अंतिम समय में प्रतिबंधित वन क्षेत्र हड़पने में जुटे भाजपाई फऱीदाबाद ( मज़दूर मोर्चा) सत्ता में रह कर दस साल तक खूब लूट कमाई और अवैध कब्जे करने-करवाने वाले भाजपाई इस बार सत्ता में नहीं आने की आशंका के चलते सरकार के कार्यकाल के अंत में चारों हाथ पैरों से लूट कमाई करने में जुटे हैं। इसमें उनका सहयोग घोटालों का गढ़ कहे जाने वाले नगर निगम की मुखिया मोना ए श्रीनिवास से लेकर पर्यावरण संरक्षण के नाम पर वन संसाधनों की बंदरबांट करने वाले वन विभाग के आला अधिकारी शामिल हैं। शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा और खट्टर के कलेक्शन एजेंट अजय गौड़ के इशारे पर निगमायुक्त नियमों को ताक पर रख कर पीएलपीए संरक्षित सेक्टर 46 में सडक़ बनवा रही हैं। निर्माण में कोई बाधा न पड़े इसलिए केंद्रीय मंत्री के खास चेले जेई प्रवीन बैंसला को सडक़ निर्माण की जिम्मेदारी सौेपी गई है।
हूडा द्वारा दो दशक पहले बसाया गया सेक्टर 46 का एक बड़ा हिस्सा पीएलपीए संरक्षित वन क्षेत्र में आने के कारण सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इस इलाके में किसी भी तरह की गैर वानिकी गतिविधि पूर्णतया प्रतिबंधित है। यही कारण है कि कोर्ट के आदेश से पहले बनाई गई सडक़ में टूट फूट होने पर उसकी मर मत तक नहीं कराई जाती है। पीएलपीए संरक्षित क्षेत्र होने के कारण वन विभाग पर इस इलाके की देखभाल और सरंक्षण का जि मा है। बावजूद इसके निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास ने सेक्टर 46 पीएलपीए संरक्षित क्षेत्र में बाकायदा पक्की सडक़ बनवाने का आदेश जारी कर आनन फानन 1 करोड़ 60 लाख का टेंडर भी जारी करा दिया। बिना वन विभाग की एनओसी और पटवारी की रिपोर्ट ही उन्होंने काम शुरू कराने का आदेश जारी कर दिया।
नगर निगम सूत्रों के अनुसार मोना ए श्रीनिवास ने इन्हीं भाजपाइयों के इशारेे पर नाचते हुए नियम कायदे ताक पर रख कर आनन-फानन ये काम शुरू कराया है। मंत्रियों का मामला होने के कारण ही वन विभाग के अधिकारी भी चुप्पी साधे बैठे हैं। दरअसल, सेक्टर 46 की बेशकीमती ज़मीन पर सीमा त्रिखा, कृष्णपाल गूजर और अजय गौड़ गिद्ध दृष्टि गड़ाए हुए हैं। इन्हीं के इशारे पर करीब सवा साल पहले तत्कालीन खट्टर सरकार ने केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को पत्र लिख कर फरीदाबाद में पीएलपीए की धारा चार-पांच के तहत संरक्षित अनंगपुर, अनखीर गांव, सेक्टर 46, लेजर वैली सहित कुछ अन्य इलाकों को संरक्षित क्षेत्र से बाहर किए जाने की सिफारिश की थी।
जिस तरह बड़बोले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार सौ पार का नारा लगाने के बावजूद 240 सीटें, वह भी रो पीट कर नंगी बेईमानी करके हासिल कर सके और प्रदेश मेें पांच सीटें गंवाने के बाद भाजपाइयों को अहसास हो गया है कि इस विधानसभा चुनाव में जनता उन्हें उखाड़ फेकेगी। ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले ही सारे भाजपाई जमकर लूट करने में जुट गए हैं।
भाजपाइयों को लगता है कि कमजोर ही सही मोदी की सरकार है तो केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय से पीएलपीए संरक्षित क्षेत्रों को मुक्त करा लिया जाएगा। इसीलिए भाजपा नेता यहां की बेशकीमती जमीन बेनामी रूप से जीपीए आदि के जरिए कब्जे में ले रहे हैं। इसमें हूडा के रिज्यूम प्लॉटों के नाम पर मोटी लूट कमाई करने में माहिर धनेश अदलखा, मंत्री गूजर और खट्टर का खास अजय गौड़ तो लगे ही हैं शिक्षामंत्री सीमा त्रिखा भी हाथ आजमा रही हैं।
बेशकीमती जमीनों पर तो कब्जा कर लिया गया लेकिन उनकी कीमत बढ़ाने के लिए यहां सडक़ जैसी आधारभूत सुविधाएं विकसित कराने की आवश्यकता है। तो इसके लिए भ्रष्टाचार का गढ़ नगर निगम तो है ही, भले ही इलाका पीएलपीए संरक्षित हो, हूडा का हो लेकिन शिक्षामंत्री के इशारे पर निगमायुक्त मोना ए श्रीनिवास यहां सडक़ बनवा रही हैं। निगम सूत्रों के अनुसार नेताओं की कठपुतली बनीं मोना ए श्रीनिवास ने पटवारी की रिपोर्ट नहीं ली क्योंकि उसकी रिपोर्ट पीएलपीए संरक्षित इलाका होने के कारण निर्माण नहीं कराया जा सकता ही आनी थी। इसके अलावा वन विभाग से भी कोई पत्र व्यवहार नहीं किया गया और आनन-फानन एक करोड़ साठ लाख रुपये का टेंडर जारी करा दिया।
