तीन वर्ष पूर्व इसी भारत को खुले में शौच से ‘मुक्त’ कर दिया था
फरीदाबाद (म.मो.) स्वच्छता टैक्स के द्वारा जनता से भारी-भरकम लूट के बावजूद यहां कहीं भी सफाई नजर नहीं आती। शौचालयों के आभाव में गरीब जनता को मजबूरन खुले में शौच के लिये जाना पड़ता है। महिलाओं के लिये तो यह प्रक्रिया कई बार बहुत ही घातक सिद्ध होती है। शौचालय बनाने के नाम पर इस शहर में भी करोड़ों रुपये के चल व अचल शौचालय बनाये गये थे। इस काम के लिये स्मार्ट सिटी फंड का भी इस्तेमाल खूब जमकर किया गया।
इस काम के लिये राजनेताओं के भाई-भतीजों एवं लगुओं-भगुओं को अच्छे मोटे-मोटे ठेके दिये गये। इसके बदले ठेकेदारों ने रकमें तो मोटी-मोटी वसूल कर ली लेकिन शौचालय कहीं नजर नहीं आ रहे और जो नजर आ भी रहे हैं वे किसी काम के नहीं। सबके सब कबाड़ा बने पड़े हैं। एनएच पांच स्थित सेंट जोसेफ स्कूल के लगभग सामने पांच शौचालयों का एक स्थाई सेट तैयार किया गया था। करीब दो साल पूर्व यानी कि उसके तैयार होने के तुरन्त बाद ‘मज़दूर मोर्चा’ ने इसकी दुर्दशा का सचित्र विवरण प्रकाशित किया था। इसी तरह कई स्थानों पर खड़े किये गये चल शौचालय अब कहीं खड़े करने लायक भी नहीं रह गये हैं।
पूरी तरह से अपनी साख खो चुके नगर निगम को चुस्त-दुरूस्त करने की बजाय खट्टर सरकार ने हजारों-करोड़ रुपया खर्च करने का काम स्मार्ट सिटी कम्पनी लिमिटेड को सौंप दिया। यह कम्पनी नगर निगम से भी अधिक भ्रष्ट एवं निकृष्ट साबित हुई। शौचालयों का कारोबार शुरू-शुरू में इसी कम्पनी को सौंपा गया था लेकिन जब इसकी भी पोल खुल गई तो सरकार ने यह धंधा नगर निगम के हवाले कर दिया। पैसे खाने के सिवाय स्मार्ट सिटी कम्पनी ने कुछ नहीं किया था और अब नगर निगम भी कुछ करने वाला नहीं है। हां, शायद इसके माध्यम से कुछ बचा-खुचा माल इनके हिस्से भी आ जाय।