फऱीदाबाद (मज़दूर मोर्चा) सत्ता की शह पर धार्मिक दंगे भड़काने, गोरक्षा के नाम पर पशु पालकों के जानवर लूटने, हिंसा-मारपीट करने वाला बिट्टू बजरंगी एक गनर मिलने के बाद पुलिस वाला भी बन गया है। पुलिस भी बिना सर्च वारंट किसी के घर में नहीं घुसती लेकिन संघी खट्टर का खास चेला बिटुआ तो रोहिंग्या शरणार्थियों की तलाशी लेने उनकी झुग्गियों में घुस गया। यह पहली बार नहीं है, गोरक्षक का चोला ओढ़े बिटुआ नूंह में हाजी जमात अली के दुधारू पशु और गधे भी लूट चुका है। उसे मालूम है कि पुलिस तो कुछ करेगी नहीं, इसलिए बेखौफ होकर मुसलमानों पर कहीं भी हमलावर हो जाता है।
गो रक्षा की दुकानदारी कमजोर होने पर अब बिट्टू मुसलमानों का खुला विरोध कर खुद को जिंदा रखने का प्रयास कर रहा है। मोदी के ऑपरेशन सिंदूर के समर्थन में पाकिस्तान के खिलाफ कुछ करके संघी आकाओं की नजर में अच्छा बनने की लालसा में बिटुआ बीते सोमवार बुढ़ैना में रोहिंग्या शरणार्थियों की मलिन बस्ती पहुंच गया। अपने साथ पत्तलपाड़ों की फौज को भी लेकर गया। रोहिंग्याओं को पाकिस्तानी बताते हुए बिटुआ ने एक झुग्गी में अवैध हथियार आदि छिपा कर रखने का आरोप लगाकर हंगामा शुरू कर दिया।
वहां मौजूद लोगों ने संयुक्त राष्ट्र की शरणार्थी एजेंसी यूएनएचसीआर द्वारा जारी पहचानपत्र दिखाते हुए भारत सरकार द्वारा शरण दिए जाने की बात कही लेकिन दंगाई बिटुआ नहीं माना। सुरक्षा के लिए गनमैन मिलने के बाद खुद को सारे कानूनों से ऊपर समझने वाला बिटुआ झुग्गी में लगा ताला तोडऩे पर अड़ गया। पत्तलपाड़ मीडिया तो उससे भी दो हाथ आगे बढ़ गई और बांस व प्लास्टिक तान कर बनाई गई झुग्गी के पर्दे में छेद कर अंदर तक कैमरा डाल कर कवरेज करने लगे। पत्तलपाड़ों ने ऐसा माहौल बना दिया जैसे कि थोड़ी ही देर में इस झुग्गी से हथियारों को बहुत बड़ा जखीरा बिट्टू बजरंगी निकालेगा।
ताला खोल कर अकेले अंदर घुसने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे बिटुआ ने 112 पर कॉल की तो थोड़ी देर में राइडर सवार दो पुलिस वाले मौके पर पहुंच गए। इसके बाद तो बिटुआ और जोश में आ गया और ताला खुलवा कर झुग्गी की तलाशी लेने को आतुर हो गया। इस दौरान किसी पत्तलपाड़ ने बताया कि बाहर ताला लगा है लेकिन अंदर कोई आदमी मौजूद है। बस बिटुआ ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि जो अवैध सामान है वो तो निकाल दिया गया। पुलिस वालों ने चारों ओर चक्कर लगाने के बाद बताया कि झुग्गी में बाहर निकलने का कोई दूसरा रास्ता नहीं है। पुलिस के आने के बाद झुग्गी मालिक इलियास प्रधान की पत्नी चाबी लेकर आई और ताला खोला गया। महिला तो बाहर खड़ी रही लेकिन पत्तलपाड़ मीडिया और बिटुआ व उसके चट्टे बट्टे अंदर घुस कर सामान उलट पलट कर हथियार बरामद करने में जुट गए लेकिन कुछ नहीं मिला।
