मनीष आजाद यूट्यूब चैनल खोलकर बैठे नेताओं के सिचुएशन रूम में हंगामा मच गया। अब तक वे सोच रहे थे कि भूम-भाम का इंटरनेशनल टूर्नामेंट, केवल ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच है।
आलोक बाजपेयी यह संघर्ष केवल एक क्षेत्रीय युद्ध नहीं है; यह अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की विश्वसनीयता की परीक्षा भी है। यदि दुनिया चुप रहती है, तो यह मिसाल भविष्य में और
अरुण माहेश्वरी ईरान के बारे में ट्रंप की योजना के सारे आधार इसी बीच धराशायी हो चुके हैं। 1. ट्रंप की योजना का मूलाधार यह था कि वह खामनाई की
प्रभात पटनायक पिछले दिनों डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रस्तावित टैरिफ नब्बे दिन के लिए टाल दिए। लेकिन, चाहे आज हो या नब्बे दिन के बाद, भारत जैसे देशों को ट्रंप
योगेन्द्र यादव मोदी राज में किसान की यही नियति बन गई है। एक मुसीबत से जान छूटी तो दूसरी तैयार। ऐतिहासिक किसान आंदोलन ने तीन किसान विरोधी कानूनों को हराया।
महेंद्र मिश्र आखिर पीएम मोदी अमेरिका गए क्यों यह अभी भी बड़ा सवाल बना हुआ है? क्योंकि अभी तक भारत को कुछ हासिल होता हुआ नहीं दिख रहा है। सिवाय
मनीष आजाद भारत द्वारा एक झटके में लाखों भारतीय अप्रवासियों को वापस बुला लेने का दांव अमेरिका को गहरी चोट दे गया है। ट्रम्प प्रशासन द्वारा किसी तरह से भारत
पंकज श्रीवास्तव डोनाल्ड ट्रंप जी दुबारा अमेरिका के राष्ट्रपति क्या बनने जा रहे हैं,अकड़ के भुट्टा हुए जा रहे हैं । सुना है कि 20 जनवरी को शपथग्रहण समारोह में
शैलेंद्र चौहान नेतन्याहू से ओर्बन तक, वैश्विक दक्षिणपंथी नेताओं ने ट्रम्प की जीत का जश्न मनाया। फासीवादी चेहरे वाले ये नेता उस व्यक्ति को बधाई देने के लिए कतार में