आर्यन हत्याकांड : बचा दिए गए हत्यारे गोरक्षक बैलिस्टिक रिपोर्ट में हो गया खेल, बरामद पिस्तौल से नहीं चली थी गोली

आर्यन हत्याकांड : बचा दिए गए हत्यारे गोरक्षक बैलिस्टिक रिपोर्ट में हो गया खेल, बरामद पिस्तौल से नहीं चली थी गोली
August 10 16:12 2025

खट्टर की पुलिस, खट्टर के हत्यारे तो पकड़े कौन?
फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) कक्षा बारह के छात्र आर्यन को खुद गोली मारने की बात कुबूल करने वाले, कथित गो रक्षक और पूर्व सीएम खट्टर के चहेते अनिल कौशिक को ‘कर्मठÓ एसीपी अमन यादव की मुस्तैद तफ्तीश ने हत्या के दोष से साफ साफ बचा लिया। अमन यादव ने आर्यन की हत्या मेंं प्रयोग की गई जिस पिस्टल को बरामद किया था, बैलिस्टिक, फोरेंसिक जांच में गोली उससे चलना साबित नहीं हो सका। बैलिस्टिक जांच में पाया गया कि जो गोली आर्यन के गले में पाई गई थी वह इस पिस्तौल से नहीं चलाई गई है। सुधी पाठकों को याद होगा तो मज़दूर मोर्चा ने अपने अगस्त व सितंबर 2024 के अंक में और फिर अप्रैल 2025 के अंक में ही बता दिया था कि फोरेंसिक जांच में बताया जाएगा कि इस पिस्तौल से आर्यन को गोली नहीं मारी गई है।

कारण भी तब स्पष्ट कर दिया गया था कि हत्यारोपी अनिल कौशिक ने पुलिस को बताया था कि हत्या के बाद वह सब दिल्ली की ओर भाग गए और हत्या में इस्तेमाल पिस्टल बवाना नहर में फेक दी थी। पुलिस ने वह पिस्टल बवाना नहर में तलाश कर निकालना जरूरी नहीं समझा और अनिल कौशिक के घर से एक पिस्टल की बरामदगी दिखा दी गई। मज़दूर मोर्चा ने तभी मजबूती से बता दिया था कि बरामद पिस्टल फोरेंसिक जांच में गलत पाई जाएगी। कारण भी स्पष्ट कर दिया था कि जिस पिस्टल से हत्या की गई थी वो बवाना नहर से बरामद नहीं की गई बल्कि कौशिक के घर से दूसरी पिस्टल की बरामदगी दिखाई गई थी।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और हत्यारोपियों के इकबालिया बयान के अनुसार उस रात आर्यन को दो गोलियां मारी गई थीं जबकि अनिल कौशिक ने आर्यन को एक गोली मारने की बात कुबूल की थी। मजदूर मोर्चा ने सवाल किया था कि यदि अनिल ने एक ही गोली मारी है तो दूसरी गोली किसने चलाई और वह पिस्टल कहां है जिससे दूसरी गोली चलाई गई, लेकिन खट्टर के गौरक्षक को बचाने के लिए ‘गंभीरता’ से तफ्तीश कर रही पुलिस ने केवल एक ही पिस्तौल बरामद दिखाई। अब मालेगांव बम विस्फोट कांड की तरह इस केस में भी बहुत संभव है कि अदालत सुबूतों के अभाव में खट्टर के चहेतों को बरी कर दे। होना तो यह चाहिए कि अदालत पुलिस को फटकार लगाए और अनिल कौशिक के गोली मारने वाले इकबालिया बयान को संज्ञान में लेकर असली आला कत्ल तलाश करने का हुक्म सुनाए। दूसरी गोली किस पिस्टल से चली उसकी तलाश पुलिस ने क्यों नहीं की इसके लिए जांच अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई का आदेश दे। हत्या साबित नहीं करने की पुलिस की जानबूझ कर की गई खामियों पर कार्रवाई करे। मामले में मृतक आर्यन का पक्ष रखने वाले सरकारी वकील की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्हें भी पुलिस की धीमी जांच पर सवाल उठाने चाहिए थे, घटना के करीब एक साल बाद बैलिस्टिक रिपोर्ट आना संदेह पैदा कर रहा है।

पुलिस ने हत्याकांड में चालीस गवाह बनाए हैं, इनमें मुख्य गवाह तो घटना के समय मौजूद चश्मदीद हर्षित गुलाटी, सागर गुलाटी, कीर्ति शर्मा के अलावा टोल कर्मियों के बयान महत्वपूर्ण हैं, यह खुला हुआ सच है कि गवाह वही बोलते हैं जो सरकार और पुलिस चाहती है। जब पुलिस ने आला कत्ल की बरामदगी में ही खेल कर दिया तो समझना मुश्किल नहीं है कि वह गवाहों को किस ओर ले जाएगी।
अब क्योंकि न्याय की देवी की आंखों की पट्टी उतार दी गई है तो वो भी सत्ता पक्ष की ओर देख कर ही फैसले सुनाने लगी है। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि सत्ता द्वारा पाले पोसे गए गोरक्षक के वेष में मानव हत्यारों की फौज न्याय की देवी को भगवाधारी साध्वी प्रज्ञा, कर्नल पुरोहित की तरह नजर आने लगें, और सुबूत के अभाव में सबको बरी कर दिया जाए।

आर्यन मिश्रा हत्याकांड में पुलिस जिस तरह तफ्तीश कर रही थी ‘मज़दूर मोर्चा’ ने हर कदम पर तफ्तीश में होने वाली खामियों को उजागर किया, यदि पुलिस मज़दूर मोर्चा के सवालों को ही सुलझाने की कोशिश करती तो हत्यारे बच नहीं सकते थे। लेकिन सरकारी तनख्वाह पर काम करने वाली पुलिस कैसे पूर्व सीएम खट्टर के चहेतों के खिलाफ जाने की हिम्मत कर सकती थी। अगर हत्या आर्यन मिश्रा की न होती तो शायद पुलिस आज तक हत्यारे गोरक्षकों तक पहुंच ही न पाती और अज्ञात हत्यारों में केस दर्ज करके आज तक उन्हें तलाशने का नाटक ही कर रही होती। पुलिस बल के साथ गो तस्करों के खिलाफ अभियान चलाने वाले अनिल कौशिक का यह कहना कि उसने आर्यन को मुसलमान समझ कर गोली मारी थी, से समझा जा सकता है कि उसे किसी की हत्या करने में कोई हिचक नहीं होती। अगर मुसलमान है तो बिलकुल भी नहीं। अनिल कौशिक को इस बात का अफसोस है कि उसके हाथ से एक ब्राह्मण की हत्या हो गई लेकिन यह विश्वास भी है कि ब्राह्मण होने के कारण वह जल्द ही मानव हत्या के दोष से बरी हो जाएगा। जब मानव हत्यारों को सरकार और सत्ता की ओर एकटक देखने वाली न्याय-मूर्ति का मूक समर्थन प्राप्त हो तो परिणाम कथित गोरक्षक-मानव हत्यारों के हक में ही आना है। बहुत संभव है कि बरी होने के बाद संघ-भाजपा, बजरंग दल वाले इन सबका फूल माला और गाजे बाजे के साथ स्वागत करें।

 

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