निगम सूत्रों के अनुसार गड़बड़ होने के कारण निगमायुक्त के आदेश के बावजूद कई जूनियर इंजीनियरों ने काम हाथ में लेने से इनकार कर दिया। इस पर केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गूजर के खास और भ्रष्टाचार में माहिर आउटसोर्स के जेई प्रवीन बैंसला ने यह काम खुद संभाल लिया है। वर्तमान में वह सेक्टर 46 की सडक़ बनवाने के लिए पीएलपीए वन क्षेत्र में मलबा हटवाने के काम में जुटे हैं। भाजपाई पूरा जोर लगा रहे हैं कि चुनाव आचार संहिता की घोषणा होने से पहले किसी भी कीमत पर वहां सडक़ बनने का काम शुरू हो जाए। यदि अगली सरकार भाजपा की नहीं भी बनी तो सडक़ तो बन ही चुकी होगी, जिससे उस इलाके की जमीन की कीमत बढ़ ही जाएगी। बाद में कांग्रेसियों के साथ मिल कर इस बेशकीमती जमीन की बंदरबांट की जाएगी।
सुधी पाठक जानते हैं कि सेक्टर 46 का यह टुकड़ा बेशकीमती है लेकिन पीएलपीए संरक्षित होने के कारण यहां कोई कार्य नहीं हो सकते।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर हूडा को यहां काटे गए प्लॉट रिज्यूम करने पड़े थे और अधिकतर खरीदारों को दूसरी वैकल्पिक जगहों पर प्लॉट दिए गए थे, या जिन्होंने प्लॉट नहीं लिए तो उनकी रकम वापस कर दी गई थी। संरक्षित होने के बावजूद इलाके पर मालिकाना हक तो हूडा का ही है। अपने क्षेत्राधिकार से बाहर जाकर निगमायुक्त वहां पर सडक़ निर्माण नहीं करा सकतीं। निगमायुक्त अपने इलाके में तो लोगों को सीवर-पानी, सडक़ जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा पा रही हैं लेकिन नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए हूडा के उस इलाके में जनता की गाढ़ी कमाई का एक करोड़ साठ लाख रुपये से ज्यादा अवैध रूप से लुटा रही हैं जिसका भविष्य भी अनिश्चित है।
निगमायुक्त को समझ लेना चाहिए कि कृष्ण पाल ओर सीमा त्रिखा के घोटालों को संरक्षित करने वाली सरकार सदैव रहने वाली नहीं है। अगली सरकार ने अगर हिसाब किताब पूछा तो मोना जी कहां मुंह छिपाएंगी। शायद इसी समझदारी के चलते निगम के अनेकों इंजीनियारों ने यह अवैध काम करने से मना कर दिया, केवल कृष्णपाल का संरक्षण प्राप्त आउटसोर्स जेई प्रवीण ही इस काम के लिए आगे आया। बिल्डर-भू माफिया की गोद में बैठी खट्टर-सैनी की भाजपा सरकार ने अरावली और इसके संसाधन बाबा रामदेव जैसे पूंजीपतियों को रेवड़ी की तरह बांटे। भाजपा नेता, विधायक-मंत्रियों ने भी भ्रष्ट प्रशासनिक अधिकारियों से दुरभि संधि कर अरावली को लूटने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पूर्व निगमायुक्त एम शाईन द्वारा कराई गई जांच में अरावली में 140 अवैध फार्म हाउस, बैंकट हॉल, मैरिज हॉल आदि पाए गए थे। इनमें एक चौथाई फार्म हाउस, वरिष्ठ आईएएसए अफसर, उनकी पत्नी, रिश्तेदारों के नाम थे, अनेक राजनेता और उनके पूंजीपति-भूमाफिया सहयोगियों के बैँकट हॉल, फार्म हाउस थे। राजनेता और आला प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार के कारण ही एम शाइन भी इन अवैध कब्जों को हटवा कर अरावली को मुक्त कराने की हि मत नहीं जुटा पाए थे। वर्तमान में इन अवैध फार्म हाउस, गौशाला, धार्मिक स्थलों आदि की संख्या तीन सौ पार कर होने का अनुमान है।
राजनेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों की अरावली को लूटने की हवस खत्म नहीं हुई है। करीब दो दशक से संरक्षित सेक्टर 46 के वन क्षेत्र की हरियाली भी मोटी रकम की लालच में खत्म की जा रही है। यह तब है जब फरीदाबाद देश का दूसरा और विश्व का पच्चीसवां सबसे ज्यादा प्रदूषित जिला बन चुका है। संरक्षित वन क्षेत्र में किसी भी तरह की गैर वानिकी गतिविधि पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी वन विभाग की है लेकिन वन विभाग के सूत्रों के अनुसार राजनेता यह कह कर दबाव बनाते हैं कि सरकार ने इन इलाकों को मुक्त करने के लिए केंद्र से सिफारिश की है, आदेश तो आना ही है तुम कुछ मत करो। जिला वन अधिकारी सुनील ढाका से इस संबंध में जानकारी लेने का प्रयास किया गया लेकिन उन्होंने फोन काट दिया। समझा जा सकता है कि भाजपाईयों का अधिकारियों पर कितना दखल है।