झुग्गी के अंदर चावल, दाल तेल के कुछ कट्टे मिले तो खिसियाए बिटुआ ने उन्हें ही निशाना बना डाला और शरणार्थियों पर जमाखोरी का आरोप लगाने लगा। इलियास प्रधान ने बताया कि यह खाद्यान्न उन्हें प्रति माह सरकार की ओर से मिलता है इसके अलावा कुछ सामाजिक संस्थाएं दान दे जाती हैं, रमजान में मुस्लिम संगठनों ने भी जकात- फितरे में खाद्यान्न दान किया था, वही है। आखिर में बिटुआ को एक टूटा हुआ लैपटॉप मिल गया। इलियास ने बताया कि कबाड़ का काम करता है, किसी ने कबाड़ में बेचा था उसे बनवाने के लिए रखा है। बिटुआ के कहने पर पुलिस लैपटॉप को अपने साथ ले गई।
अपना दांव फेल होता देख बिटुआ औकात पर उतर आया और रोहिंग्या शरणार्थियों को पाकिस्तानी और मुसलमान बताते हुए उन्हें वहां से हटाए जाने की मांग करने लगा। गाय, गोबर-गोमूत्र मानसिकता से कभी निकला हो तो उसे मालूम होता कि इन शरणार्थियों को उसकी ही ट्रिपल इंजन सरकार के गृहमंत्री अमित शाह ने बसाया है, न सिर्फ बसाया है हर महीने राशन भी पहुंचाया जाता है। उसको गोरक्षा के नाम पर दंगा भड़काने की ट्रेनिंग देने वाली भाजपा और पीओके को भारत मेें लाने के लिए जान देने का दावा करने वाले गृहमंत्री अमित शाह ने ही इन मुसलमानों को बसाया हुआ है। कुछ नहीं निकलने के बाद बिटुआ अपना सा मुंह लेकर वापस हो गया। सवाल यह उठता है कि गनमैन मिलने से क्या बिटुआ को किसी के घर में घुसने और तलाशी लेने का अधिकार मिल जाता है क्या? पुलिस प्रवक्ता यशपाल ने कहा कि बिट्टू बजरंगी या किसी नागरिक को ऐसा करने का अधिकार नहीं है। यदि मकान मालिक यानी रोहिंग्या शरणार्थी थाने में शिकायत देता है तो बिट्टू के खिलाफ उचित धाराओं मेें केस दर्ज किया जाएगा।
दरअसल, बिटुआ खुद में कुछ नहीं है लेकिन संघ-भाजपा को उस जैसे अनपढ़ दंगाई अपनी राजनीति के लिए मुफीद लगते हैं इसलिए उसे बिना पट्टे के पालतू की तरह इस्तेमाल किया जाता है। यानी उससे दंगा करवाओ लेकिन जब बात बिगड़ जाए कोई सम्बंध न होकर पल्ला झाड़ लो, जैसा कि नूंह दंगों के बाद किया गया था। पहलगाम आतंकी हमला और फिर मोदी के ऑपरेशन सिंदूर फ्लॉप होने से संघ-भाजपा अपनी दिन ब दिन पिटती छवि परेशान हैं। ऐसे में बिटुआ जैसे भाड़े के टट्टू को काम पर लगा कर छवि निखारने की भरपूर कोशिश की जा रही है। दरअसल, बिटुआ और इसके जैसे कथित भक्त और कुछ नहीं कर रहे बल्कि भारत में हिंदू मुस्लिम दंगे भड़का कर देश को कमजोर करने की पाकिस्तानी आईएसआई के एजेंडे को ही बिना खर्ची-पर्ची लागू कर रहे हैं। जब तक बिटुआ जैसे दंगाई देश में हैं आईएसआई को यहां अपने आतंकवादी भेजने की जरूरत नहीं होनी चाहिए।