क्रांतिकारी मजदूर मोर्चा प्रोफ़ेसर निक मेनार्ड, इंग्लैंड के प्रतिष्ठित सर्जन हैं और ऑक्सफ़ोर्ड युनिवेर्सिटी में पढ़ाते हैं. वे, बेइंतेहा ज़ुल्म और बर्बरता झेल रहे फिलिस्तीनियों के दु:ख-दर्द बांटने, उन्हें मेडिकल सेवाएँ देने, 2010 से ही गाजा जाते रहे हैं. अभी हाल में, वे, गाजा गए थे और ‘गाजा ह्युमेनीटेरियन फोरम’ नाम से, भूख से मर रहे फिलिस्तीनियों को खाना देने के नाम पर, उनका क़त्लेआम करने की परियोजना के बारे में, चेनल 4 को जो उन्होंने बताया, उसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
उन्होंने बताया कि GHF नाम की संस्था,दरअसल, अमेरिकी-इसरायली भाड़े के हत्यारों का एक गिरोह है, जिसे फिलिस्तीनियों का सफ़ाया करने का ठेका दिया गया है. इस घिनौनी संस्था के वहां पहुँचने से पहले, चंद सैनिक, इतनी भारी तादाद में फिलिस्तीनियों को नहीं मार पाते थे. इससे पहले इतने लोग एक जगह इकट्ठे नहीं मिलते थे और उन्हें मारने में गोला बारूद भी बहुत खर्च होता था. यह तो हम भी कई बार लिख चुके हैं, लेकिन उसके आगे जो उन्होंने बताया, वह दिमाग सुन्न करने वाला है. IDF और GHF एक ही बात है और इन संस्थाओं के हत्यारे, गाजा के लोगों को तफऱीह के लिए, यह जानने के लिए भी मारते हैं कि शरीर के किस हिस्से में गोली लगने से, इंसान ज्यादा तड़पकर मरता है. तड़पकर मरते हुए बच्चों को देखकर वे हंस रहे होते हैं, उनके विडियो बना रहे होते हैं. उन्होंने इंटरव्यू में बताया कि पहले उनके पास सर, पेट,छाती में गोली लगे घायल, दम तोड़ते मरीज आते थे, लेकिन अभी कुछ दिन से उनके पास जो तड़पते, मरते घायल लोग आते हैं, उन सबके अंडकोष में गोलियां मारी गई होती हैं.
हिटलर ने यहूदियों को बड़े स्तर पर मारने के लिए गैस चैम्बर का इस्तेमाल किया था, लेकिन नाज़ी हत्यारे भी, गैस चैम्बर का दरवाज़ा बंद कर देते थे. तड़पकर मरते बच्चों को वे भी नहीं देखते थे. मौत पर अट्टहास वे भी नहीं करते थे. दूसरी बात उनकी बर्बरता का पता तब चला, जब रुसी लाल सेना ने ओर्शवित्ज़ क़त्लगाह को मुक्त किया. गाजा नरसंहार का तो लाइव प्रसारण हो रहा है. ये किस स्तर की दरिंदगी है, ऐसा तो कभी नहीं सुना. समूची दुनिया ही कितनी संवेदनहीन, अमानवीय हो गई है, किसी को कोई फ़र्क ही नहीं पड़ रहा. नाजिय़ों को तो फांसियां हुई थीं. इसरायली-अमेरिकी ‘नाज़ीÓ तो पार्टियाँ कर रहे हैं!!!! प्रोफ़ेसर निक मेनार्ड को क्रांतिकारी मज़दूर मोर्चा का सलाम.