फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) बीते दिनों सिचाई एवं जल संसाधन विभाग के बारह जूनियर इंजीनियरों को नगर निगम फरीदाबाद में एक साल के लिए डेप्यूटेशन पर तैनाती दी गई। नगर निगम के इतिहास में पहली बार इस तरह से कनिष्ठ अभियंताओं का तबादला किया जाना महकमे के मंत्री विपुल गोयल के मास्टर स्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है। जानकारों के अनुसार मंत्री जी एचकेआरएन के ठेका जेईओं को उनकी औकात में लाने के इरादे से निगम को जल्द ही रेगुलर जेई से भरने की तैयारी कर रहे हैं। ये बारह जेई तो पहली खेप हैं जल्द ही और भी जाएंगे। सुधी पाठकों को याद दिला दें कि बीते माह नगर निगम, एफएमडीए आदि के एचकेआरएन वाले ठेका जेईओं ने बडख़ल विधायक धनेश अदलखा का फूल मालाओं से स्वागत किया था। दरअसल, अदलखा ने इनको स्थायी कर पदोन्नति करने का झुनझुना थमाया था। सब जानते हैं कि स्थायी कर्मचारियों को हटा कर ठेका पद्धति पर भर्ती इसी संघी भाजपाई सरकार ने शुरू की थी, यह सब कर्मचारियों के वेतन, भविष्य निधि आदि फंड व अन्य सेवा-सुविधाओं से वंचित के लिए किया गया था। सरकार इस पर अभी भी कायम है, ऐसे मेें अदलखा ने हास्यास्पद सी मांग सरकार से कर दी और ठेका जेई उसकी लॉलीपॉप पर लहालोट होकर अपने मंत्री को भूल बैठे। मजदूर मोर्चा ने 15 से 21 सितंबर के अंक में ठेका जेई के लिए मंत्री से बड़ा विधायक धनेश अदलखा शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। संभवतय: खबर का संज्ञान लेकर महकमे के मंत्री विपुल गोयल ने गृह जनपद के नगर निगम को अपना जलवा दिखाने की ठान ली है।
निगम में तीस से पैंतीस हजार रुपये वेतन पाने वाले ठेका जेई हों या साठ-पैंसठ हजार पाने वाले स्थायी जेई इनके खर्चे कमाई से कहीं ज्यादा हैं। सब हर साल छह महीने में लेटेस्ट आईफोन, या लाख डेढ़ लाख कीमत वाले फोल्ड आदि प्रकार के एक नहीं दो दो फोन खरीदते रहते हैं। अधिकतर जेई कम से कम तीस लाख वाली बड़ी चार पहिया गाडिय़ों से चलते हैं और क्योंकि दूसरे जिलों में रहते हैं तो प्रतिमाह ईंधन पर ही पंद्रह से बीस हजार रुपये उड़ा देते हैं। पचासों हजार के ब्रांडेड जूते-कपड़े आए दिन खरीद बदलते रहते हैं। जाहिर है कि आमदनी अठन्नी खर्चा दो रुपैया की पूर्ति इसी नगर निगम की सेवा करने से होती है। निगम की इसी मोटी कमाई की लालच में चाहे आईएएस मोना ए श्रीनिवास हों या अन्य कर्मचारी यहां तैनाती पाने को लालायित रहते हैं। बताया जा रहा है कि सिंचाई विभाग के जेई भी निगम की मोटी मलाई उतारने की चाह में यहां आना चाह रहे होंगे। निगम में यह भी चर्चाएं है कि सहायक अभियंता अमित चौधरी और सुरेन्द्र हुड्डा ने फरीदाबाद में ही बने रहने के लिए मंत्री जी को लाखों का चढ़ावा चढ़ाया है। अब एक्सईएन नितिन कादियान भी अपना तबादला रुकवाने के लिए मंत्री के पीए प्रशान्त के पीछे बस्ता लिए डोलता घूम रहा है।
अपने मुंह से निवाला छीने जाने से आक्रोशित एचकेआएन अभियंताओं में यह चर्चा जोर शोर से हो रही है कि निगम में एक साल की तैनाती देने के एवज में इन लोगों ने मंत्री जी को पंद्रह पंद्रह लाख रुपये का चढ़ावा चढ़ाया है। क्योंकि इस तरह के लेनदेन में न तो लेने वाला कहता है कि उसने पैसा लिया और न ही देने वाला बताता है कि उसने दिया, इसलिए लेनदेन तो स्पष्ट नहीं है लेकिन जिस तरह से मंत्री के पीए प्रशांत के बारे में आम शोहरत है कि वह बिना लिए तो कटी उंगली पर पेशाब भी नहीं करता, और जिस तरह आनन फानन सभी की रिलीविंग- तैनाती में उसने जो भूमिका निभाई उससे ठेका जेईओं की बात में दम तो नजर आता है। मज़दूर मोर्चा इन चर्चाओं की न पुष्टि करता है न ही खंडन।
चर्चा यह भी है कि विपुल गोयल ने इन स्थायी जेई को तैनाती देकर ठेका जेई को उनके असली काम तक सीमित कर उनकी कमाई समाप्त करने का मन बनाया है। अभी तक ये ठेका जेई विकास कार्यों के लिए टेंडर लगाते थे, मीजरमेंट बुक भरते थे, बिल आदि भी यही लोग बना कर पास करा लेते थे, जिसके लिए ये अधिकृत नहीं थे। बिना उत्तरदायित्व के इन अधिकारों का उपयोग कर ये ठेका जेई लाखों रुपये पीट रहे थे। स्थायी जेई आ जाने से अब ये सारे काम उन लोगों के जिम्मे सौपा जाएगा। ठेका जेई अब केवल इन स्थायी जेई की सहायक के रूप में काम करेंगे यानी अब तक जो कमीशनबाजी और लूट कमाई वो करते थे अब स्थायी जेई के हाथों में चली जाएगी।
निगम सूत्रों के अनुसार इन बारह को मिलाकर नगर निगम में वर्तमान में स्थायी जेई की संख्या तीस पहुंच चुकी है जबकि ठेका जेई अभी भी लगभग पैंतालीस हैं। सूत्र बताते हैं कि मंत्री गोयल हर वार्ड पर एक स्थायी जेई लगा कर सारे ठेका जेई को खुड्डेलाइन लगाने की तैयारी में हैं, इसलिए जल्द ही पंद्रह अन्य स्थायी जेई भी दूसरे विभागों से यहां लाए जाएंगे। सारे लूट कमाई के काम इन स्थायी जेई को ही दिए जाएंगे, आखिर उन्हें भी तो पंद्रह लाख की भरपाई करानी होगी। जानकार कहते हैं कि मंत्री विपुल गोयल ने यह कदम उठाकर गूजर के चेले अदलखा को जता दिया है कि नगर निगम का वाली वारिस विपुल गोयल ही है। दूसरा निशाना ठेका जेई पर साधा है कि गलत लोगों को फूल माला पहना कर मंत्री से पंगा लेना महंगा ही पड़ेगा। इसके अलावा यदि पंद्रह लाख वाली बात में कुछ सच्चाई है भी तो करीब पौने दो करोड़ की चंदा भी मंत्री जी ने मुफ्त में हासिल कर लिया।