके उसे यह पद दिया गया। उसने कभी लाइब्रेरी की शक्ल नहीं देखी बस अधिकारियों के कलेक्शन एजेंट के रूप में उनका पीए बन कर दफ्तर में बैठने लगा। चालाक इतना कि आईएएस से कम अधिकारियों के पास नहीं जाता यानी कमिश्नर या एसीएमसी का पीए बन कर लूट कमाई करता है।
अधिकारी समझते हैं कि वे प्रेम शर्मा का इस्तेमाल कर रहे हैं जबकि प्रेम शर्मा उनका इस्तेमाल करता रहा है। नगर निगम ट्रैक्टर घोटाले में फंसे पूर्व असिस्टेंट निगमायुक्त इंद्रजीत कुलेरिया के पास ईओ ब्रांच का भी चार्ज थी। तब प्रेम ने उन्हें अपने जाल में फंसा कर बिना कोई वेकैंसी ही अपने भांजे सुधीर को नगर निगम मेें नौकरी लगवा दी। इसके बाद उसे अधिकारियों की सबसे मोटी कमाई वाली विज्ञापन शाखा में तैनाती दिलवा दी ताकि उसके जरिए वहां चल रही लूट कमाई की जानकारियों प्रेम को मिलती रहें और इसी के आधार पर वह भी अधिकारियों के नाम पर हिस्सापत्ती ऐंठे। सालोनी शर्मा यदि प्रेम शर्मा को अपने कार्यालय से नहीं हटातीं तो समझना गलत नहीं होगा कि पूर्व एसीएमसी स्वप्निल पाटिल की तरह उन्होंने भी प्रेम को अपना एजेंट तैनात कर लिया है और ठेकेदारों से जो दो प्रतिशत वसूली की जा रही है वो मैडम शर्मा के ही इशारे पर ही हो रही है। ये सब प्रदेश के स्थानीय निकाय मंत्री विपुल गोयल के गृृह जनपद के नगर निगम में हो रहा है, वैसे इसमें आश्चर्य नहीं होना चाहिए जब मंत्री जी खुद ही ठेका दिलाने के लिए ठेकेदार से डिफेंडर की मांग कर रहे हों तो उनके महकमे के अधिकारी क्यों न भ्रष्टाचार को शिष्टाचार समझ कर हरामखोरी करें।